राजगीर (बिहार)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को बिहार के राजगीर में नालंदा विश्वविद्यालय के नए परिसर का उद्घाटन किया। विश्वविद्यालय का नया परिसर विश्व धरोहर स्थल प्राचीन ‘‘ नालंदा महाविहार ’’ स्थल के करीब है। विश्वविद्यालय के नये परिसर का उद्घाटन करने के बाद प्रधानमंत्री इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को भी संबोधित करेंगे। इस अवसर पर बिहार के राज्यपाल राजेंद्र वी आर्लेकर , मुख्यमंत्री नीतीश कुमार , केंद्रीय मंत्री विदेश मंत्री एस जयशंकर और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे। नालंदा विश्वविद्यालय के नए परिसर के उद्घाटन से पहले प्रधानमंत्री ने राजगीर में यूनेस्को के विश्व धरोहर स्थल ‘‘ नालंदा महाविहार ’’ का भ्रमण और अवलोकन किया।
नालन्दा विश्वविद्यालय की स्थापना पाँचवीं शताब्दी में हुई थी जिसने दुनिया भर से छात्रों को आकर्षित किया। विशेषज्ञों के अनुसार 12 वीं शताब्दी में आक्रमणकारियों द्वारा नष्ट किए जाने से पहले यह प्राचीन यूनिवर्सिटी 800 वर्षों तक फलता-फूल ता रहा। नए विश्वविद्यालय ने 2014 में 14 छात्रों के साथ एक अस्थायी स्थान पर काम करना शुरू किया। यूनिवर्सिटी का निर्माण कार्य 2017 में शुरू हुआ। इस विश्वविद्यालय में भारत के अलावा 17 अन्य देशों ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, भूटान, ब्रुनेई, दारुस्सलाम, कंबोडिया, चीन, इंडोनेशिया, लाओस, मॉरीशस, म्यांमा, न्यूजीलैंड, पुर्तगाल , सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका, वियतनाम और थाईलैंड की भागीदारी है। इन देशों ने विश्वविद्यालय के समर्थन में समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं।
इतिहास को पुनर्जीवित करके बेहतर भविष्य की नींव रखना जानते हैं- प्रधानमंत्री मोदी

राजगीर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा कि जो राष्ट्र, मजबूत मानवीय मूल्यों पर खड़े होते हैं, वे इतिहास को पुनर्जीवित करके बेहतर भविष्य की नींव रखना जानते हैं। मोदी ने आज नालंदा विश्वविद्यालय के नये परिसर का उद्घाटन करते हुए कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय का यह नया परिसर विश्व को भारत के सामर्थ्य का परिचय देगा। यह बताएगा कि जो राष्ट्र, मजबूत मानवीय मूल्यों पर खड़े होते हैं, वो राष्ट्र इतिहास को पुनर्जीवित करके बेहतर भविष्य की नींव रखना जानते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि नालंदा केवल एक नाम नहीं है। नालंदा एक पहचान है, एक सम्मान है। नालंदा एक मूल्य है, मंत्र है, गौरव है, गाथा है। नालंदा इस सत्य का उद्घोष है कि आग की लपटों में पुस्तकें भले जल जाएं, लेकिन आग की लपटें ज्ञान को नहीं मिटा सकतीं। उन्होंने कहा कि अपने तीसरे कार्यकाल के लिए शपथ ग्रहण करने के बाद पहले 10 दिनों में ही उन्हें नालंदा आने का मौका मिला । यह उनका सौभाग्य तो है ही, वह इसे भारत की विकास यात्रा के एक शुभ संकेत के रूप में भी देखते हैं।


