एजेंसी, कोलकाता। Kolkata News : पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के दक्षिणी हिस्से में बुधवार को एक बहुत ही भयावह हादसा घटित हुआ, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। तारातला इलाके में स्थित ब्रेस ब्रिज के नजदीक ट्रांसपोर्ट डिपो रोड पर एक बहुत बड़े निर्माणाधीन गोदाम का भारी-भरकम ढांचा अचानक ताश के पत्तों की तरह ढह गया। दोपहर के करीब बारह बजकर सात मिनट पर हुए इस भीषण हादसे की चपेट में आने से अब तक चार निर्माण श्रमिकों की दर्दनाक मौत हो चुकी है। इस आकस्मिक आपदा के तुरंत बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई। मलबे के विशाल ढेर के नीचे अभी भी चालीस से अधिक लोगों के फंसे होने की गंभीर आशंका जताई जा रही है, जिसके कारण मरने वाले लोगों की संख्या में इजाफा होने का अंदेशा बना हुआ है। अब तक राहत कर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए इक्कीस घायल लोगों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाल लिया है।
Deeply pained and saddened by the tragic loss of lives due to the collapse of an under-construction warehouse building near Brace Bridge in Taratala, where several workers got trapped beneath the debris. So far 21 people have been pulled out of the collapsed structure, out of… pic.twitter.com/Hq9vZhg5AI
— Suvendu Adhikari (@SuvenduWB) June 24, 2026
कंक्रीट ढलाई के दौरान अचानक गिरा लोहे का भारी ढांचा
स्थानीय निवासियों और वहां मौजूद चश्मदीदों से प्राप्त विवरण के अनुसार, जिस वक्त यह भीषण दुर्घटना हुई, उस समय गोदाम की छत पर कंक्रीट की ढलाई का काम बहुत तेजी से चल रहा था। इस गोदाम के निर्माण के लिए लोहे के बेहद विशालकाय खंभों और टिन के बड़े-बड़े शेड का इस्तेमाल किया जा रहा था। ढलाई के काम के दौरान अचानक पूरा ढांचा अपना संतुलन खो बैठा और एक जोरदार धमाके के साथ नीचे काम कर रहे मजदूरों पर आ गिरा। शेड गिरने की रफ्तार इतनी तेज थी कि वहां काम कर रहे किसी भी व्यक्ति को संभलने या भागने का थोड़ा सा भी मौका नहीं मिल सका। कई श्रमिक लोहे के भारी खंभों और मलबे के नीचे पूरी तरह से दब गए। एक श्रमिक के सिर पर तो लोहे की भारी चद्दर इस कदर गिरी कि उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
जिंदगी बचाने की जंग में सेना और आपदा प्रबंधन बल ने झोंकी ताकत
हादसे की भयावहता को देखते हुए कोलकाता पुलिस के साथ-साथ राष्ट्रीय आपदा मोचन बल और भारतीय सेना के जांबाज जवानों को तुरंत राहत और बचाव कार्य के लिए मोर्चे पर उतारा गया। कंक्रीट के मलबे और लोहे की मुड़ी हुई भारी छड़ों को हटाने के लिए प्रशासन द्वारा तुरंत बड़ी-बड़ी आधुनिक क्रेनें मंगवाई गईं। मलबे के भीतर फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए राहत दल गैस कटर की सहायता से लोहे के मजबूत खंभों को बहुत ही सावधानी से काट रहे हैं। घायल अवस्था में मलबे से निकाले जा रहे लोगों को स्ट्रेचर के माध्यम से तुरंत एम्बुलेंस तक पहुँचाया जा रहा है और वहाँ से उन्हें उपचार के लिए तुरंत एसएसकेएम ट्रॉमा केयर यूनिट में भर्ती कराया जा रहा है, जहाँ डॉक्टरों की टीम उनकी जान बचाने के प्रयास में जुटी है।
दर्द से कराहते हुए मजदूर की चीख सुन दहल गया हर दिल
बचाव अभियान के दौरान एक बहुत ही भावुक कर देने वाला और दिल दहला देने वाला नजारा भी देखने को मिला। मलबे को हटाने के काम में जुटे अंकित सिंह नाम के एक स्थानीय युवक ने मलबे के नीचे दबे एक घायल मजदूर को खोजने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई। अंकित ने मलबे के बीच फंसे उस बेबस मजदूर का पैर मजबूती से पकड़कर रेस्क्यू टीम को उसकी सही स्थिति की जानकारी दी। मलबे के असहनीय वजन और दर्द से तड़पता हुआ वह मजदूर बार-बार बचाव दल के सामने अपनी जान की भीख मांग रहा था। उसने अत्यंत बेबसी में राहत कर्मियों से कहा कि वह अपना पैर खो चुका है और अगर उसे जिंदा बाहर निकालने के लिए उसका पैर भी काटना पड़े, तो वे लोग उसका पैर काट दें, लेकिन बस किसी भी तरह उसकी जान बचा लें। यह सुनकर वहां मौजूद हर एक व्यक्ति की आंखें नम हो गईं।
सरकार ने जारी की मदद के लिए आपातकालीन दूरभाष संख्या
इस बड़ी त्रासदी की खबर मिलते ही राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी बिना कोई समय गंवाए प्रशासनिक अमले के साथ सीधे घटनास्थल पर पहुंचे। मुख्यमंत्री के साथ राज्य सरकार की मंत्री अग्निमित्रा पॉल और कौशिक चौधरी सहित कई अन्य वरिष्ठ नेता भी बचाव कार्य का मुआयना करने पहुंचे। राज्य सरकार ने प्रभावित परिवारों की त्वरित सहायता और अपनों की जानकारी जुटाने के लिए आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर 1070, 8697981070 और 033-22143526/22535185 जारी कर दिए हैं। प्रारंभिक जांच से पता चला है कि यह जमीन ओडिशा के एक बड़े व्यापारी की है, जिसने इसे किसी निजी कंपनी को किराए पर दे रखा था।
निर्माण कार्यों में लापरवाही के कारण पिछले एक दशक में हुए बड़े हादसे
कोलकाता और देश के अन्य हिस्सों में निर्माण कार्यों के दौरान होने वाले हादसों का इतिहास काफी पुराना और चिंताजनक रहा है। मार्च 2024 में कोलकाता के गार्डन रीच इलाके में एक पांच मंजिला अवैध निर्माणाधीन इमारत जमींदोज हो गई थी, जिसमें 12 मासूम लोगों की जान चली गई थी। इसी तरह जुलाई 2023 में महाराष्ट्र के ठाणे में एक निर्माणाधीन इमारत का स्लैब गिरने से 7 श्रमिकों की मौत हो गई थी। जून 2023 में मुंबई के बांद्रा और सितंबर 2022 में अहमदाबाद में भी इसी तरह के बड़े हादसे देखने को मिले थे। सबसे भीषण हादसा साल 2016 में कोलकाता के विवेकानंद फ्लाईओवर के गिरने से हुआ था, जिसमें 27 लोगों की अकाल मृत्यु हो गई थी, जिसे राज्य के इतिहास का सबसे बड़ा निर्माण हादसा माना जाता है।
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