एजेंसी, दिल्ली। India-Myanmar Ties : पड़ोसी देश म्यांमार के नवनियुक्त राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग इस समय भारत के पांच दिनों के बेहद महत्वपूर्ण दौरे पर आए हुए हैं। शनिवार को उन्होंने भारत की धरती पर कदम रखकर अपनी इस विशेष यात्रा की शुरुआत कर दी है। दोनों देशों के बीच होने वाली इस उच्च स्तरीय मुलाकात का मुख्य एजेंडा व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ाना, आपसी संपर्क को बेहतर करना, सीमाओं की रक्षा और सैन्य सहयोग को एक नए स्तर पर ले जाना है। अपनी इस यात्रा की शुरुआत म्यांमार के राष्ट्रपति ने बेहद खास अंदाज में की। उन्होंने सबसे पहले गया जी पहुंचकर वहां के विश्व प्रसिद्ध महाबोधि मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की और भगवान बुद्ध के दर्शन किए। इस धार्मिक और आध्यात्मिक यात्रा को पूरा करने के बाद वह आज शाम देश की राजधानी दिल्ली के लिए रवाना होंगे।
Honoured to welcome President H.E. Min Aung Hlaing of Myanmar on his arrival in Delhi.
His visit underscores the enduring civilisational, cultural and people-to-people ties between India and Myanmar. It also provides an opportunity to further strengthen our partnership across… pic.twitter.com/89ep9EmGhZ
— Kirti Vardhan Singh (@KVSinghMPGonda) May 30, 2026
बोधगया में हुआ भव्य स्वागत और सांस्कृतिक जुड़ाव
विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस यात्रा की जानकारी साझा करते हुए बताया कि म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग का बोधगया की पावन धरती पर आगमन होने पर बहुत ही गर्मजोशी और सम्मान के साथ स्वागत किया गया है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि राष्ट्रपति की यह यात्रा भारत और म्यांमार के बीच सदियों पुराने गहरे आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और दोनों देशों के नागरिकों के बीच बने आपसी संबंधों की गवाही देती है। इसके साथ ही यह दौरा दोनों देशों के बीच लगातार जारी रहने वाले सहयोग की गहराई और मजबूती को भी दुनिया के सामने प्रदर्शित करता है। हवाई अड्डे पर म्यांमार के शीर्ष नेता का स्वागत करने के लिए बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन खुद मौजूद रहे, जिन्होंने म्यांमार के राष्ट्रपति की अगवानी की। म्यांमार में हुए हालिया संसदीय चुनावों के संपन्न होने और उनके राष्ट्रपति पद का कार्यभार संभालने के दो महीने से भी कम समय के भीतर यह भारत दौरा हो रहा है, जो भारत के प्रति उनके झुकाव और महत्ता को दर्शाता है। म्यांमार में वहां के सैन्य शासन के विरुद्ध लंबे समय तक चले विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक उठापटक के बाद बीते दिसंबर और जनवरी के महीनों में चुनाव आयोजित किए गए थे। उल्लेखनीय है कि वहां की सेना ने एक फरवरी दो हजार इक्कीस को तख्तापलट करते हुए आंग सान सू की की लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार को सत्ता से बेदखल कर दिया था और शासन अपने हाथों में ले लिया था।
भारत के लिए म्यांमार की रणनीतिक महत्ता और सीमा सुरक्षा
बीते महीने जब आंग ह्लाइंग ने म्यांमार के नए राष्ट्रपति के रूप में अपने पद की शपथ ली थी, तब भारत सरकार की तरफ से विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने उस आधिकारिक समारोह में हिस्सा लेकर भारत का प्रतिनिधित्व किया था। वर्तमान राष्ट्रपति आंग ह्लाइंग पिछले पांच सालों से म्यांमार में शासन की कमान संभाल रहे हैं। भौगोलिक और सामरिक दृष्टि से म्यांमार भारत के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील पड़ोसी देश माना जाता है। भारत और म्यांमार आपस में एक हजार छह सौ चालीस किलोमीटर लंबी एक बहुत बड़ी जमीनी सीमा साझा करते हैं। यह सीमा भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र के कई प्रमुख राज्यों से मिलती है, जिनमें सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील और उग्रवाद की समस्या से जूझ रहे नगालैंड और मणिपुर जैसे राज्य भी शामिल हैं। यही वजह है कि भारत के लिए म्यांमार के साथ सुरक्षा के मोर्चे पर तालमेल बैठाना बेहद जरूरी है। इस यात्रा में राष्ट्रपति के साथ एक बहुत बड़ा और उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है, जिसमें म्यांमार सरकार के कई कैबिनेट मंत्री, बड़े प्रशासनिक अधिकारी और उद्योग जगत के नामी कारोबारी शामिल हैं।
दिल्ली और मुंबई के कार्यक्रम एवं आर्थिक सहयोग
पहले से तय कार्यक्रम के मुताबिक राष्ट्रपति आंग ह्लाइंग को एक जून को दिल्ली में आयोजित होने वाले ‘इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस’ के वैश्विक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेना था, परंतु कुछ अपरिहार्य कारणों से फिलहाल इस बड़े कार्यक्रम को आगे के लिए टाल दिया गया है। भारत के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग आगामी एक जून को देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ एक बेहद खास द्विपक्षीय बैठक करेंगे। इस बैठक के दौरान दोनों देशों के प्रमुख आपसी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को और ज्यादा प्रगाढ़ बनाने की दिशा में गहन चर्चा करेंगे। इसके साथ ही वह भारत के व्यापारिक नेताओं के साथ एक विशेष मंच पर बातचीत भी करेंगे। दिल्ली के अपने सभी मुख्य कार्यक्रमों को पूरा करने के बाद म्यांमार के राष्ट्रपति दो जून को देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के लिए रवाना हो जाएंगे। मुंबई के दौरे पर वह भारत के बड़े उद्योगपतियों और व्यापार जगत की हस्तियों के साथ बैठकें करेंगे, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार के नए रास्ते खुल सकें। इसके साथ ही वह मुंबई के कुछ प्रमुख स्थलों का दौरा भी करने वाले हैं।
विदेश मंत्रालय का दृष्टिकोण और भविष्य की नीतियां
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने अपनी साप्ताहिक प्रेस वार्ता में स्पष्ट किया था कि म्यांमार के शीर्ष नेता की इस भारत यात्रा के दौरान सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने और दोनों देशों के बीच संपर्क मार्गों को बढ़ावा देने जैसे गंभीर मुद्दों पर बहुत विस्तार से बातचीत की जाएगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि सीमा सुरक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के साथ-साथ भारत और म्यांमार के रिश्तों के जितने भी आयाम हैं, उन सभी पहलुओं पर दोनों पक्षों के बीच गंभीरता से विमर्श होगा। भारत सरकार का मुख्य लक्ष्य अपने इस पुराने मित्र देश के साथ ऐतिहासिक और सभ्यता से जुड़े संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाना है। रणधीर जायसवाल ने यह भी रेखांकित किया कि भारत की जो प्रमुख वैश्विक रणनीतियां हैं, जैसे कि ‘पड़ोसी प्रथम’, ‘एक्ट ईस्ट’ और हिंद महासागर क्षेत्र के लिए बनाई गई ‘महासागर’ नीति, उन सभी में म्यांमार एक बेहद केंद्रीय और महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इस पूरे घटनाक्रम और कूटनीति पर नजर रखने वाले जानकारों का कहना है कि दोनों देशों के बीच होने वाली इस वार्ता का मुख्य केंद्र बिंदु सैन्य और रक्षा संबंधों को और ज्यादा मजबूत करना तथा व्यापारिक लेन-देन को बढ़ाना होगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले साल मार्च महीने में अपनी मॉरीशस यात्रा के दौरान ‘ग्लोबल साउथ’ यानी विकासशील देशों के साथ भारत के जुड़ाव को मजबूत करने के लिए ‘महासागर’ की अवधारणा की घोषणा की थी, जिसका पूरा अर्थ क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए आपसी एवं समग्र प्रगति सुनिश्चित करना है। इस नीति के तहत भी म्यांमार भारत के लिए एक महत्वपूर्ण भागीदार बनकर उभर रहा है।
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