Ayodhya Ram Mandir

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा विवाद की जांच के लिए एसआईटी गठित : हिरासत में लिए गए कर्मचारी के घर से मिले 10 लाख रुपये

उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय

एजेंसी, अयोध्या। Ayodhya Ram Mandir : उत्तर प्रदेश के अयोध्या में स्थित भगवान श्रीरामलला के भव्य मंदिर में आने वाले चढ़ावे की राशि को लेकर उठे भारी विवाद के बाद अब राज्य सरकार ने एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन कर दिया है। मंदिर के कर्मचारियों पर लगे कथित गबन के आरोपों के बीच एसआईटी की टीम जांच के लिए अयोध्या पहुँच चुकी है। इस बड़े घटनाक्रम पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है, जिसमें उन्होंने साफ किया है कि ट्रस्ट ने स्वयं सरकार से इस मामले की स्वतंत्र जांच कराने का अनुरोध किया था ताकि श्रद्धालुओं के मन में उठ रहे सभी संशयों को दूर किया जा सके। ट्रस्ट ने जांच एजेंसियों को हर संभव सहयोग देने और पूरी पारदर्शिता बनाए रखने की बात कही है।

ट्रस्ट के अनुरोध पर मात्र 15 घंटे के भीतर हुआ 3 सदस्यीय टीम का गठन

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल जी राव ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से ट्रस्ट और बैंक के स्तर पर ऑडिट की नियमित प्रक्रिया चल रही थी, जिसके दौरान वित्तीय विसंगतियों की बातें सामने आने पर भ्रम की स्थिति बनी। निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से ट्रस्ट के महासचिव ने उत्तर प्रदेश सरकार से एक स्वतंत्र विशेष जांच दल गठित करने की मांग की थी। सरकार ने इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए बेहद तत्परता दिखाई और मात्र 15 घंटे के भीतर ही 3 सदस्यीय उच्चस्तरीय एसआईटी का गठन कर दिया, जिसने अयोध्या पहुँचकर अपनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

मंदिर का कर्मचारी हिरासत में, अलमारी और गोबर के ढेर से नकद बरामदगी का दावा

दूसरी तरफ, सुरक्षा और जांच एजेंसियों ने इस मामले में त्वरित दंडात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार, मंदिर परिसर में आने वाले चढ़ावे की गिनती और प्रबंधन कार्य से जुड़े मुख्य कर्मचारी लवकुश मिश्रा को हिरासत में ले लिया गया है, जिससे स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसॉग) लगातार पूछताछ कर रहा है। तलाशी अभियान के दौरान जांच टीम को आरोपी कर्मचारी के पैतृक घर से करीब 10 लाख रुपये की भारी नकदी बरामद होने की चर्चा है। स्थानीय सूत्रों और ग्रामीणों के मुताबिक, यह रकम घर की अलमारी के साथ-साथ कथित तौर पर गोबर के ढेर में छिपाकर रखी गई थी। इस मामले में एक अन्य कर्मचारी को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है, क्योंकि दोनों ही कर्मचारी चढ़ावे की गिनती के कार्य में सीधे तौर पर शामिल थे।

परिजनों ने आरोपों को बताया निराधार, कृषि भूमि गिरवी रखने का किया दावा

हिरासत में लिए गए कर्मचारी लवकुश मिश्रा के पिता बच्चूलाल ने अपने बेटे को पूरी तरह निर्दोष बताते हुए सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने घर से नकदी मिलने की बात को तो स्वीकार किया, लेकिन दावा किया कि फैजाबाद में उनके निर्माणाधीन मकान के लिए उन्होंने अपनी कृषि भूमि (खेती की जमीन) को गिरवी रखा था और यह बरामद धनराशि उसी वैध सौदे की है। उनका कहना है कि जांच पूरी होने के बाद उनके बेटे की बेगुनाही पूरी तरह साबित हो जाएगी। फिलहाल, जांच एजेंसियां बैंक खातों, संपत्ति के दस्तावेजों और परिजनों के इन दावों की बारीकी से पड़ताल कर रही हैं।

वरिष्ठ आईएएस अधिकारी की अध्यक्षता में बनी टीम, 15 दिनों में सौंपेगी अंतिम रिपोर्ट

इस संवेदनशील मामले की जांच के लिए गठित की गई 3 सदस्यीय एसआईटी की कमान लखनऊ मंडल के आयुक्त वरिष्ठ आईएएस अधिकारी विजय विश्वास पंत को सौंपी गई है। इस उच्चस्तरीय टीम में आईपीएस अधिकारी किरन एस और विशेष सचिव (वित्त) नील रतन को मुख्य सदस्यों के रूप में शामिल किया गया है। उत्तर प्रदेश शासन ने एसआईटी को पूरे मामले की गहराई से जांच कर अगले 7 दिनों के भीतर अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट और अधिकतम 15 दिनों के भीतर अपनी अंतिम विस्तृत रिपोर्ट शासन को सौंपने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।

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