एजेंसी, नई दिल्ली। Amarnath Yatra 2026 : इस साल होने वाली पवित्र अमरनाथ तीर्थयात्रा को पूरी तरह सुरक्षित और बाधा मुक्त बनाने के लिए केंद्र सरकार ने अपनी कमर कस ली है। देश की राजधानी में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में देश की सुरक्षा के नीति-नियंत्रक और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, जम्मू-कश्मीर के उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा, भारतीय थलसेना के प्रमुख, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के महानिदेशक सहित कई अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक और सैन्य अधिकारी शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी तीर्थयात्रा की सुरक्षा व्यवस्था का बारीकी से निरीक्षण करना और श्रद्धालुओं को मिलने वाली तमाम बुनियादी सुविधाओं की धरातलीय स्थिति को परखना था।
आज दिल्ली में श्री अमरनाथ जी यात्रा की तैयारियों और सुरक्षा की समीक्षा की।
संपूर्ण यात्रा मार्ग पर जम्मू-कश्मीर पुलिस, CAPFs तथा अन्य सुरक्षा एजेंसियों द्वारा Multi-layered सुरक्षा ग्रिड स्थापित की जाए।
श्रद्धालुओं के पंजीकरण, आवास, स्वास्थ्य सेवाओं एवं आपदा प्रबंधन सहित सभी… pic.twitter.com/EldUpLnKC0
— Amit Shah (@AmitShah) June 12, 2026
सत्तावन दिनों तक चलने वाली यात्रा के लिए नए नियम लागू
इस वर्ष की पवित्र तीर्थयात्रा आगामी तीन जुलाई से विधिवत रूप से शुरू होने जा रही है। कुल सत्तावन दिनों तक चलने वाली यह पावन यात्रा श्रावण पूर्णिमा और रक्षाबंधन के पावन पर्व पर यानी अट्ठाईस अगस्त को संपन्न होगी। यात्रा को व्यवस्थित तरीके से चलाने के लिए प्रशासन ने कुछ बेहद कड़े नियम भी बनाए हैं, जिसके तहत अब प्रतिदिन केवल दस हजार श्रद्धालुओं को ही बाबा बर्फानी के दर्शनों के लिए आगे जाने की अनुमति दी जाएगी। शुक्रवार को हुई इस उच्चस्तरीय बैठक में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के साथ-साथ किसी भी संभावित आपातकालीन स्थिति या प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए की गई तैयारियों की भी गहन समीक्षा की गई है।
अर्धसैनिक बलों की तैनाती और कई स्तरों का सुरक्षा चक्र
पवित्र गुफा की ओर जाने वाले रास्तों को पूरी तरह सुरक्षित करने के लिए सुरक्षा एजेंसियों ने एक अभेद्य सुरक्षा घेरा तैयार किया है। केंद्र सरकार ने इस कार्य के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की लगभग छह सौ सत्तर कंपनियों को जम्मू-कश्मीर में तैनात करने की आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इन सभी सुरक्षाबलों को अलग-अलग चरणों में संवेदनशील इलाकों में भेजने की प्रक्रिया भी शुरू की जा चुकी है। जम्मू से लेकर श्रीनगर जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग और पहाड़ों के दुर्गम रास्तों पर गहन जांच अभियान चलाया जा रहा है। पूरी यात्रा के दौरान देश की खुफिया और सुरक्षा एजेंसियां कई स्तरों वाले सुरक्षा चक्र के जरिए हर गतिविधि पर पैनी नजर रखेंगी।
श्रद्धालुओं के लिए बिजली, पानी और स्वास्थ्य सुविधाओं के पुख्ता इंतजाम
जम्मू-कश्मीर के उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने स्थानीय प्रशासन को सख्त हिदायत दी है कि देश के कोने-कोने से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। तीर्थयात्रियों के ठहरने के उत्तम प्रबंधों से लेकर उनके आने-जाने के लिए परिवहन व्यवस्था, चौबीस घंटे स्वास्थ्य सेवाएं, स्वच्छ पेयजल, बिजली और साफ-सफाई जैसी मूलभूत आवश्यकताओं को सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों को तैनात कर दिया गया है। गृह मंत्रालय की इस बैठक में इन सभी व्यवस्थाओं की अंतिम रिपोर्ट को देखा गया और अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए गए।
सुरक्षा तंत्र के सभी प्रमुखों की उपस्थिति में बना अंतिम खाका
इस अति-महत्वपूर्ण बैठक में केंद्र और राज्य सरकार के तमाम बड़े नीति-निर्माता एक छत के नीचे मौजूद रहे। उप-राज्यपाल के अलावा जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव अटल डुल्लू, पुलिस महानिदेशक नलिन प्रभात, खुफिया विभाग के प्रमुख नीतीश कुमार के साथ-साथ केंद्रीय गृह सचिव भी वहाँ उपस्थित थे। इसके अतिरिक्त सीमा सुरक्षा बल, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस, सशस्त्र सीमा बल के प्रमुखों और सेना के शीर्ष कमांडरों ने गृहमंत्री के सामने सुरक्षा का पूरा खाका प्रस्तुत किया। सरकार ने साफ कर दिया है कि राष्ट्र की सुरक्षा और नागरिकों की आस्था की रक्षा के मामले में किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।
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