एजेंसी, भोपाल। CM Mohan Yadav Master Plan : मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरों में मास्टर प्लान के लंबित रहने को लेकर राज्य सरकार ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। राजधानी स्थित आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में आयोजित मध्य प्रदेश मानव अधिकार आयोग के 32वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रशासनिक लेटलतीफी पर कड़े तेवर दिखाए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि भोपाल सहित जिन भी शहरों में अब तक मास्टर प्लान जारी नहीं हो सके हैं, वहां संबंधित विभागों के जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय स्तर पर संज्ञान लेकर सख्त दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि इस पूरे विषय को देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में विधिवत लाया जाएगा और शीर्ष अदालत के दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही आगे की रूपरेखा तय होगी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा RCVP नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी, भोपाल में आयोजित मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के 32वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में सहभागिताhttps://t.co/daAiCQCmSQ
— Office of Dr. Mohan Yadav (@drmohanoffice51) September 13, 2026
मास्टर प्लान पर सियासत न करे विपक्ष, झूठे श्रेय की कोशिश नाकाम
मुख्यमंत्री ने मास्टर प्लान जैसे संवेदनशील और नगरीय विकास से जुड़े बुनियादी मुद्दे पर विपक्षी दलों को राजनीति से दूर रहने की नसीहत दी। कांग्रेस पर तीखा प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों के दौर में इस दिशा में कोई ठोस और योजनाबद्ध कार्य नहीं किया गया, जिसके चलते दशकों तक शहरी नियोजन का ढांचा अस्त-व्यस्त रहा। अब जब वर्तमान सरकार व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए कठोर कदम उठा रही है, तो विपक्षी नेता इसका भ्रामक श्रेय लेने की फिराक में हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रदेश की जनता पूरी तरह जागरूक है और उसे भली-भांति ज्ञात है कि किसने विकास में रोड़े अटकाए और कौन धरातल पर काम कर रहा है।
समानता और मानवाधिकार का मूल आधार, लाड़ली बहनों को मिले 58 हजार करोड़
समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने मानव अधिकारों के दार्शनिक और व्यावहारिक पहलुओं पर विस्तृत विचार रखे। उन्होंने कहा कि मानव योनि में जन्म मिलना कर्तव्य पथ पर अग्रसर होने की सबसे बड़ी प्रेरणा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश भर में जो नीतियां बनाई जा रही हैं, उन्हें जमीनी स्तर पर पूरी प्रामाणिकता के साथ लागू किया जा रहा है। सरकार की दृष्टि में मानवता की सच्ची सेवा यही है कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को समान अवसर और अधिकार प्राप्त हों। इसी दिशा में महिला सशक्तिकरण को प्राथमिकता देते हुए प्रदेश सरकार ने लाड़ली बहना योजना के अंतर्गत अब तक 58 हजार करोड़ रुपये से अधिक की विशाल धनराशि सीधे हितग्राही महिलाओं के बैंक खातों में अंतरित की है।
काकोरी कांड की स्मृति, नक्सलवाद पर प्रहार और सागर शराब कांड पर एक्शन
अपने उद्बोधन में मुख्यमंत्री ने ऐतिहासिक संदर्भों का हवाला देते हुए काकोरी कांड का स्मरण किया। उन्होंने इस बात पर गहरा क्षोभ व्यक्त किया कि स्वाधीनता के उपरांत भी लंबे समय तक ब्रिटिश हुकूमत के प्रतीकों और आजादी की लड़ाई को कलंकित करने वाले व्यक्तियों के नाम पर मार्गों का नामकरण जारी रहा, जिनका महिमामंडन किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकता। इसके अलावा उन्होंने बालाघाट क्षेत्र में नक्सलवाद के खात्मे के लिए सुरक्षा बलों के प्रयासों की सराहना की। सागर में सामने आए जहरीली शराब प्रकरण पर प्रशासनिक सख्ती का ब्योरा देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि कानून के साथ खिलवाड़ करने वाले एक शातिर अपराधी का हाफ एनकाउंटर किया गया है। उन्होंने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि राज्य में कानून-व्यवस्था से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मानव अधिकार आयोग की निष्पक्षता और संवैधानिक गरिमा का सम्मान
आयोग के 32वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में मुख्यमंत्री ने विशेष स्मारिका, वार्षिक डायरी और न्यूज लेटर का औपचारिक विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने मानव अधिकार आयोग की कार्यशैली की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे प्रदेश के पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं जो सीधे आयोग के मंच पर सहभागिता करने पहुंचे हैं। उन्होंने आयोग को आश्वस्त किया कि वह मानवाधिकार हनन से जुड़ी किसी भी शिकायत पर बिना किसी राजनीतिक दबाव, भय अथवा पक्षपात के निष्पक्ष होकर अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करे। कार्यक्रम में जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह, मप्र राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष रामलाल रौतेल, स्थानीय विधायक भगवान दास सबनानी, महापौर मालती राय, जनजाति कार्य विभाग के आयुक्त तरुण राठी और आयोग के अध्यक्ष एपी सिंह प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
1995 से अनवरत जारी है मानवाधिकार संरक्षण का सफर
स्थापना दिवस समारोह में आयोग के अध्यक्ष एपी सिंह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए संस्था की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला। उन्होंने रेखांकित किया कि मध्य प्रदेश मानव अधिकार आयोग की स्थापना 13 सितंबर 1995 को की गई थी और तब से प्रत्येक वर्ष यह दिन संकल्प दिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने भारतीय संविधान की प्रस्तावना और मौलिक अधिकारों का उल्लेख करते हुए कहा कि धर्म, जाति, लिंग अथवा वर्ग के आधार पर किसी भी नागरिक के साथ भेदभाव न होना ही न्याय व्यवस्था की आत्मा है। अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रशासनिक विजन और जनसरोकारों की खुलकर सराहना की और विश्वास दिलाया कि आयोग आमजन के अधिकारों के संरक्षण के लिए पूरी संवेदनशीलता के साथ तत्पर रहेगा।
इस पूरे मामले और मुख्य बिंदुओं को समझने के लिए नीचे दिए गए प्रमुख प्रश्नों और उनके उत्तरों को पढ़ें :
प्रश्न 1: सीएम मोहन यादव ने शहरी मास्टर प्लान में देरी को लेकर क्या सख्त निर्देश दिए हैं?
उत्तर: मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि भोपाल सहित जिन शहरों में अब तक मास्टर प्लान जारी नहीं हुआ है, वहां के जिम्मेदार अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
प्रश्न 2: मास्टर प्लान के इस मामले को लेकर राज्य सरकार किस न्यायालय का रुख करेगी?
उत्तर: सीएम ने स्पष्ट किया है कि इस लंबित विषय को सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में लाया जाएगा और शीर्ष अदालत के दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही आगे की रूपरेखा तय होगी।
प्रश्न 3: कांग्रेस पर निशाना साधते हुए सीएम मोहन यादव ने क्या कहा?
उत्तर: उन्होंने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में शहरी नियोजन पर कोई काम नहीं हुआ, और अब जब वर्तमान सरकार इस दिशा में कड़े कदम उठा रही है, तो विपक्षी नेता इसका झूठा श्रेय लेना चाहते हैं।
प्रश्न 4: मुख्यमंत्री ने कानून-व्यवस्था को लेकर कौन सी बड़ी कार्रवाई का जिक्र किया?
उत्तर: कानून-व्यवस्था पर जीरो टॉलरेंस की नीति साफ करते हुए सीएम ने सागर जहरीली शराब कांड का जिक्र किया और बताया कि एक शातिर अपराधी का हाफ एनकाउंटर किया गया है।
प्रश्न 5: राज्य सरकार ने महिला सशक्तिकरण (लाड़ली बहना) पर अब तक कितना खर्च किया है?
उत्तर: मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार महिलाओं के अधिकार और बराबरी के लिए काम कर रही है और अब तक करीब 58 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि लाड़ली बहनों के खातों में डाली जा चुकी है।
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