एजेंसी, भोपाल। Ladli Behna Yojana : मध्य प्रदेश सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी और लोक-कल्याणकारी योजनाओं में से एक ‘मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना’ में एक बहुत बड़े फर्जीवाड़े और वित्तीय अनियमितता का सनसनीखेज मामला सामने आया है। राज्य में प्रशासनिक स्तर पर की गई एक गहन जांच के दौरान ऐसी 27 महिलाओं को चिह्नित किया गया है, जो पहले से ही सरकारी विभागों में नियमित रूप से कार्यरत हैं और शासकीय सेवा का वेतन उठा रही हैं, लेकिन इसके बावजूद वे नियमों को ताक पर रखकर लगातार लाड़ली बहना योजना का अवैध तरीके से लाभ भी ले रही थीं। सरकारी सेवा में होने के कारण ये सभी महिलाएं इस योजना के लिए पूरी तरह से अपात्र हैं, फिर भी शासकीय खजाने को चूना लगाते हुए ये हर महीने मिलने वाली 1500 रुपये की आर्थिक सहायता राशि को अपने खातों में ट्रांसफर करवा रही थीं। इस खुलासे के बाद प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है और दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की रूपरेखा तैयार की जा रही है।
ट्रेजरी डेटा और समग्र आईडी के मिलान से खुली पोल
इस पूरे घोटाले और फर्जीवाड़े को उजागर करने में आधुनिक डिजिटल तकनीक और डेटा मिलान ने एक बेहद मुख्य भूमिका निभाई है। दरअसल, राज्य सरकार के वित्त विभाग द्वारा ट्रेजरी से जारी होने वाले मासिक वेतन भुगतान के रिकॉर्ड और नागरिकों की ‘समग्र आईडी’ के डेटा का आपस में गहनता से डिजिटल मिलान (क्रॉस-वेरिफिकेशन) किया गया। इस जांच प्रक्रिया के दौरान तकनीकी टीम ने पाया कि एक तरफ तो इन 27 महिला कर्मचारियों का अच्छा-खासा वेतन हर महीने सीधे सरकारी खजाने से जारी किया जा रहा था, और दूसरी तरफ वही महिलाएं खुद को आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद ‘लाड़ली बहना’ बताकर शासन की कल्याणकारी योजना का पैसा भी हजम कर रही थीं। जांच में इनके नियमित शासकीय कर्मचारी होने की पुष्टि होते ही इन्हें तुरंत अपात्र घोषित कर दिया गया।
जिला प्रशासन का कड़ा रुख, दस्तावेजों की छानबीन शुरू
इस गंभीर वित्तीय धोखाधड़ी के सामने आते ही जिला प्रशासन ने बेहद कड़ा और सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए संबंधित नगरीय निकायों, नगर निगमों और विभिन्न सरकारी विभागों से इन सभी दोषी महिलाओं के पहचान पत्र, समग्र आईडी, बैंक खातों की विस्तृत स्टेटमेंट और नौकरी से जुड़े अन्य सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज तुरंत प्रभाव से तलब कर लिए गए हैं। प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा दस्तावेजों की शुरुआती पड़ताल से जो आंकड़े सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। इन अपात्र महिला कर्मचारियों के बैंक खातों में अब तक योजना के नाम पर कुल 5 लाख 5 हजार 450 रुपये की सरकारी राशि अवैध रूप से पहुंच चुकी है। जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि इन सभी सरकारी महिला कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर उनसे इस पूरी राशि की शत-प्रतिशत वसूली करने की कानूनी तैयारी युद्ध स्तर पर शुरू कर दी गई है।
क्या हैं योजना की जरूरी पात्रता और कड़े नियम?
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा लागू किए गए आधिकारिक नियमों और संवैधानिक गाइडलाइंस के अनुसार, मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना का लाभ केवल उन्हीं गरीब और मध्यम वर्गीय महिलाओं को दिया जा सकता है जो वास्तव में आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद श्रेणी में आती हैं। योजना की मुख्य शर्तों के तहत महिला के पूरे परिवार की कुल वार्षिक आय (एनुअल इनकम) ढाई लाख रुपये से कम होना अनिवार्य है। इसके साथ ही परिवार में कोई भी सदस्य नियमित आयकरदाता (इनकम टैक्स पेयर) नहीं होना चाहिए और न ही परिवार का कोई सदस्य सरकारी नौकरी या किसी अन्य लाभ के पद पर कार्यरत होना चाहिए। इसके अलावा, लाभार्थी महिला का मध्य प्रदेश का मूल निवासी होना और उसका विवाहित होना भी एक जरूरी कानूनी शर्त है। इन स्पष्ट नियमों के होते हुए भी सरकारी सेवा में कार्यरत महिलाओं द्वारा लाभ लेना सीधे तौर पर कानून और पात्रता नियमों का एक गंभीर उल्लंघन माना जा रहा है।
संबल योजना में भी लगाई सेंध, अधिकारियों ने दी कड़ी चेतावनी
इस प्रशासनिक जांच में एक और बेहद चौंकाने वाला और गंभीर तथ्य सामने आया है कि इन जालसाज महिला कर्मचारियों की नजरें सरकार की अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर भी टिकी थीं। जांच में पता चला है कि इन 27 महिलाओं में से एक महिला कर्मचारी ने नियमों को ठेंगा दिखाकर सरकार की ‘संबल योजना’ का भी अवैध रूप से लाभ उठा लिया है, जबकि एक अन्य महिला कर्मचारी ने इस योजना का लाभ पाने के लिए अपना आवेदन भी जमा कर रखा था। इस पूरे मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी राजीव सिंह ने आधिकारिक बयान में बताया कि वर्तमान में हमारे पास ऐसी 27 दागी महिला कर्मचारियों की पूरी सूची और पुख्ता नाम सामने आ चुके हैं। इन सभी के मामलों की एक उच्च स्तरीय विभागीय जांच बहुत तेजी से शुरू कर दी गई है, और जैसे ही यह प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होगी, इन सभी के खिलाफ निलंबन और विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी कदम भी प्रस्तावित किए जाएंगे।
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