एजेंसी, नई दिल्ली। Manipur News : मणिपुर के अशांत सीमावर्ती जिलों से एक राहत भरी खबर सामने आई है, जहां सशस्त्र समूहों के कब्जे से 31 बंधकों को सुरक्षित छुड़ा लिया गया है। इनमें नगा और कुकी समुदायों की महिलाएं और पुरुष शामिल हैं, जिन्हें कांगपोकपी और सेनापति जिलों के विभिन्न इलाकों से अगवा किया गया था। इस सकारात्मक घटनाक्रम के बीच भी राज्य में तनाव की स्थिति बनी हुई है, क्योंकि नोंई जिले में हुई ताजा गोलीबारी में एक नागरिक की मौत की पुष्टि हुई है। प्रशासन ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक कड़ा कर दिया है।
#WATCH | Senapati, Manipur | Kuki and Naga sides release 28 people – 14 each from either side. Visuals from Makhan village. They were detained by either side following a clash in April this year.
(Video Source: Civil Society Organisation) pic.twitter.com/tbp7Eq6aVP
— ANI (@ANI) May 15, 2026
बंधकों की रिहाई और सुरक्षित घर वापसी
सुरक्षा बलों और नागरिक समाज के साझा प्रयासों के बाद शुक्रवार को बंधकों की रिहाई संभव हो सकी। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कंसाखुल गांव की 12 नगा महिलाओं को मखान गांव के समीप छोड़ा गया। इसके अतिरिक्त, सेनापति जिले से बंधक बनाए गए 14 कुकी नागरिकों (जिनमें 10 महिलाएं और 4 पुरुष शामिल हैं) को सुरक्षा बलों की कड़ी निगरानी में उनके परिवारों तक पहुंचाया गया। रिहा हुए लोगों ने बताया कि उन्हें दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में रखा गया था, लेकिन उनके साथ किसी भी तरह की शारीरिक प्रताड़ना नहीं की गई। डान बास्को के दो सेल्सियन भाइयों की भी अलग-अलग स्थानों से सुरक्षित वापसी हुई है।
नोंई जिले में हिंसा और तलाशी अभियान
बंधकों की रिहाई के बीच मणिपुर के नोंई जिले से हिंसा की दुखद खबर भी आई है। खौपुम थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सीमावर्ती गांवों में अज्ञात हमलावरों ने अंधाधुंध फायरिंग की, जिसमें एक स्थानीय नागरिक की मृत्यु हो गई और दो अन्य व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गए। इस घटना के तुरंत बाद सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई करते हुए थौबल जिले से प्रतिबंधित संगठन केसीपी (ताइबंगबा) के एक सक्रिय कैडर को दबोच लिया है। फिलहाल प्रभावित क्षेत्रों में भारी पुलिस बल और सेना की टुकड़ियां तैनात हैं और सघन तलाशी अभियान (कॉम्बिंग ऑपरेशन) जारी है।
जांच आयोग को मिला छह महीने का अतिरिक्त समय
मणिपुर में मई 2023 से भड़की जातीय हिंसा की तह तक जाने के लिए केंद्र सरकार ने जांच आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए छह महीने का और समय दे दिया है। अब यह आयोग, जिसका नेतृत्व सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बलबीर सिंह चौहान कर रहे हैं, अपनी अंतिम रिपोर्ट 20 नवंबर 2026 तक प्रस्तुत करेगा। इस तीन सदस्यीय पैनल को राज्य में हुई हिंसा से संबंधित तथ्यों की बारीकी से जांच करने की जिम्मेदारी दी गई है, जिसमें अब तक 260 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।
शांति बहाली की दिशा में प्रशासनिक कदम
राज्य के गृह मंत्री गोविंददास कोन्थौजम ने कहा है कि सरकार की प्राथमिकता राज्य में पूर्ण शांति बहाल करना और शेष बंधकों को सुरक्षित वापस लाना है। इसके लिए स्थानीय समुदायों और धार्मिक नेताओं के साथ निरंतर बातचीत की जा रही है। संवेदनशील क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के जरिए निगरानी बढ़ाई गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि वे उग्रवादी तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रखेंगे और किसी भी निर्दोष नागरिक की सुरक्षा के साथ समझौता नहीं किया जाएगा। फिलहाल सेनापति और कांगपोकपी जैसे जिलों में स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन एहतियातन कड़े प्रतिबंध लागू हैं।
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