एजेंसी, काठमांडू। Nepal 5.0 Earthquake News : भारत के पड़ोसी पर्वतीय राष्ट्र नेपाल में एक बार फिर से भूगर्भीय हलचल के कारण धरती कांप उठी है। नेपाल के लुंबिनी प्रशासनिक प्रभाग के अंतर्गत आने वाले पूर्वी रुकुम जनपद में रविवार की ढलती शाम को अचानक तीव्र भूकंप के झटके महसूस किए गए, जिनकी तीव्रता भूकम्पमापी यंत्र पर 5.0 मापी गई है। इस अचानक आए तेज कंपन के कारण संपूर्ण प्रभावित क्षेत्र के नागरिकों में कुछ समय के लिए भारी डर और अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया। हालांकि, राहत की बात यह रही कि प्रारंभिक प्रशासनिक सूचनाओं और जमीनी स्तर से प्राप्त विवरणों के अनुसार, इस भूगर्भीय घटना की वजह से देश में किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान या किसी इमारत के ढहने की कोई अप्रिय खबर सामने नहीं आई है, जो एक बड़ी राहत की बात है।
EQ of M: 4.6, On: 19/07/2026 16:15:32 IST, Lat: 28.538 N, Long: 82.695 E, Depth: 10 Km, Location: Nepal.
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काठमांडू से 400 किलोमीटर दूर कोल क्षेत्र में था भूकंप का मुख्य केंद्र
नेपाल के आधिकारिक भूगर्भीय निकाय, राष्ट्रीय भूकंप निगरानी एवं अनुसंधान केंद्र द्वारा जारी की गई तकनीकी विज्ञप्ति के अनुसार, यह भूकंपीय हलचल स्थानीय घड़ी के मुताबिक शाम 4:30 बजे दर्ज की गई। भू-वैज्ञानिकों ने बताया कि धरती के भीतर आए इस कंपन का मुख्य केंद्र बिंदु पूर्वी रुकुम जनपद के अंतर्गत आने वाले कोल नामक ग्रामीण क्षेत्र की गहराई में स्थित था। भौगोलिक दृष्टि से यह मुख्य केंद्र नेपाल की राजधानी काठमांडू से लगभग 400 किलोमीटर की दूरी पर पश्चिमी दिशा में स्थित है। केंद्र बिंदु की तीव्रता इतनी पर्याप्त थी कि इसका सीधा असर आसपास के कई अन्य पहाड़ी और मैदानी जनपदों पर भी साफ तौर पर देखने को मिला।
कई सीमावर्ती जनपदों में भी कांपी धरती, एहतियातन घरों से बाहर निकले लोग
इस भूगर्भीय हलचल का प्रभाव केवल पूर्वी रुकुम की सीमाओं तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके तेज झटके आसपास के कई अन्य पर्वतीय जिलों में भी बड़े पैमाने पर महसूस किए गए। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार रोल्पा, बागलुंग और म्याग्दी जनपदों के स्थानीय निवासियों ने भी अपने घरों में बर्तनों और छतों के हिलने तथा तेज कंपन की पुष्टि की है। जैसे ही लोगों को भूमि के भीतर हो रही इस हलचल का आभास हुआ, वे किसी भी संभावित बड़े खतरे से बचने के लिए एहतियातन अपने पक्के मकानों और बहुमंजिला इमारतों से बाहर निकलकर खुले मैदानों और सड़कों की ओर भागने लगे।
वरिष्ठ भू-वैज्ञानिक ने दी स्थिति की जानकारी, प्रशासन पूरी तरह सतर्क
राष्ट्रीय भूकंप निगरानी एवं अनुसंधान केंद्र के अत्यंत वरिष्ठ भू-वैज्ञानिक लोक विजय अधिकारी ने इस पूरी प्राकृतिक घटना पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए बताया कि भूकंप के तुरंत बाद देश के सभी संबंधित प्रशासनिक केंद्रों से संपर्क साधा गया है। उनके अनुसार, अभी तक किसी भी सुदूर ग्रामीण या शहरी क्षेत्र से किसी नागरिक के हताहत होने अथवा घायल होने की कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई है। गृह मंत्रालय और स्थानीय जिला प्रशासन की टीमें स्थिति पर बहुत ही बारीकी से अपनी नजर बनाए हुए हैं। किसी भी संभावित परवर्ती झटके की आशंका को देखते हुए स्थानीय राहत बलों और खोज दस्तों को पूरी तरह से सजग और सतर्क रहने के कड़े निर्देश जारी किए गए हैं।
विवर्तनिक प्लेटों के घर्षण के कारण संवेदनशील जोन में आता है नेपाल
भौगोलिक और भू-वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो नेपाल की स्थिति विश्व के अत्यंत संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्रों में होती है। यह संपूर्ण देश महान हिमालयी पर्वत श्रृंखला की गोद में स्थित है, जिसके ठीक नीचे भारतीय और यूरेशियन नामक दो विशाल विवर्तनिक प्लेटें निरंतर एक-दूसरे की ओर खिसक रही हैं। इन दोनों विशाल भू-भागों के आपस में टकराने और उनके बीच उत्पन्न होने वाले भारी घर्षण के कारण इस पूरे क्षेत्र की भूमि के भीतर अत्यधिक ऊर्जा संचित होती रहती है, जो समय-समय पर भूकंप के रूप में बाहर आती है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यही मुख्य कारण है कि नेपाल को वैश्विक मानचित्र पर सबसे अधिक सक्रिय भूकंपीय क्षेत्र (सीस्मिक जोन 4 और 5) के अंतर्गत वर्गीकृत किया गया है, जिसके चलते यहाँ प्रतिवर्ष सैकड़ों छोटे और मध्यम श्रेणी के झटके दर्ज किए जाते हैं।
वर्ष 2015 की विनाशकारी त्रासदी के बाद आपदा प्रबंधन तंत्र हुआ मजबूत
नेपाल के इतिहास में भूगर्भीय आपदाओं का एक बेहद दर्दनाक और काला इतिहास रहा है। इससे पूर्व वर्ष 2015 में आए एक अत्यंत विनाशकारी और प्रलयंकारी भूकंप ने, जिसकी तीव्रता 7.8 मापी गई थी, समूचे देश को मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया था। उस भयावह प्राकृतिक त्रासदी के दौरान लगभग 9,000 से अधिक निर्दोष नागरिकों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था, जबकि लाखों की संख्या में लोग बेघर और गंभीर रूप से प्रभावित हुए थे। उस ऐतिहासिक और मर्मांतक तबाही से सीख लेते हुए नेपाल सरकार ने हालिया वर्षों में अपने आंतरिक भूकंपीय बुनियादी ढांचे, पूर्व चेतावनी प्रणालियों, डिजिटल निगरानी केंद्रों और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन की संपूर्ण प्रशासनिक व्यवस्था को पहले की तुलना में कहीं अधिक आधुनिक, सुदृढ़ और संवेदनशील बनाया है, ताकि भविष्य में होने वाले किसी भी बड़े नुकसान को न्यूनतम किया जा सके।
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