Kumey River flood

अरुणाचल प्रदेश में मानसूनी आफत : कुमे नदी की भीषण बाढ़ में बहा 84 मीटर लंबा पुल, 8 सीमांत गांवों का संपर्क पूरी तरह टूटा

अरुणाचल प्रदेश देश/प्रदेश

एजेंसी, ईटानगर। Kumey River flood Arunachal : पूर्वोत्तर भारत के सीमांत राज्य अरुणाचल प्रदेश में बीते कई दिनों से लगातार जारी मूसलाधार बारिश ने चारों तरफ भारी तबाही मचा रखी है। राज्य के क्रा दादी जिले से होकर गुजरने वाली कुमे नदी में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ के कारण एक बहुत बड़ा हादसा सामने आया है। नदी के पानी के प्रचंड और तेज बहाव ने वहां बने 84 मीटर लंबे एक अत्यंत महत्वपूर्ण पुल को पूरी तरह से तिनके की तरह बहा दिया है। इस दुखद हादसे के बाद बीते सोमवार के दिन से ही इस दुर्गम क्षेत्र के कम से कम 8 प्रमुख गांवों का संपर्क राज्य के अन्य मुख्य हिस्सों से पूरी तरह से टूट चुका है, जिससे वहां के स्थानीय निवासियों के लिए दैनिक उपयोग की जरूरी चीजों और आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति ठप होने का एक बड़ा संकट पैदा हो गया है।

राज्य में बाढ़ और भूस्खलन की विभीषिका के कारण अब तक 7 लोगों ने गंवाई अपनी जान

अरुणाचल प्रदेश में सक्रिय मानसून के इस रौद्र रूप ने अब तक व्यापक स्तर पर भारी जान-माल का नुकसान किया है। राज्य के आपदा प्रबंधन विभाग की तरफ से आधिकारिक रूप से जारी किए गए ताजा आंकड़ों के मुताबिक, लगातार हो रही भारी वर्षा से जनित विभिन्न हादसों और पहाड़ी क्षेत्रों में हुए भूस्खलन की वजह से अब तक कुल 7 नागरिकों की अकाल मृत्यु हो चुकी है, जबकि करीब 29 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। राज्य के कुल 26 जिलों के अंतर्गत आने वाले 425 गांवों में रहने वाले लगभग 97,182 लोग इस समय बाढ़ की भयानक चपेट में आकर बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। इस प्राकृतिक आपदा के चलते हजारों हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि, खड़ी फसलों और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को व्यापक स्तर पर क्षति पहुंची है।

उफनती नदी के किनारों पर बने 20 से अधिक रिहायशी मकान पूरी तरह जमींदोज

आपदा की इस गंभीर घड़ी में स्थिति की समीक्षा करने के लिए पिपसोरंग के उपमंडल अधिकारी युमलाम पुलु और ताली पूर्व के जिला परिषद सदस्य रुघु तामा ने संयुक्त रूप से प्रभावित क्षेत्रों का सघन दौरा कर जमीनी हकीकत का जायजा लिया। उपमंडल अधिकारी युमलाम पुलु ने मौके पर मौजूद मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि मुख्य संपर्क पुल के बह जाने के अतिरिक्त, नदी के जलस्तर में हुई अप्रत्याशित वृद्धि और तेज धारा के कारण उसके तटबंधों के आसपास बने 20 से भी अधिक रिहायशी घर पूरी तरह से नष्ट होकर मलबे में तब्दील हो गए हैं। प्रशासनिक अधिकारी ने सभी स्थानीय नागरिकों से जिला प्रशासन द्वारा समय-समय पर जारी की जाने वाली सुरक्षा चेतावनियों का कड़ाई से पालन करने और उफनती हुई नदियों के पास न जाने की विशेष अपील की है।

आपदा ग्रस्त क्षेत्रों में तत्काल सरकारी सहायता और पुल के युद्धस्तर पर पुनर्निर्माण की उठी मांग

जिला परिषद सदस्य रुघु तामा ने राज्य सरकार से बाढ़ से उत्पन्न हुई इन अत्यंत विकट परिस्थितियों को देखते हुए तुरंत प्रभावी कदम उठाने का पुरजोर आग्रह किया है। उन्होंने सरकार के समक्ष यह मांग रखी है कि इस विभीषिका में बेघर हो चुके और गंभीर रूप से प्रभावित परिवारों को बिना किसी प्रशासनिक देरी के तत्काल राहत राशि तथा पुनर्वास के लिए सभी जरूरी सहायता सामग्री पहुंचाई जाए। इसके साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री और संबंधित विभाग से निवेदन किया कि ध्वस्त हो चुके इस पुल का निर्माण कार्य युद्धस्तर पर शुरू किया जाना चाहिए, ताकि दुनिया से पूरी तरह कट चुके इन 8 गांवों तक राशन, दवाइयां, डॉक्टरों की टीम और अन्य जरूरी आपातकालीन सहायता को बहुत तेजी के साथ सुरक्षित भेजा जा सके।

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