एजेंसी, नई दिल्ली। New CDS of India : भारतीय रक्षा तंत्र और सैन्य नेतृत्व के इतिहास में शनिवार को एक बेहद महत्वपूर्ण अध्याय पूरा हो गया। देश के दूसरे चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ यानी सीडीएस जनरल अनिल चौहान का 3 साल और 8 महीने का अत्यंत गौरवशाली कार्यकाल आधिकारिक रूप से समाप्त हो गया है। पद छोड़ने के अवसर पर उन्होंने अपने पूरे सफर और सेवाकाल को देश की सुरक्षा के लिहाज से ‘बेहद संतोषजनक’ करार दिया। इस विदाई वेला के बाद अब देश के शीर्ष सैन्य नेतृत्व की कमान एक नई ऊर्जा के हाथों में सौंप दी गई है। रविवार को सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल एनएस राजा सुब्रमणि पूर्ण रूप से भारत के अगले नए सीडीएस के रूप में अपनी कमान संभालेंगे और कार्यभार ग्रहण करेंगे। इस ऐतिहासिक विदाई के विशेष अवसर पर जनरल अनिल चौहान को भारतीय थल सेना, वायु सेना और नौसेना की संयुक्त टुकड़ियों द्वारा पूरे कूटनीतिक सम्मान के साथ ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया गया। इसके तुरंत बाद उन्होंने राष्ट्रीय समर स्मारक (नेशनल वार मेमोरियल) पहुंचकर देश की संप्रभुता के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले अमर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि भी अर्पित की।
Government appoints Lieutenant General NS Raja Subramani as the next Chief of Defence Staff (CDS).
He will assume office after General Anil Chauhan completes his tenure on the 30th of May.#NSRajaSubramani #CDS pic.twitter.com/IPYCpRQl6g
— All India Radio News (@airnewsalerts) May 9, 2026
एकीकृत सैन्य कमान और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में निभाया सबसे मुख्य रोल
देश के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत के एक विमान हादसे में हुए आकस्मिक और दुखद निधन के लगभग 9 महीने बाद, सितंबर 2022 में जनरल अनिल चौहान ने इस अत्यंत चुनौतीपूर्ण और शीर्ष रक्षा पद की कमान अपने हाथों में ली थी। अपने पूरे कार्यकाल के दौरान उन्होंने भारतीय सेनाओं के आधुनिकीकरण और उन्हें भविष्य के युद्धों के अनुकूल तैयार करने में एक बेहद निर्णायक और असाधारण भूमिका का निर्वाह किया। उनकी सबसे बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धियों में भारतीय सेना के तीनों अंगों के बीच आपसी तालमेल, समन्वय और संयुक्त क्षमता को एक नए शिखर पर पहुंचाना माना गया है। इसके साथ ही सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण और गुप्त माने जाने वाले ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के सफल नियोजन, कुशल रणनीति और उसके जमीनी क्रियान्वयन का पूरा श्रेय भी उनके कुशल नेतृत्व को ही जाता है। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, उन्होंने भारत की सैन्य ताकत को वैश्विक मानचित्र पर कई गुना अधिक शक्तिशाली बनाने के लिए ‘थियेटराइजेशन मॉडल’ यानी एकीकृत सैन्य कमान के गठन की दिशा में कई अभूतपूर्व और बड़े कदम उठाए, जो आने वाले समय में गेम चेंजर साबित होंगे। गौरतलब है कि जनरल चौहान का नियमित कार्यकाल पिछले साल 30 सितंबर को ही समाप्त होने वाला था, लेकिन देश की सुरक्षा आवश्यकताओं और उनकी काबिलियत को देखते हुए केंद्र सरकार द्वारा उन्हें सेवा विस्तार देने का एक बड़ा नीतिगत फैसला किया गया था।
बालाकोट एयर स्ट्राइक की रणनीति और सैन्य जीवन की बड़ी उपलब्धियां
वर्ष 1981 में भारतीय सेना की प्रतिष्ठित 11 गोरखा राइफल्स रेजिमेंट में एक युवा अधिकारी के रूप में कमीशन प्राप्त करने वाले जनरल अनिल चौहान का पूरा सैन्य सफर बेहद विशिष्ट, साहसिक और प्रेरणादायी रहा है। देश की सुरक्षा से जुड़े कई ऐतिहासिक मोर्चों पर उन्होंने अपनी रणनीतिक कुशलता का लोहा मनवाया है। फरवरी 2019 के उस दौर को कौन भूल सकता है जब भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने सीमा पार जाकर पाकिस्तान के बालाकोट में स्थित आतंकी ठिकानों और प्रशिक्षण शिविरों को पूरी तरह से नेस्तनाबूद कर दिया था। उस बेहद संवेदनशील और कड़े सैन्य ऑपरेशन के समय जनरल चौहान भारतीय सेना में सैन्य अभियान महानिदेशक (डीजीएमओ) के मुख्य पद पर तैनात थे और इस पूरे जवाबी हमले की सटीक रणनीति तैयार करने के साथ-साथ अत्यंत महत्वपूर्ण सामरिक इनपुट देने में उनकी बहुत बड़ी भूमिका रही थी। इसके अलावा अपने लंबे और शानदार करियर में उन्होंने भारतीय सेना की पूर्वी कमान के मुख्य कमांडर के रूप में और आतंकवाद प्रभावित बारामूला क्षेत्र में इन्फैंट्री डिवीजन के कुशल कमांडर के रूप में अग्रिम मोर्चों पर अपनी सेवाएं दी हैं। राष्ट्र के प्रति उनकी इसी बेमिसाल, उत्कृष्ट और वफादार सेवाओं के सम्मान स्वरूप उन्हें देश के सर्वोच्च सैन्य पुरस्कारों में शामिल परम विशिष्ट सेवा पदक और उत्तम युद्ध सेवा पदक सहित कई अन्य शीर्ष वीरता पदकों से सम्मानित किया जा चुका है।
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