एजेंसी, नई दिल्ली। NEET Exam 2026 : देश भर में रविवार को अत्यंत कड़े सुरक्षा प्रबंधों और व्यापक प्रशासनिक निगरानी के बीच राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा का आयोजन बड़े स्तर पर संपन्न कराया गया। इस परीक्षा के दौरान देश भर के विभिन्न राज्यों में स्थापित परीक्षा केंद्रों के बाहर से अत्यंत भावुक और विचलित करने वाली तस्वीरें एवं वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए हैं। यह तस्वीरें उन अभागे परीक्षार्थियों की थीं, जो किसी न किसी अपरिहार्य कारणवश निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने आवंटित परीक्षा केंद्रों पर पहुंचने में पूरी तरह असमर्थ रहे। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के बेहद सख्त नियमों के चलते इन देरी से पहुंचने वाले अभ्यर्थियों को केंद्रों के भीतर प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी गई, जिसके कारण उनका पूरा साल बर्बाद होने की नौबत आ गई है। वहीं दूसरी ओर राजस्थान के अजमेर में एक परीक्षा केंद्र पर पारंपरिक पोशाक को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
Team NTA, Team Bharat: How India Came Together for NEET (UG) 2026
On 21 June 2026, more than 20 lakh candidates sat for the NEET (UG) 2026 re-examination across 5,440 centres in India and 14 centres abroad. The paper was administered in 13 languages, including Hindi and English.…
— National Testing Agency (@NTA_Exams) June 21, 2026
परीक्षा केंद्रों के बाहर रोते-बिलखते छात्र और सुरक्षा कर्मियों से गुहार
इंटरनेट पर तेजी से प्रसारित हो रहे विभिन्न वीडियो और तस्वीरों में यह साफ देखा जा सकता है कि देश के कई महानगरों में छात्र-छात्राएं परीक्षा केंद्रों के मुख्य दरवाजों के बाहर खड़े होकर तैनात सुरक्षा कर्मियों और प्रशासनिक अधिकारियों के सामने अंदर जाने के लिए रो-रोकर गुहार लगा रहे थे। बेंगलुरु और भोपाल जैसे बड़े शहरों से सामने आए दृश्यों में कई छात्राएं मुख्य द्वार बंद हो जाने के बाद जमीन पर बैठकर बिलखती नजर आईं, क्योंकि उनकी जिंदगी की सबसे महत्वपूर्ण और साल भर की कठिन मेहनत वाली परीक्षा में बैठने से उन्हें कड़ाई से रोक दिया गया था। समय की पाबंदी के चलते अधिकारियों ने नियमों का हवाला देते हुए मुख्य द्वार खोलने से पूरी तरह इनकार कर दिया, जिससे छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया।
बीस लाख से अधिक परीक्षार्थियों की भागीदारी और विशेष इंतजाम
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा जारी किए गए एक आधिकारिक वक्तव्य के अनुसार, इस वर्ष देश के भीतर स्थापित पांच हजार से अधिक मुख्य केंद्रों तथा विदेशों में बनाए गए चौदह विशेष परीक्षा केंद्रों पर बीस लाख से भी अधिक परीक्षार्थी इस महापरीक्षा में शामिल हुए। यह देशव्यापी परीक्षा हिंदी और अंग्रेजी समेत कुल तेरह अलग-अलग क्षेत्रीय भाषाओं में आयोजित की गई थी ताकि किसी भी भाषा के छात्र को असुविधा न हो। प्रशासन ने सभी अभ्यर्थियों के लिए व्यापक प्रबंध किए थे, जिनमें विशेष रूप से शारीरिक रूप से अक्षम और दिव्यांग श्रेणी के दस हजार से अधिक परीक्षार्थी भी शामिल थे। चिकित्सा समस्याओं से जूझ रहे लगभग इक्यासी गंभीर रूप से बीमार अभ्यर्थियों के लिए विशेष आपातकालीन व्यवस्था की गई थी, जिनमें एक ऐसा जुझारू छात्र भी शामिल था जिसका हाल ही में भीषण सड़क हादसा हुआ था।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम और अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग
इस बार परीक्षा की शुचिता और गोपनीयता को बनाए रखने के लिए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए थे। देश के सभी केंद्रों पर गड़बड़ी रोकने के लिए अत्याधुनिक पहचान प्रणालियों का उपयोग किया गया। इसके तहत सभी परीक्षार्थियों का डिजिटल फिंगरप्रिंट और चेहरे की पहचान के जरिए कड़ा सत्यापन किया गया। इसके साथ ही पूरे परिसर में आधुनिक क्लोज्ड सर्किट टेलीविजन कैमरों से पल-पल की निगरानी रखी जा रही थी। परीक्षा कक्षों में किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के दुरुपयोग को रोकने के लिए शक्तिशाली नेटवर्क जैमर लगाए गए थे और स्थानीय राज्य पुलिस बल के सहयोग से जांच चौकियों के माध्यम से ही छात्रों को गहन तलाशी के बाद अंदर जाने दिया गया।
अजमेर केंद्र पर बुर्के को लेकर उपजा नया प्रशासनिक विवाद
इसी परीक्षा के दौरान राजस्थान के ऐतिहासिक शहर अजमेर के एक परीक्षा केंद्र से एक बड़ा विवाद भी सामने आया, जिसने राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोर ली हैं और अब यह चर्चा का विषय बन गया है। यहाँ परीक्षा देने पहुंची कुलसुम बानो नाम की एक छात्रा ने केंद्र पर तैनात सुरक्षा कर्मियों द्वारा तलाशी के दौरान बुर्का और दुपट्टा हटाने की मांग किए जाने पर कड़ा ऐतराज जताया और केंद्र के बाहर भारी हंगामा शुरू कर दिया। छात्रा का दावा था कि जब उसने पिछली परीक्षा के दौरान भी यही पारंपरिक पोशाक पहनी थी, तब उसे नहीं रोका गया था। उसने मीडिया कर्मियों से बातचीत करते हुए बेहद तल्ख लहजे में कहा कि उसके लिए इस परीक्षा को उत्तीर्ण करने से कहीं ज्यादा उसकी धार्मिक पहचान और बुर्का जरूरी है, और यदि इन कपड़ों में उसे प्रवेश नहीं दिया जाता तो वह परीक्षा का पूरी तरह बहिष्कार कर देगी।
देश की अन्य प्रमुख राजनीतिक और सामाजिक हलचलें
चिकित्सा प्रवेश परीक्षा के अलावा देश के अन्य हिस्सों से भी कई बड़ी खबरें सामने आईं। महाराष्ट्र की राजनीति में चल रही भारी उथल-पुथल के बीच बागी राजनेता संजय दीना पाटिल की सुपुत्री राजुल पाटिल ने अचानक मातोश्री पहुंचकर पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और युवा नेता आदित्य ठाकरे से मुलाकात की। उन्होंने मीडिया के सामने स्पष्ट किया कि पारिवारिक फैसले अलग हो सकते हैं, परंतु वह राजनीतिक रूप से पूरी निष्ठा के साथ ठाकरे गुट के साथ खड़ी हैं। वहीं दूसरी ओर, पश्चिम बंगाल की सरकार सरकारी अधिकारियों और पुलिसकर्मियों पर होने वाले हमलों को रोकने के लिए आगामी विधानसभा सत्र में दो बेहद कड़े कानून लाने की तैयारी कर रही है। दक्षिण भारत के कर्नाटक राज्य की राजधानी बेंगलुरु में आयोजित कांग्रेस के एक बड़े राजनैतिक कार्यक्रम के दौरान मंच पर कार्यकर्ताओं द्वारा की जा रही नारेबाजी को देखकर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे बुरी तरह भड़क गए और उन्होंने सख्त कार्रवाई की चेतावनी दे डाली।
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