एजेंसी, देवास। Dewas Encroachment : मध्य प्रदेश के देवास जिले से एक बेहद ही सनसनीखेज और कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाली हिंसक घटना सामने आई है। यहाँ के जिनवानी वन परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एक सरकारी वन क्षेत्र में अवैध कब्जे को जमींदोज करने और अतिक्रमण हटाने पहुंची वन विभाग तथा स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम पर ग्रामीणों ने अचानक बेहद हिंसक हमला बोल दिया। भीलआमला गांव के उग्र लोगों द्वारा किए गए इस भीषण पथराव में अपनी ड्यूटी पर तैनात एक वरिष्ठ वनपाल और पांच मुस्तैद वनरक्षकों सहित कुल छह वनकर्मी गंभीर रूप से घायल और लहूलुहान हो गए हैं। स्थिति बिगड़ती देख प्रशासनिक अधिकारियों ने सभी घायल कर्मियों को तुरंत इलाज के लिए पास के नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया। इस हिंसक झड़प और जबरदस्त पथराव के दौरान उपद्रवियों ने सरकारी संपत्ति को भी जमकर निशाना बनाया, जिससे मौके पर खड़ी कई सरकारी गाड़ियों और अतिक्रमण ढहाने के काम में लगी एक भारी जेसीबी मशीन के शीशे टूट गए और उन्हें भारी नुकसान पहुंचा। इस अप्रत्याशित हिंसक घटना के बाद से ही पूरे इलाके में भारी सांप्रदायिक और सामाजिक तनाव का माहौल पैदा हो गया है, जिसे देखते हुए प्रशासन ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रभावित क्षेत्र में भारी संख्या में अतिरिक्त पुलिस बल और जवानों की तैनाती कर दी है।
अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान अचानक भड़की हिंसा
इस पूरी हिंसक घटना के संबंध में प्रशासनिक और वन विभाग के सूत्रों से मिली विस्तृत जानकारी के अनुसार, शनिवार को जिनवानी वन परिक्षेत्र के तहत आने वाली कमलापुर बीट के कक्ष क्रमांक 94 की सरकारी जमीन पर बड़े पैमाने पर किए गए अवैध अतिक्रमण को हटाने के लिए एक बड़ा अभियान चलाया जाना तय हुआ था। इस बड़ी कार्रवाई को अंजाम देने के लिए वन विभाग के अलग-अलग क्षेत्रों का भारी अमला और कमलापुर थाने की पुलिस टीम पूरी तैयारी के साथ मौके पर पहुंची थी। जैसे ही प्रशासनिक अमले ने जमीन को खाली कराने और अवैध ढांचों को तोड़ने की कानूनी प्रक्रिया शुरू की, तभी भीलआमला गांव के रहने वाले तमाम महिला और पुरुष लाठी-डंडों के साथ वहां जमा हो गए और सरकारी कार्रवाई का उग्र विरोध करने लगे। देखते ही देखते इस विरोध प्रदर्शन ने बेहद हिंसक रूप अख्तियार कर लिया और ग्रामीणों ने चारों तरफ से सरकारी दल को घेरकर उनके ऊपर अंधाधुंध और भारी पथराव करना शुरू कर दिया।
हमले में घायल हुए जांबाज वनकर्मियों की सूची
अचानक हुए इस जानलेवा पथराव के कारण सरकारी कर्मचारियों को संभलने का मौका तक नहीं मिला और पत्थरों की बौछार से वहां अफरा-तफरी मच गई। इस कायराना हमले में अपनी जान जोखिम में डालकर कर्तव्य निभा रहे वन विभाग के कई कर्मचारी बुरी तरह जख्मी हो गए। विभाग द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, घायलों में मुख्य रूप से वनरक्षक मोहन पंचोनिया, ज्योति जाट, कमल राणा, देवकरण मालवीय और सूरज धांधे शामिल हैं। इनके अलावा सुरक्षा दस्ते का नेतृत्व कर रहे वनपाल एवं परिक्षेत्र सहायक केके परमार भी इस पथराव की चपेट में आने से गंभीर रूप से चोटिल हो गए हैं। वारदात के तुरंत बाद मौके पर मौजूद अन्य सुरक्षाकर्मियों ने सूझबूझ दिखाते हुए सभी घायल कर्मचारियों को वहां से सुरक्षित बाहर निकाला और उन्हें तत्काल उपचार के लिए कमलापुर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तथा चापड़ा स्थित आरआर अस्पताल में भिजवाया, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा है। इस दुस्साहसिक हमले के बाद पुलिस और वन विभाग की उच्च स्तरीय टीमें मामले की गहन जांच में जुट गई हैं और वीडियो फुटेज के आधार पर हमलावर ग्रामीणों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की तैयारी की जा रही है।
बड़वानी में आवारा कुत्तों के जानलेवा हमले से महिला की मौत
मध्य प्रदेश के ही एक अन्य जिले बड़वानी से भी एक अत्यंत दुखद, विचलित करने वाली और हृदयविदारक घटना प्रकाश में आई है, जहां आवारा कुत्तों के झुंड ने एक बेसहारा महिला की जान ले ली। स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि 35 वर्ष की एक गरीब महिला लीला बाई शुक्रवार की दोपहर को हमेशा की तरह राजघाट रोड के सुनसान इलाके में सूखी लकड़ियां और कबाड़ का सामान बीनने के लिए गई हुई थीं ताकि उन्हें बेचकर अपने परिवार का पेट पाल सकें। इसी दौरान झाड़ियों के पीछे से अचानक निकले चार-पांच खूंखार आवारा कुत्तों ने उन पर पीछे से धावा बोल दिया। महिला ने खुद को बचाने का काफी प्रयास किया और शोर भी मचाया, लेकिन कुत्तों के उस हिंसक झुंड ने उन्हें जमीन पर गिरा दिया और उनके शरीर को बुरी तरह नोंचना शुरू कर दिया। इस जानलेवा हमले में महिला बेहद गंभीर रूप से घायल हो गई और अत्यधिक खून बह जाने के कारण मौके पर ही उनकी तड़प-तड़प कर मौत हो गई।
पूरे परिवार की इकलौती कमाऊ सदस्य थी लीला बाई
इस दर्दनाक हादसे की खबर जैसे ही इलाके में फैली, पूरे बड़वानी जिले में शोक और भारी आक्रोश की लहर दौड़ गई। मृतक महिला लीला बाई के घर की आर्थिक स्थिति बेहद दयनीय और कमजोर है। वह अपने घर की एकमात्र सहारा और इकलौती कमाऊ सदस्य थीं, जो रोज हाड़-तोड़ मजदूरी करके अपने बेहद बीमार पति, घर में मौजूद बुजुर्ग पिता और एक छोटे मासूम बच्चे का भरण-पोषण करती थीं। पूरा परिवार पूरी तरह से उन्हीं की रोजमर्रा की कमाई पर आश्रित था और उनकी मौत के बाद अब इस गरीब परिवार के सामने जीवनयापन का एक बहुत बड़ा संकट खड़ा हो गया है। इस वीभत्स घटना से गुस्साए स्थानीय निवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने नगर पालिका प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और पीड़ित परिवार के लिए तुरंत भारी आर्थिक सहायता राशि और मुआवजे की मांग की है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शहर में आवारा कुत्तों का आतंक चरम पर है और कुछ ही समय पहले चूना भट्टी इलाके में भी इसी तरह एक बुजुर्ग महिला को कुत्तों ने अपना शिकार बनाया था, लेकिन प्रशासन ने कोई सुध नहीं ली। अस्पताल में डॉक्टरों के पैनल द्वारा किए गए पोस्टमॉर्टम में यह साफ हुआ है कि महिला के सिर, गले, हाथ और पैरों पर कुत्तों के दांतों और नोंचने के गहरे जख्म थे, जिसके सदमे और अत्यधिक रक्तस्राव से उनकी जान चली गई।
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