एजेंसी, नई दिल्ली। Dayalpur Arson Case : वर्ष 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़के भीषण सांप्रदायिक दंगों से जुड़े एक बेहद चर्चित आपराधिक मामले में राजधानी की कड़कड़डूमा कोर्ट ने शनिवार को एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसला सुनाया है। अदालत ने आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को दयालपुर इलाके में हुई संगठित आगजनी, तोड़फोड़ और उपद्रव भड़काने के संगीन मामले में दोषी करार दिया है। कड़कड़डूमा अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश परवीन सिंह ने विस्तृत सुनवाई और गवाहों के परीक्षण के बाद ताहिर हुसैन के खिलाफ अभियोजन पक्ष के दावों को सही पाया। हालांकि इसी मामले में नामजद अन्य 12 आरोपियों को ठोस और स्वतंत्र साक्ष्यों के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया। अदालत के इस ताजा निर्णय से पूर्व पार्षद की कानूनी मुश्किलें और अधिक बढ़ गई हैं, जो दंगों से जुड़े कई अन्य मुकदमों में भी मुख्य आरोपी के तौर पर जेल में बंद हैं।
#BREAKING: Karkardooma Court has convicted former AAP councillor Tahir Hussain of inciting rioting in a North East Delhi riots-related case, while acquitting him of other charges. This is his second conviction, following his life sentence in the murder case of IB officer Ankit Sharma.
— IANS (@ians_india) October 10, 2026
दयालपुर में लूटपाट, आगजनी और गवाहों के बयानों की कड़ियां
यह पूरा आपराधिक मुकदमा स्थानीय निवासी इरशाद अली की औपचारिक शिकायत पर दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता के अनुसार 24 फरवरी 2020 को जब उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कई इलाके दंगों की चपेट में थे, तब उपद्रवियों की एक हिंसक भीड़ ने दयालपुर स्थित उनकी दुकान पर अचानक हमला बोल दिया था। दंगाई तत्वों ने दुकान में रखी तमाम सामग्री को लूटने के बाद पूरे परिसर को आग के हवाले कर दिया था, जिससे उन्हें भारी आर्थिक क्षति और मानसिक आघात पहुंचा था। जांच के दौरान पुलिस ने दुकानदारों और स्थानीय नागरिकों के बयान दर्ज किए, जिनमें एक अन्य चश्मदीद गवाह मोहम्मद जाहिद ने अदालत को बताया कि उत्पात मचा रहे लोग खुलेआम ताहिर हुसैन के समर्थन में भड़काऊ नारेबाजी कर रहे थे। इसके अलावा घटनास्थल पर तैनात दो दिल्ली पुलिस कांस्टेबलों ने भी जांच के दौरान उपद्रवियों और घटनाक्रम से जुड़े अहम तथ्यों की पुष्टि की थी, जिसके आधार पर जांच एजेंसी ने विस्तृत चार्जशीट दाखिल की थी।
अदालत का फैसला और 12 अन्य आरोपियों को बरी करने का आधार
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश परवीन सिंह की अदालत ने अपने विस्तृत फैसले में स्पष्ट किया कि ताहिर हुसैन की मौजूदगी, भूमिका और भीड़ को उकसाने के संबंध में रिकॉर्ड पर पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। अदालत ने माना कि भीड़ की गैर-कानूनी गतिविधियों और आगजनी की घटना में पूर्व पार्षद की संलिप्तता पूरी तरह साबित होती है। वहीं दूसरी तरफ मामले में सह-आरोपी बनाए गए 12 अन्य व्यक्तियों के खिलाफ अभियोजन पक्ष पुख्ता और अकाट्य साक्ष्य पेश करने में नाकाम रहा। अदालत ने रेखांकित किया कि केवल भीड़ का हिस्सा होने के सामान्य आरोप के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, जब तक कि किसी विशिष्ट अपराध में उनकी सीधी संलिप्तता स्पष्ट न हो। इसी कानूनी बिंदु के आधार पर अदालत ने शेष 12 आरोपियों को बरी करते हुए उन्हें बड़ी राहत दे दी, जबकि ताहिर हुसैन पर दोष सिद्ध कर दिया।
आईबी कर्मचारी अंकित शर्मा हत्याकांड में पहले से उम्रकैद
ताहिर हुसैन के लिए यह दूसरा बड़ा झटका है, जब अदालत ने दंगों से जुड़े गंभीर मामले में उन्हें दोषी ठहराया है। इससे पूर्व अदालत ने उन्हें इंटेलिजेंस ब्यूरो यानी आईबी के युवा सुरक्षा सहायक अंकित शर्मा की वीभत्स हत्या के बहुचर्चित मामले में भी मुख्य साजिशकर्ता और दोषी करार दिया था। उस मामले में अदालत ने उन्हें पहले ही आजीवन कारावास की कठोर सजा सुनाई हुई है। अभियोजन पक्ष ने उस मुकदमे में अदालत को बताया था कि दंगों के दौरान अंकित शर्मा को बेरहमी से पकड़कर ताहिर हुसैन के घर के पास ले जाया गया था, जहां धारदार हथियारों से उनके शरीर पर अनगिनत गहरे घाव किए गए थे और बाद में शव को पास के नाले में फेंक दिया गया था। उस ऐतिहासिक फैसले के बाद से ही ताहिर हुसैन जेल में सजा काट रहे हैं।
उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की भयावहता और सजा पर आगामी सुनवाई
फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़के इन दंगों ने देश की राजधानी को हिलाकर रख दिया था। नागरिकता संशोधन कानून के समर्थकों और विरोधियों के बीच शुरू हुआ टकराव देखते ही देखते भीषण हिंसा में बदल गया था, जिसमें 53 नागरिकों की जान चली गई थी और 500 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। दंगों के दौरान करोड़ों रुपये की सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को जलाकर खाक कर दिया गया था। दयालपुर आगजनी मामले में ताहिर हुसैन को दोषी ठहराए जाने के बाद अब अदालत बहुत जल्द उनकी सजा की अवधि पर बहस सुनेगी। कानूनी जानकारों के अनुसार इस मामले में भी उन्हें कई वर्षों के अतिरिक्त कारावास और भारी जुर्माने की सजा हो सकती है, जिससे उनकी जेल से रिहाई की संभावनाएं अब पूरी तरह धूमिल हो चुकी हैं।
इस पूरे मामले और मुख्य बिंदुओं को समझने के लिए नीचे दिए गए प्रमुख प्रश्नों और उनके उत्तरों को पढ़ें :
प्रश्न 1: Karkardooma Court ने 2020 North-East Delhi Riots मामले में Ex-councillor Tahir Hussain को किस अपराध में दोषी (Convict) ठहराया है?
उत्तर 1: दिल्ली की अदालत ने ताहिर हुसैन को 2020 के दंगों के दौरान दयालपुर इलाके में भीड़ को उकसाने, एक दुकान में लूटपाट (Looting) करने और संगठित आगजनी (Arson) करने के गंभीर आपराधिक आरोपों में दोषी ठहराया है।
प्रश्न 2: Dayalpur Arson Case में Delhi Police की Charge Sheet और Eyewitnesses के बयानों की क्या भूमिका रही?
उत्तर 2: दिल्ली पुलिस की चार्जशीट में शिकायतकर्ता और चश्मदीदों (Eyewitnesses) के बयान शामिल थे, जिन्होंने अदालत में गवाही दी कि उपद्रवी भीड़ खुलेआम ताहिर हुसैन के समर्थन में नारेबाजी कर रही थी, जिससे अदालत को उनके खिलाफ पुख्ता सबूत (Concrete Evidence) मिले।
प्रश्न 3: IB Staffer Ankit Sharma Murder Case और Tahir Hussain की Life Imprisonment की सजा का क्या कनेक्शन है?
उत्तर 3: ताहिर हुसैन को पहले ही इंटेलिजेंस ब्यूरो के कर्मचारी अंकित शर्मा की क्रूर हत्या के मामले में मुख्य साजिशकर्ता (Main Conspirator) मानते हुए अदालत द्वारा आजीवन कारावास (Life Imprisonment) की कठोर सजा सुनाई जा चुकी है।
प्रश्न 4: Communal Violence और Rioting Cases में Indian Penal Code (IPC) के तहत क्या सजा के प्रावधान हैं?
उत्तर 4: दंगा भड़काने, आगजनी और हत्या के मामलों में आईपीसी (अब BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत भारी जुर्माना, सश्रम कारावास और उम्रकैद (Life Sentence) तक की सजा का प्रावधान है, जिसका सामना ताहिर हुसैन कर रहे हैं।
प्रश्न 5: Evidence की कमी के कारण 12 सह-आरोपियों को बरी (Acquit) किए जाने का Legal Ground क्या था?
उत्तर 5: अदालत ने क्रिमिनल ज्यूरिस्प्रूडेंस (Criminal Jurisprudence) का पालन करते हुए कहा कि केवल भीड़ का हिस्सा होने का सामान्य आरोप किसी को दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं है। अभियोजन पक्ष (Prosecution) अन्य 12 आरोपियों के खिलाफ विशिष्ट संलिप्तता के ठोस सबूत पेश करने में नाकाम रहा।
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