एजेंसी, लखनऊ। Lucknow Fire Case : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में एक कोचिंग संस्थान की व्यावसायिक इमारत में हुए भीषण और दर्दनाक अग्निकांड के मामले में कानून का शिकंजा बहुत ज्यादा कस गया है। इस भयंकर हादसे में पंद्रह निर्दोष छात्र-छात्राओं की असमय जान चली गई थी, जिसके बाद पूरे राज्य में भारी आक्रोश का माहौल है। मुख्यमंत्री के बेहद कड़े आदेशों के बाद स्थानीय पुलिस प्रशासन ने तत्परता से काम करते हुए इस मामले के चार मुख्य नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस द्वारा आज इन चारों आरोपियों को लखनऊ की एसीजेएम दो की अदालत में पेश किया गया, जहाँ से कोर्ट ने सभी आरोपियों की गंभीरता को देखते हुए उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने का सख्त आदेश जारी कर दिया है। इसके साथ ही इस पूरे हादसे में शुरुआती तौर पर गंभीर लापरवाही बरतने और नियमों की अनदेखी करने के दोषी पाए गए चार वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से नौकरी से सस्पेंड कर दिया गया है। लखनऊ में हुई इस दिल दहला देने वाली त्रासदी का असर देश की राजधानी दिल्ली में भी देखने को मिल रहा है, जहाँ शासन ने अलर्ट पर आते ही सुरक्षा नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले सैकड़ों कोचिंग सेंटरों और अवैध इमारतों को पूरी तरह से सील करने का एक बहुत बड़ा महा-अभियान छेड़ दिया है।
VIDEO | Lucknow coaching centre blaze: All accused sent for medical examination ahead of producing in the court.
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— Press Trust of India (@PTI_News) June 23, 2026
चारों मुख्य आरोपी कोर्ट में पेश, तीन जेल भेजे गए और मुख्य मालिक अस्पताल में भर्ती
अलीगंज थाने की पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए इस दर्दनाक हादसे के बाद कुल छह नामजद लोगों के खिलाफ गंभीर आपराधिक धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस ने रात भर की छापेमारी में चार आरोपियों को दबोच लिया था, जिन्हें आज कड़ी सुरक्षा के बीच न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया। अदालत ने सभी चारों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजने का फैसला सुनाया। इन आरोपियों में से तीन को सीधे जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया गया है, जबकि इमारत के मुख्य मालिक वीरेंद्र शुक्ला को अचानक हृदय संबंधी गंभीर बीमारी और सीने में दर्द की शिकायत के बाद पुलिस की निगरानी में एक अस्पताल के भीतर भर्ती कराया गया है। गिरफ्तार किए गए अन्य लोगों में मदेयगंज के रहने वाले प्रसाद शुक्ला, भवन के सबसे निचले तल पर जानवरों की दुकान चलाने वाले पेट शॉप के संचालक रामकृष्ण उपाध्याय, ऊपरी मंजिल पर बिना किसी सुरक्षा इंतजाम के चल रहे एनीमेशन कोचिंग सेंटर के संचालक तूशॉक कृष्ण्णा जायसवाल और भवन के एक किरायेदार सुरेश कुमार साहू शामिल हैं। इस मामले में नामजद दो अन्य आरोपी धीरेंद्र शुक्ला और सुरेंद्र शुक्ला अभी भी कानून की गिरफ्त से बाहर चल रहे हैं, जिनकी तलाश में पुलिस की विशेष टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की हाईलेवल मीटिंग और विशेष जांच टीम का गठन
घटना की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार की देर रात को ही शासन और प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों के साथ एक अत्यंत महत्वपूर्ण आपातकालीन समीक्षा बैठक बुलाई। मुख्यमंत्री ने इस हादसे पर गहरा दुख प्रकट करते हुए साफ कहा कि मासूम बच्चों के जीवन के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी अपराधी को कतई बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री के निर्देश पर तुरंत एक बेहद शक्तिशाली दो सदस्यीय विशेष जांच दल यानी एसआईटी का गठन कर दिया गया है। इस उच्चस्तरीय टीम में संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात और लखनऊ क्षेत्र के अपर पुलिस महानिदेशक प्रवीण कुमार को शामिल किया गया है। इस एसआईटी को पूरी घटना की बारीक और पारदर्शी जांच करके अगले सात दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट शासन को सौंपने का कड़ा हुक्म दिया गया है ताकि दोषियों पर और बड़ी कार्रवाई की जा सके।
घोर लापरवाही बरतने वाले बिजली, दमकल और एलडीए के चार अधिकारी निलंबित
इस भीषण अग्निकांड के सामने आने के तुरंत बाद प्राथमिक जांच में जिन सरकारी विभागों के कर्मचारियों की मिलीभगत और घोर लापरवाही सामने आई थी, उन पर सरकार ने बहुत बड़ा प्रशासनिक डंडा चलाया है। बिना किसी वैध सुरक्षा मानकों और फायर एनओसी के इस बहुमंजिला इमारत में कमर्शियल गतिविधियां चलने देने के आरोप में चार जिम्मेदार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है। निलंबित होने वाले अधिकारियों में विद्युत विभाग के अधिशासी अभियंता कलेक्शन गौरव कुमार, दमकल विभाग के फायर स्टेशन सुरक्षा अधिकारी कमलेंद्र कुमार, लखनऊ विकास प्राधिकरण यानी एलडीए के सहायक अभियंता अनिल कुमार और एलडीए के ही अवर अभियंता प्रमोद पांडेय शामिल हैं। इन सभी पर आरोप है कि इन्होंने अपने कर्तव्यों का सही से निर्वहन नहीं किया और भ्रष्टाचार के चलते अवैध निर्माण को बढ़ावा दिया।
दीवारें और खिड़कियां तोड़कर बचाई गई कई छात्रों की जान, रक्षामंत्री ने जाना हाल
सोमवार को जब इस तीन मंजिला इमारत में एकाएक भीषण आग लगी, तो पूरी बिल्डिंग के भीतर कोहराम मच गया। सबसे निचले तल पर बनी पेट शॉप में हुए शॉर्ट सर्किट की वजह से भड़की आग ने कुछ ही पलों में विकराल रूप ले लिया और ऊपरी मंजिल पर चल रहे एनीमेशन कोचिंग संस्थान को पूरी तरह अपने घेरे में ले लिया। आग की लपटों और जहरीले धुएं के कारण पूरी इमारत गैस चैंबर में बदल गई, जिससे दम घुटने के कारण कई छात्र मौके पर ही बेहोश हो गए। चश्मदीदों के मुताबिक हमेशा की तरह फायर ब्रिगेड की गाड़ियां घटना स्थल पर काफी देर से पहुंचीं। इस बीच स्थानीय पुलिसकर्मियों और आम नागरिकों ने अदम्य साहस दिखाते हुए भारी हथौड़ों की मदद से कंक्रीट की मजबूत दीवारों को तोड़ा और खिड़कियां उखाड़कर अंदर फंसे कई बच्चों को मौत के मुंह से बाहर निकाला। इस हादसे की भयावहता को देखकर खुद देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह घायलों की सुध लेने किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी पहुंचे और वहां उपचाराधीन पीड़ित छात्रों से मुलाकात कर डॉक्टरों को सर्वोत्तम इलाज के निर्देश दिए।
लखनऊ हादसे के बाद दिल्ली प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में, सैकड़ों इमारतें सील
उत्तर प्रदेश की राजधानी में हुए इस दर्दनाक हादसे का सीधा और बड़ा असर देश की राजधानी दिल्ली में भी देखने को मिल रहा है। दिल्ली नगर निगम और स्थानीय प्रशासन लखनऊ तथा इस महीने की शुरुआत में दक्षिण दिल्ली के हौज रानी में हुए बड़े अग्निकांडों के बाद पूरी तरह से अलर्ट हो चुका है। दिल्ली के विभिन्न घनी आबादी वाले इलाकों और प्रमुख छात्र केंद्रों जैसे मुखर्जी नगर, ओल्ड राजेंद्र नगर, दक्षिण दिल्ली और उत्तर दिल्ली में अग्नि सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करके चलाई जा रही सैकड़ों अवैध इमारतों और कोचिंग सेंटरों को सील करने की एक बहुत बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। दिल्ली के मेयर प्रवेश वाही ने इस महा-अभियान की जानकारी देते हुए बताया कि जनता की सुरक्षा को ताक पर रखने वाले किसी भी संस्थान को काम करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस की निगरानी में बनी स्पेशल टीम का बड़ा बुल्डोजर एक्शन
दिल्ली के महापौर ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा जांच को पारदर्शी और असरदार बनाने के लिए जिला मजिस्ट्रेट यानी डीएम और दिल्ली पुलिस की कड़ी संयुक्त देखरेख में एक विशेष कार्य बल का गठन किया गया है। इस विशेष टीम में दिल्ली नगर निगम और दिल्ली फायर सर्विस के आला अधिकारी शामिल हैं, जो बिना किसी पूर्व सूचना के विभिन्न क्षेत्रों में औचक निरीक्षण कर रहे हैं। इस अभियान के तहत पिछले कुछ ही दिनों के भीतर नियमों के खिलाफ जाकर बनाई गई इमारतों की अवैध पांचवीं और छठी मंजिलों को बुलडोजर की मदद से पूरी तरह से जमींदोज करने की बड़ी कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन ने आम निवासियों और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन से भी यह अपील की है कि अगर उनके आस-पास कोई भी व्यावसायिक संस्थान बिना वैध फायर एनओसी के चल रहा है, तो उसकी शिकायत तुरंत अधिकारियों से करें।
पिछले हादसों से सबक न लेने के कारण बार-बार सुलग रहे हैं गंभीर सवाल
दिल्ली के हौज रानी इलाके में इस महीने की शुरुआत में एक पांच मंजिला होटल में लगी भयानक आग में तेईस लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी, जिनमें कई विदेशी नागरिक भी शामिल थे। इसके अलावा जून दो हजार तेईस में भी दिल्ली के मुखर्जी नगर के एक बड़े कोचिंग संस्थान में लगी आग ने पूरे देश को झकझोर दिया था, जहाँ छात्रों ने रस्सियों के सहारे कूदकर अपनी जान बचाई थी। इन सभी पुरानी और बड़ी घटनाओं के बावजूद देश के विभिन्न बड़े शहरों के कमर्शियल हबों में आपातकालीन सुरक्षा इंतजामों को लेकर लगातार लापरवाही बरती जाती रही। अब लखनऊ के इस नए हादसे ने एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोल दी है, जिसके कारण दोनों ही राज्यों की सरकारें इस बार बेहद सख्त रुख अपनाते हुए दोषियों को कड़ी सजा दिलाने और अवैध निर्माणों को पूरी तरह से खत्म करने के काम में जुट गई हैं।
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