एजेंसी, कोलकाता। Mamata Banerjee : पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस को मिली करारी शिकस्त के बाद अब पार्टी के वजूद पर सबसे बड़ा संकट मंडराने लगा है। राज्य में विधायकों के विद्रोह के बाद अब बगावत की यह भीषण आग देश की राजधानी दिल्ली तक पहुंच गई है। तृणमूल कांग्रेस के लगभग 20 लोकसभा और राज्यसभा सांसदों ने भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को अपना खुला समर्थन देने का पूरा मन बना लिया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए इसे अब तक का सबसे तगड़ा और ऐतिहासिक राजनीतिक झटका माना जा रहा है, जिसने बंगाल से लेकर दिल्ली तक की सियासत में हड़कंप मचा दिया है।
STORY | 20 TMC MPs write to Speaker backing NDA, triggering split in party’s Lok Sabha unit
The crisis engulfing the TMC deepened on Monday as 20 Lok Sabha MPs, led by Chief Whip Kakoli Ghosh Dastidar, wrote to Speaker Om Birla declaring support for the BJP-led NDA, triggering a… pic.twitter.com/DJoStyLQof
— Press Trust of India (@PTI_News) June 8, 2026
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सौंपा गया पत्र
तृणमूल कांग्रेस के इन 20 बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को बकायदा एक औपचारिक पत्र लिखकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में शामिल होने और उन्हें समर्थन देने की अपनी इच्छा साफ तौर पर जाहिर कर दी है। इस पूरे मामले पर पार्टी की वरिष्ठ नेता काकोली घोष दस्तीदार ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि उनके समेत तृणमूल कांग्रेस के लगभग 20 सांसदों ने सामूहिक रूप से भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन के साथ जाने का फैसला किया है। काकोली दस्तीदार का साफ तौर पर कहना है कि उन्होंने पश्चिम बंगाल के हालिया चुनावी नतीजों को पूरी तरह से स्वीकार कर लिया है। उनका मानना है कि वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए उनका और राज्य का भविष्य अब तृणमूल कांग्रेस के बजाय राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के साथ ही पूरी तरह से सुरक्षित है। इस बड़ी टूट से ठीक पहले सियासी गलियारों में चल रही अटकलों के बीच सुखेंदु शेखर राय और काकोली दस्तीदार की अगुवाई में तृणमूल कांग्रेस के 16 सांसदों ने पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से भी एक गुप्त मुलाकात की थी, जिसने इस बगावत की नींव रखी थी।
ऋतब्रत बनर्जी की बगावत के बाद मची भगदड़
पश्चिम बंगाल के भीतर तृणमूल कांग्रेस के कुल 80 विधायकों में से 58 से अधिक विधायकों ने पहले ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया था। इन सभी बागी विधायकों ने सर्वसम्मति से ऋतब्रत बनर्जी को अपना नया नेता चुन लिया था। राज्य इकाई में हुए इस पहले बड़े और आधिकारिक विभाजन का सीधा असर अब देश की संसद में भी तृणमूल कांग्रेस के कुनबे पर साफ दिखाई दे रहा है। सूत्रों के हवाले से मिली पुख्ता जानकारी के मुताबिक, लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के कुल 28 और राज्यसभा के 13 सांसदों में से एक बहुत बड़ा धड़ा ममता बनर्जी के परिवारवाद और पार्टी के भीतर चल रहे तानाशाही रवैये से लंबे समय से बेहद खफा और असंतुष्ट चल रहा था। ये सभी सांसद दलबदल कानून की कड़े कानूनी प्रावधानों और कार्रवाई से बचने के लिए एक साथ सामूहिक रूप से अपना एक बिल्कुल अलग गुट बनाकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को अपना समर्थन पत्र सौंपने की तैयारी में हैं।
सुखेंदु शेखर राय का राज्यसभा और पार्टी से इस्तीफा
इस भयंकर उथल-पुथल के बीच सोमवार को तृणमूल कांग्रेस को एक और करारा झटका लगा, जब पार्टी के सबसे वरिष्ठ संस्थापकों में से एक और राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय ने अपने पद और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता दोनों से पूरी तरह इस्तीफा दे दिया। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में अपने इस्तीफे का ऐलान करते हुए सुखेंदु शेखर राय ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी पर बेहद गंभीर और तीखे आरोप लगाए। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि तृणमूल कांग्रेस के बड़े नेताओं के दिमाग पर सत्ता का अहंकार इस कदर हावी हो चुका था कि उन्हें लगता था कि कानून या जनता उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकती। राय का यह इस्तीफा ठीक उस वक्त सामने आया है जब दिल्ली में विपक्षी गठबंधन की एक बड़ी बैठक चल रही थी, जिसमें ममता बनर्जी खुद मौजूद थीं। सुखेंदु शेखर राय के इस बड़े कदम के बाद देश के उच्च सदन यानी राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस के सांसदों की कुल संख्या घटकर अब महज 12 रह गई है।
भ्रष्टाचार और आरजी कर अस्पताल मामले पर फूटा गुस्सा
सुखेंदु शेखर राय ने मीडिया के सामने खुलकर आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल के कई सरकारी क्षेत्रों में भ्रष्टाचार पूरी तरह से बेलगाम हो चुका था। शासन और संगठन के भीतर फैले इसी भ्रष्टाचार के कारण जनता का गुस्सा चरम पर पहुंच गया था, जिसके चलते पार्टी को चुनावों में इतनी शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के शीर्ष पदों पर बैठे नेताओं की अघोषित संपत्ति की जांच कराने की भी मांग की। इसके साथ ही उन्होंने आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में हुए जघन्य दुष्कर्म और हत्याकांड मामले को लेकर भी अपनी ही पूर्व पार्टी को जमकर घेरा। राय ने कहा कि उन्होंने इस मामले में सच का साथ दिया था और सबूत मिटाने वाले कुछ दागी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सख्त विभागीय जांच की मांग की थी। इसी वजह से उन्हें पार्टी के भीतर बिल्कुल अलग-थलग कर दिया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय सरकार में बैठे लोग असली दोषियों को बचाने का कुत्सित प्रयास कर रहे थे, जिसके बाद उन्होंने मन ही मन इस भ्रष्ट व्यवस्था को छोड़ने का फैसला कर लिया था। भविष्य की योजनाओं पर बात करते हुए राय ने संकेत दिया कि वे अब किसी और दल में जाने के बजाय सक्रिय राजनीति से पूरी तरह संन्यास ले सकते हैं।
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