एजेंसी, चेन्नई। DMK MDMK Alliance Split : तमिलनाडु की राजनीति में शनिवार को एक बहुत बड़ा और अप्रत्याशित उलटफेर देखने को मिला है। वरिष्ठ राजनेता वाइको के नेतृत्व वाली पार्टी मरुमलार्ची द्रविड़ मुनेत्र कड़गम यानी एमडीएमके ने मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के साथ अपना करीब 9 साल पुराना मजबूत राजनीतिक गठबंधन आधिकारिक तौर पर खत्म करने का एक बड़ा ऐलान कर दिया है। चेन्नई में आयोजित हुई एमडीएमके की सामान्य परिषद की हाई-प्रोफाइल बैठक में इस ऐतिहासिक फैसले पर मुहर लगाते हुए गठबंधन से अलग होने का एक आधिकारिक प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास कर दिया गया। इस फैसले के बाद से तमिलनाडु के सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस के भीतर भारी दरार आ गई है, जिसने राज्य की सियासत में नए समीकरणों को जन्म दे दिया है।
#TamilNadu: The MDMK party led by Vaiko has ended its nine-year alliance with the DMK
The Party General Secretary, Vaiko, led a General Council meeting in Chennai, and a general resolution was passed for withdrawal from the alliance in the meeting. pic.twitter.com/b1fTcsvite
— All India Radio News (@airnewsalerts) June 27, 2026
वाइको ने लगाया गठबंधन में पार्टी के साथ गलत बर्ताव करने का गंभीर आरोप
इस बड़े राजनीतिक विच्छेद की भूमिका एक दिन पहले ही तैयार हो गई थी, जब एमडीएमके के कद्दावर महासचिव वाइको ने खुले तौर पर मीडिया के सामने अपनी गहरी नाराजगी जाहिर की थी। वाइको ने साफ शब्दों में कहा था कि उन्हें पिछले कुछ समय से लगातार ऐसा महसूस हो रहा था कि इस बड़े गठबंधन के भीतर उनकी पार्टी के साथ कतई सम्मानजनक व्यवहार नहीं किया जा रहा था और उन्हें जानबूझकर दरकिनार करने की कोशिशें हो रही थीं। शनिवार को सामान्य परिषद की बैठक में पारित किए गए राजनीतिक प्रस्ताव में भी इस बात को प्रमुखता से रेखांकित किया गया है कि एमडीएमके ने शुरुआत में इस धर्मनिरपेक्ष मोर्चे में केवल ऊंचे सिद्धांतों के आधार पर ही हिस्सा लिया था, जिसका मुख्य उद्देश्य तमिलनाडु की पावन धरती पर सांप्रदायिक ताकतों को पैर जमाने से रोकना और द्रविड़ आंदोलन के बुनियादी विचारों की रक्षा करना था।
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के दौरान एमडीएमके के अस्तित्व को कमजोर करने की हुई कोशिश
पारित किए गए कड़े प्रस्ताव में डीएमके नेतृत्व पर सीधे हमला बोलते हुए कहा गया है कि हाल ही में संपन्न हुए वर्ष 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के दौरान गठबंधन के भीतर जानबूझकर ऐसे हालात पैदा किए गए, जिससे एमडीएमके की अपनी खास पहचान और तमिल जनता के लिए किए गए उसके 32 साल के लंबे संघर्षमयी इतिहास को कमजोर किया जा सके। इसके बावजूद, पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने गठबंधन धर्म का पूरी तरह पालन किया और अपने फैसले पर अडिग रहते हुए पूरी ताकत के साथ चुनाव लड़ा था। प्रस्ताव में आगे जिक्र किया गया कि वाइको ने चुनाव परिणाम आने से ठीक तीन दिन पहले ही 1 मई को सार्वजनिक रूप से यह सटीक भविष्यवाणी कर दी थी कि तमिलनाडु के आम मतदाताओं ने इस बार अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) को अपना भारी और ऐतिहासिक समर्थन दिया है।
परदे के पीछे हुई राजनीतिक डीलिंग से हैरान रह गए पार्टी कार्यकर्ता
एमडीएमके के आधिकारिक प्रस्ताव में चुनाव के बाद की राजनीतिक चालबाजियों पर से भी पूरी तरह पर्दा उठाया गया है। इसमें कहा गया है कि चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद जिस तरह से परदे के पीछे गुप्त राजनीतिक सौदेबाजियां की गईं, उसने जनता के वास्तविक जनादेश का पूरी तरह से अपमान किया है और यह बात जानकर हर कोई बेहद हैरान रह गया था। प्रस्ताव में इस कड़वे सच को एक खुला राज बताया गया है कि महज 47 सीटें जीतने वाली अन्नाद्रमुक को परदे के पीछे से हिंदुत्ववादी सांप्रदायिक ताकतों के साथ सांठगांठ करवाकर सत्ता की मलाई का इंतजाम किया जा रहा था। एमडीएमके का आरोप है कि इन स्वार्थी राजनीतिक सौदों के कारण सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस की मूल विचारधारा और उसकी बड़ी-बड़ी घोषणाएं पूरी तरह से बेमतलब और खोखली साबित हो गईं, जिसके चलते पार्टी के जमीनी कैडरों और पदाधिकारियों ने डीएमके का साथ तुरंत छोड़ने की पुरजोर वकालत की।
तमिलगा वेत्री कझगम के ब्लॉकबस्टर डेब्यू से खत्म हुआ छह दशकों का द्रविड़ दबदबा
गौरतलब है कि 4 मई 2026 को घोषित हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के ऐतिहासिक परिणामों ने सूबे की पूरी राजनीतिक तस्वीर को ही बदलकर रख दिया है। इस चुनाव में सुपरस्टार विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम यानी टीवीके ने एक धमाकेदार और ब्लॉकबस्टर डेब्यू करते हुए कुल 234 विधानसभा सीटों में से अकेले 108 सीटों पर शानदार जीत दर्ज की और राज्य की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनकर उभरी। इस बार पूरे प्रदेश में रिकॉर्डतोड़ 85.1 फीसदी मतदान हुआ था। इस तख्तापलट के बीच सत्तारूढ़ डीएमके महज 59 सीटों पर सिमट कर रह गई, जबकि मुख्य विपक्षी पार्टी अन्नाद्रमुक को केवल 47 सीटें ही नसीब हुईं। इस अप्रत्याशित चुनावी परिणाम ने तमिलनाडु की राजनीति में पिछले लगभग छह दशकों (60 साल) से चले आ रहे दो पारंपरिक द्रविड़ दलों के एकछत्र दबदबे को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है।
अन्य छोटी पार्टियों का चुनावी प्रदर्शन और एमडीएमके का भविष्य का प्लान
इस त्रिकोणीय और कड़े मुकाबले में अन्य छोटे दलों के प्रदर्शन की बात करें तो कांग्रेस पार्टी के खाते में केवल 5 सीटें आईं, जबकि पट्टाली मक्कल काची को 4 सीटों पर संतोष करना पड़ा। इसके अलावा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) को 2, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई-एम) को 2, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) को 2 और वीसीके को भी 2 सीटें हासिल हुईं। वहीं डीएमडीके, एएमएमके और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को केवल 1-1 सीट से ही संतोष करना पड़ा। गठबंधन से पूरी तरह बाहर आने के बाद एमडीएमके की जनरल काउंसिल ने यह स्पष्ट कर दिया है कि फिलहाल पार्टी अकेले काम करेगी और भविष्य में जब भी कोई नया चुनाव नजदीक आएगा, तब पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी व्यापक जनहित को ध्यान में रखते हुए किसी नए और मजबूत राजनैतिक गठबंधन के बारे में सही समय पर उचित फैसला लेंगे।
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