Assam Flood Updates

बढ़ती नदियों के उफान से असम में तबाही का संकट : गृहमंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा को दिया हर संभव केंद्रीय मदद का भरोसा

असम देश/प्रदेश

एजेंसी, गुवाहाटी। Assam Flood Updates : असम राज्य में मानसून की भारी बारिश के बाद बाढ़ की स्थिति बेहद गंभीर और चिंताजनक हो गई है। राज्य के कई हिस्सों में नदियां अपने सामान्य जलस्तर से ऊपर बह रही हैं, जिससे रिहाइशी इलाकों और कृषि भूमि में पानी भर गया है। इस प्राकृतिक आपदा के बीच देश के केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा से टेलीफोन पर संपर्क साधा और प्रभावित क्षेत्रों के वर्तमान हालातों की विस्तृत समीक्षा की। अधिकारियों द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, गृहमंत्री ने उफनती नदियों के कारण राज्य में बुनियादी ढांचे और फसलों को हुए किसी भी प्रकार के नुकसान के बारे में गहराई से पूछताछ की। इस संकट की घड़ी में केंद्र सरकार ने असम प्रशासन को राहत और बचाव कार्यों के लिए पूरी तरह से सहयोग करने का आश्वासन दिया है।

धेमाजी जिले में बाढ़ से भारी तबाही और जनजीवन प्रभावित

प्राकृतिक आपदा की इस सबसे बड़ी मार असम के धेमाजी जिले पर पड़ी है, जहां हालात दिन-प्रतिदिन बिगड़ते जा रहे हैं। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा जारी किए गए ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस जिले के 4 राजस्व सर्किलों के अंतर्गत आने वाले 69 गांवों में बाढ़ का पानी पूरी तरह से घुस चुका है। इस जलप्रलय के कारण लगभग 16,000 लोग सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं, जिनका सामान्य जीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। सड़कों और संपर्क मार्गों के डूब जाने से लोगों का अपने घरों से निकलना मुश्किल हो गया है, जिसके कारण प्रशासन को राहत सामग्री पहुंचाने में भी काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।

मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने राहत कार्यों की कमान संभाली

असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा खुद इस पूरी स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए हैं और लगातार मैदानी स्तर की रिपोर्ट ले रहे हैं। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर राज्य की जनता के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए लिखा कि धेमाजी में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होने के बाद से वे हालात की निरंतर निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारे नागरिकों के जीवन और उनकी संपत्ति पर पड़े इस आपदा के प्रभाव से वे बेहद दुखी हैं। मुख्यमंत्री ने राज्य की जनता को भरोसा दिलाया कि इस अत्यंत कठिन समय में राज्य सरकार पूरी मजबूती के साथ उनके साथ खड़ी है और प्रभावित परिवारों की सुरक्षा को सुनिश्चित करना उनकी सबसे पहली प्राथमिकता है।

प्रभावित परिवारों की सुरक्षा और दीर्घकालिक पुनर्वास योजना

राज्य प्रशासन आपदा से प्रभावित हुए लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन चला रहा है। मुख्यमंत्री शर्मा ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार अपने सभी उपलब्ध संसाधनों को पूरी तरह से जुटा रही है ताकि बाढ़ पीड़ितों को तुरंत भोजन, दवाइयां और सुरक्षित आश्रय प्रदान किया जा सके। इसके साथ ही सरकार केवल तात्कालिक राहत पर ही ध्यान केंद्रित नहीं कर रही है, बल्कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद प्रभावित लोगों के दीर्घकालिक पुनर्वास के लिए भी अभी से योजना तैयार कर रही है। सरकार का मुख्य उद्देश्य इस भीषण बाढ़ के कारण लोगों के जीवन पर पड़ने वाले आर्थिक और सामाजिक प्रभाव को कम से कम करना है।

भारी बारिश और कटाव के कारण रेल नेटवर्क को बड़ा नुकसान

बाड़ की इस विभीषिका ने असम के परिवहन नेटवर्क को भी बुरी तरह से प्रभावित किया है, जिससे आम लोगों की आवाजाही पर ब्रेक लग गया है। पूर्वोत्तर सीमा रेलवे के मुख्य प्रवक्ता द्वारा साझा की गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, लगातार हो रही भारी बारिश और तेज जलधारा के कारण नदियों के किनारों पर बड़े पैमाने पर मिट्टी का कटाव हुआ है। इस मिट्टी के कटाव की वजह से धेमाजी जिले में स्थित एक महत्वपूर्ण रेलवे पुल को भारी क्षति पहुंची है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रेलवे प्रशासन ने आरचिपथार और सिमेन चापरी रेलखंड के बीच ट्रेनों का परिचालन पूरी तरह से स्थगित कर दिया है, जिससे यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

ऐतिहासिक पुल के पिलर में आई तकनीकी अस्थिरता

पूर्वोत्तर सीमा रेलवे द्वारा जारी किए गए एक आधिकारिक बयान में बताया गया कि दुर्घटना का शिकार हुआ यह पुल किलोमीटर संख्या 408/11-13 पर स्थित है, जिसका निर्माण मूल रूप से वर्ष 1965 में किया गया था। शुरुआत में यह एक छोटी लाइन का पुल था, जिसे बाद में रेलवे के आधुनिकीकरण अभियान के तहत बड़ी लाइन में परिवर्तित कर दिया गया था। रेलवे इंजीनियरों के अनुसार, यह पुल पूरी तरह से सुरक्षित और चालू स्थिति में था, लेकिन हाल ही में हुई मूसलाधार बारिश के कारण नदी के तेज बहाव ने इसके पिलर के पास की जमीन को पूरी तरह से काट दिया। जमीन धंसने और मिट्टी बह जाने के कारण पुल का एक पिलर अपनी जगह से हिल गया और अस्थिर हो गया, जिसके बाद इस पूरे रूट पर रेल यातायात रोकना अनिवार्य हो गया।

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