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नर्मदापुरम में डोली धरती : इटारसी के केसला में 3.8 तीव्रता का भूकंप, खौफ में घरों से बाहर भागे ग्रामीण

देश/प्रदेश नर्मदापुरम प्रादेशिक मध्‍य प्रदेश

एजेंसी, नर्मदापुरम। MP Earthquake News : मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले के अंतर्गत आने वाले इटारसी के आदिवासी विकासखंड केसला और उसके आस-पास के ग्रामीण अंचलों से एक बड़ी खबर सामने आई है। यहाँ सोमवार की रात अचानक धरती हिलने से समूचे इलाके में भयंकर अफरा-तफरी और दहशत का माहौल पैदा हो गया। देर रात आए भूकंप के इन झटकों की वजह से लोग अपने-अपने घरों को छोड़कर खुले मैदानों की तरफ भागने लगे। हालांकि, राहत की बात यह रही कि रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता काफी कम मापी गई थी, जिसके कारण क्षेत्र में किसी भी तरह के जान-माल के बड़े नुकसान या मकानों के गिरने की कोई अप्रिय खबर सामने नहीं आई है। लेकिन अचानक महसूस हुए इस भूगर्भीय कंपन ने ग्रामीणों के मन में एक गहरा खौफ पैदा कर दिया है, जिसकी वजह से लोग रात भर सो नहीं सके।

चिचवानी और छीतापुरा गांवों में कई सेकंड तक महसूस हुआ कंपन

स्थानीय सूत्रों से मिली विस्तृत जानकारी के अनुसार, केसला विकासखंड के सुदूर ग्रामीण इलाकों विशेषकर चिचवानी और उससे बिल्कुल सटे हुए छीतापुरा गांव में रात के समय यह भूगर्भीय हलचल सबसे ज्यादा महसूस की गई। सोमवार रात करीब 9 बजकर 38 मिनट पर जब अधिकांश ग्रामीण भोजन करने के बाद अपने घरों में आराम कर रहे थे या आंगनों में बैठे थे, तभी अचानक जमीन के भीतर से एक अजीब सी गड़गड़ाहट और तेज कंपन महसूस हुआ। देखते ही देखते घरों के भीतर रखे बर्तन और अन्य सामान हिलने लगे। जमीन को इस तरह डोलता देख लोग किसी अनहोनी की आशंका से कांप उठे और ‘भूकंप-भूकंप’ चिल्लाते हुए तुरंत खुले आसमान के नीचे आ गए। ग्रामीण देर रात तक चौपालों पर इकट्ठा होकर इसी प्राकृतिक आपदा को लेकर चर्चा करते हुए नजर आए।

चश्मदीद ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने बयां किया आंखों देखा हाल

इस अचानक आई विपदा को लेकर क्षेत्र के जागरूक ग्रामीण विनोद वारिबा ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि हालांकि झटके बहुत ज्यादा विनाशकारी नहीं थे, लेकिन रात के सन्नाटे में अचानक चारपाई और जमीन के हिलने का स्पष्ट एहसास होने से पूरा परिवार बुरी तरह डर गया था। वहीं दूसरी तरफ, छीतापुरा क्षेत्र के जनपद सदस्य संतोष सल्लाम ने घटना के समय की स्थिति बताते हुए कहा कि वे रात के लगभग साढ़े नौ बजे अपने घर की छत पर बैठे ठंडी हवा का आनंद ले रहे थे, तभी अचानक कुछ सेकंड के लिए ऐसा लगा जैसे पूरी छत तेजी से हिल रही हो। इस असामान्य हलचल को भांपते ही वे तुरंत नीचे भागे और मोहल्ले के अन्य लोगों को भी सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए सचेत किया।

मौसम विज्ञान केंद्र और राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने की आधिकारिक पुष्टि

केसला इलाके में आए इस भूकंप की पुष्टि सरकारी तौर पर भी कर दी गई है। मौसम केंद्र भोपाल और देश की सर्वोच्च संस्था नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (एनसीएस) द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 8 जून की रात ठीक 9 बजकर 39 मिनट पर जमीन के भीतर यह हलचल दर्ज की गई थी। वैज्ञानिक उपकरणों पर इस भूकंप की वास्तविक तीव्रता 3.8 मैग्नीट्यूड दर्ज की गई है। भू-वैज्ञानिकों के अनुसार, इस भूकंप का मुख्य केंद्र बिंदु (एपिसेंटर) 22.367 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 77.688 डिग्री पूर्वी देशांतर पर स्थित था। वहीं, अगर इसकी गहराई की बात करें तो यह धरती की सतह से लगभग 10 किलोमीटर नीचे गहराई में सक्रिय हुआ था, जिसके चलते ऊपरी सतह पर हल्का झटका महसूस हुआ।

प्रशासनिक अमला पूरी तरह अलर्ट, राजस्व विभाग को जांच के आदेश

धरती हिलने की इस खबर के बाद जिला प्रशासन और स्थानीय तहसील कार्यालय पूरी तरह से मुस्तैद हो गया है। क्षेत्र के उप-जिलाधिकारी (एसडीएम) नीलेश शर्मा ने इस पूरे मामले पर त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए बताया कि मौसम विभाग से भूकंप की आधिकारिक पुष्टि होते ही उन्होंने पूरे केसला ब्लॉक के राजस्व अधिकारियों और पटवारियों को तुरंत फील्ड पर जाने के निर्देश जारी कर दिए हैं। प्रशासनिक टीम को प्रभावित गांवों का दौरा कर यह पता लगाने को कहा गया है कि कहीं किसी गरीब के कच्चे मकान में दरार तो नहीं आई है। इसके साथ ही एसडीएम ने आम जनता से विशेष अपील की है कि सोशल मीडिया पर फैलने वाली किसी भी तरह की भ्रामक खबरों और विनाश की अफवाहों पर बिल्कुल ध्यान न दें और केवल प्रशासनिक जानकारियों पर ही भरोसा करें।

हल्की श्रेणी का था झटका, बड़े नुकसान की कोई आशंका नहीं

भू-विज्ञान के विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों का मानना है कि रिक्टर पैमाने पर 3.8 की तीव्रता वाले भूकंप को बेहद हल्की और सामान्य श्रेणी में गिना जाता है। इस तरह के कम तीव्रता वाले भूकंपों से पक्के मकानों या बड़ी इमारतों के ढहने की संभावना न के बराबर होती है। आमतौर पर ऐसे झटकों से केवल लटके हुए पंखे, खिड़कियां या हल्के सामान ही हिलते हैं। हालांकि, इसके बावजूद भी ग्रामीण इलाकों में जागरूकता की कमी और अचानक आई इस प्राकृतिक हलचल के कारण लोगों का घबरा जाना बेहद स्वाभाविक था। फिलहाल पूरे क्षेत्र में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और जनजीवन धीरे-धीरे सामान्य पटरी पर लौट आया है।

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