INDIA Alliance Meeting

 इंडिया गठबंधन की कल दिल्ली में महाबैठक : तेईस पार्टियां मिलकर बनाएंगी सरकार के खिलाफ नई रणनीति

देश/प्रदेश नई दिल्ली राष्ट्रीय

एजेंसी, नई दिल्ली। INDIA Alliance Meeting : देश की राजनीतिक सरगर्मी एक बार फिर सातवें आसमान पर पहुंच गई है। देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक कांस्टीट्यूशन क्लब में सोमवार को विपक्षी दलों के प्रमुख संगठन इंडिया गठबंधन की एक बहुत ही महत्वपूर्ण और बड़ी बैठक आयोजित होने जा रही है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक इस महाबैठक में हिस्सा लेने के लिए देश भर की कुल तेईस राजनीतिक पार्टियों ने अपनी सहमति दे दी है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य देश की वर्तमान सत्ताधारी सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ एक मजबूत और एकजुट रणनीति तैयार करना है। हालांकि इस बैठक से पहले ही विपक्षी खेमे में कुछ दरारें भी साफ नजर आने लगी हैं।

केंद्र सरकार पर विपक्ष का चौतरफा हमला

इस बड़ी बैठक से ठीक पहले कांग्रेस पार्टी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर एक विशेष पोस्टर साझा करते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। विपक्ष का आरोप है कि वर्तमान सरकार देश के करोड़ों नागरिकों से उनके मतदान का बुनियादी अधिकार छीनने की कोशिश कर रही है और लगातार देश के पवित्र संविधान पर हमले किए जा रहे हैं। विपक्षी नेताओं का कहना है कि केंद्रीय जांच एजेंसियों का दुरुपयोग करके विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था खतरे में पड़ गई है।

आर्थिक और विदेश नीतियों को बताया विफल

विपक्षी गठबंधन ने देश की आर्थिक स्थिति को लेकर भी सरकार को पूरी तरह से घेरा है। उनका आरोप है कि सरकार की गलत नीतियों के कारण आज करोड़ों भारतीयों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। लगातार बढ़ती बेतहाशा महंगाई ने हर आम और मध्यमवर्गीय परिवार के घरेलू बजट को पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया है। इसके साथ ही देश के लाखों युवाओं को रोजगार न मिलने के कारण उनकी उम्मीदों और सपनों के साथ बड़ा विश्वासघात हो रहा है। विपक्ष का यह भी दावा है कि देश में व्यापार और निवेश का माहौल लगातार कमजोर हो रहा है, और सरकार की कमजोर विदेश नीतियों के कारण देश के राष्ट्रीय हितों के साथ बड़े समझौते किए जा रहे हैं। इन सभी मुद्दों पर पूरा गठबंधन पूरी ताकत और एकजुटता के साथ सरकार के सामने खड़ा है।

तमिलनाडु चुनाव के बाद डीएमके ने बनाई दूरी

इस महाबैठक के शुरू होने से पहले ही इंडिया गठबंधन को दक्षिण भारत से एक बहुत बड़ा झटका लगा है। तमिलनाडु में हुए हालिया विधानसभा चुनावों के बाद से ही वहां की सत्ताधारी पार्टी डीएमके और कांग्रेस के बीच के रास्ते पूरी तरह से अलग हो चुके हैं। राज्य की नई राजनीतिक परिस्थितियों में कांग्रेस ने अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी टीवीके को अपना समर्थन दे दिया है और वहां सरकार का हिस्सा बन गई है। कांग्रेस के इस कदम से बेहद नाराज चल रही डीएमके ने अब कांग्रेस और पूरे इंडिया गठबंधन से अपनी दूरी बना ली है। इसी नाराजगी के चलते डीएमके ने सोमवार को दिल्ली में होने वाली इस महत्वपूर्ण बैठक में शामिल होने से साफ तौर पर इनकार कर दिया है।

आम आदमी पार्टी ने भी गठबंधन से खींचे हाथ

गठबंधन की मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हो रही हैं, बल्कि देश की राजधानी में सरकार चला रही आम आदमी पार्टी की तरफ से भी विपक्ष को झटका लगा है। आम आदमी पार्टी के कद्दावर नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने media के सामने एक बड़ा बयान देते हुए साफ कर दिया है कि उनकी पार्टी अब इंडिया गठबंधन का हिस्सा नहीं है। डीएमके के बाद आम आदमी पार्टी द्वारा बैठक से अपने कदम पीछे खींच लेने के कारण विपक्षी एकजुटता के दावों पर बड़े सवाल खड़े होने लगे हैं। हालांकि कांग्रेस का कहना है कि जो पार्टियां इस बैठक में शामिल नहीं हो पा रही हैं, उनके अपने कुछ व्यक्तिगत और स्थानीय राजनीतिक कारण हो सकते हैं, लेकिन सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ देश की सभी विपक्षी पार्टियां पूरी तरह से एकमत हैं।

भाजपा ने कसा तंज, बताया टुकड़ों में बिखरा कुनबा

विपक्षी खेमे में मची इस उथल-पुथल को लेकर केंद्र की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस और पूरे विपक्ष पर जोरदार तंज कसा है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने विपक्षी गठबंधन पर निशाना साधते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल सहित देश के पांच राज्यों में हुए चुनावों के समय ही यह तथाकथित गठबंधन पूरी तरह से टुकड़ों में बिखर चुका था। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विश्लेषकों ने चुनाव के नतीजों से पहले ही यह भविष्यवाणी कर दी थी कि चार मई के बाद इस बेमेल गठबंधन का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। भाजपा के मुताबिक आज दिल्ली की बैठक से पहले ही यह साबित हो गया है कि स्वार्थ के आधार पर बना यह गठबंधन अब पूरी तरह से टुकड़े-टुकड़े हो चुका है और नेताओं के बीच कोई आपसी तालमेल नहीं बचा है।

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