एजेंसी, भोजपुर। Air Force Plane Crash : पूर्वोत्तर राज्य असम के जोरहाट रौरिया भारतीय वायुसेना हवाई अड्डे पर हुए एक बेहद दुखद और भीषण विमान हादसे में देश ने अपने दो जांबाज बेटों को खो दिया है। इस दर्दनाक दुर्घटना में बिहार के भोजपुर जिले के रहने वाले दानिश आलम और जहानाबाद जिले के शुभम कुमार वीरगति को प्राप्त हो गए। इनमें से जांबाज दानिश आलम सैन्य बल की अग्निवीर योजना के तहत देश की सेवा कर रहे थे। रविवार को दोनों वीर सपूतों के पार्थिव शरीर जैसे ही उनके गृह जनपद पहुंचे, वैसे ही पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। नम आंखों और भारी मन से वीर जवान दानिश को सुपुर्द-ए-खाक किया गया, जबकि दूसरे शहीद शुभम कुमार का भी पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार संपन्न कराया गया। इस दुखद घड़ी में शहीदों के अंतिम दर्शन के लिए हजारों लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा।
IAF: Mortal remains of the bravehearts sent off with full military honours. The IAF aircraft flew them to from Jorhat with to their native places for their last rites with full military honours. 🙏
Sqn Ldr Prashant – Dehradun,
Flt Lt Shubam -Gaya Bihar, Agv Danish Alam at… pic.twitter.com/f4sRBgHwNZ— Vayu Aerospace Review (@ReviewVayu) June 14, 2026
शहीद दानिश के पैतृक गांव में पसरा सन्नाटा और परिजनों का विलाप
शहीद दानिश आलम का तिरंगे में लिपटा हुआ पार्थिव शरीर जैसे ही उनके पैतृक निवास स्थान कायमनगर पहुंचा, वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। अपने लाडले बेटे के शव को देखते ही मां का धैर्य पूरी तरह से टूट गया और वे चीख-पुकार करते हुए बुरी तरह रोने लगीं। विकल होकर मां बार-बार बस यही गुहार लगा रही थीं कि उन्हें आखिरी बार अपने कलेजे के टुकड़े का चेहरा देखने दिया जाए। इस अत्यंत भावुक कर देने वाले दृश्य को देखकर वहां मौजूद सैन्य अधिकारियों और ग्रामीणों की आंखें भी सजल हो उठीं। दानिश के पिता ने भी बेहद भारी मन और कांपते हाथों से अपने वीर बेटे को अंतिम विदाई देते हुए अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान वायुसेना के जवानों ने पूरे सैन्य सम्मान के साथ शहीद के पिता को वह तिरंगा सौंपा जिसमें उनका बेटा लिपटा हुआ आया था। दानिश के सम्मान में कोइलवर से लेकर उनके गांव तक युवाओं द्वारा एक विशाल बाइक रैली भी निकाली गई, जिसमें पूरा इलाका ‘शहीद दानिश अमर रहे’ के गगनभेदी नारों से गूंज उठा।
जहानाबाद के शुभम की अंतिम यात्रा और परिजनों का गहरा रोष
इस भीषण विमान हादसे का शिकार हुए दूसरे जांबाज सिपाही शुभम कुमार का पार्थिव शरीर भी उनके पैतृक गांव लाया गया। शुभम के अंतिम संस्कार को लेकर प्रशासनिक स्तर पर और गांव में व्यापक तैयारियां की गई थीं। देश के इस वीर सपूत को अंतिम विदाई देने और परिजनों को ढांढस बंधाने के लिए केंद्र सरकार के मंत्री जीतन राम मांझी भी विशेष रूप से गांव पहुंचे। शुभम के असमय चले जाने से उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। इस दुखद अवसर पर जहां एक तरफ चारों ओर मातम छाया हुआ था, वहीं दूसरी तरफ शहीद के नाना ने अत्यंत भावुक होकर इस हादसे के लिए सरकार की कार्यप्रणाली को जिम्मेदार ठहराया। गांव के श्मशान घाट पर पूरे राजकीय और सैन्य सम्मान के साथ शुभम का अंतिम संस्कार संपन्न कराया गया।
अधूरी रह गईं शादी की खुशियां और मां की आखिरी बातचीत
शहीद शुभम कुमार की माता पूनम देवी ने अत्यंत भरे हुए गले से बताया कि शनिवार की सुबह करीब छह बजे उनके बेटे का आखिरी फोन आया था। उसने अपनी मां को वीडियो कॉल करके कहा था कि वह एक बेहद जरूरी मिशन पर जा रहा है और मां अपना पूरा ध्यान रखे। मां ने रोते हुए कहा कि शुभम बीते उनतीस मई को ही छुट्टियों के बाद वापस अपनी ड्यूटी पर लौटा था। उन्हें इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि उनका बेटा अब कभी वापस लौटकर नहीं आएगा, अन्यथा वह उसे किसी भी कीमत पर वापस जाने नहीं देतीं। मां ने यह भी बताया कि शुभम का विवाह पहले दिसंबर के महीने में होना तय हुआ था, परंतु परिवार में दादी के देहांत के कारण शादी की तारीख को आगे बढ़ा दिया गया था। पूरे परिवार ने मिलकर यह योजना बनाई थी कि आगामी होली के त्योहार के बाद शुभम के सिर पर सेहरा सजाया जाएगा, परंतु इस भयावह हादसे ने परिवार की खुशियों को हमेशा-हमेशा के लिए छीन लिया।
बिहटा हवाई अड्डे पर दी गई गार्ड ऑफ ऑनर की सलामी
इससे पूर्व, असम से दोनों वीर जवानों के पार्थिव शरीरों को विशेष विमान के जरिए बिहार के बिहटा सैन्य हवाई अड्डे पर लाया गया था। बिहटा हवाई अड्डे पर वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों, सैन्य जवानों और प्रशासनिक अमले ने दोनों शहीदों के शवों पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इसके बाद जवानों की टुकड़ी ने दोनों अमर शहीदों को गार्ड ऑफ ऑनर देकर सलामी दी। इसके बाद पूरी सुरक्षा व्यवस्था के बीच दोनों शहीदों के पार्थिव शरीरों को उनके सम्मान में नारे लगाते हुए देशभक्तों के काफिले के साथ उनके गृह जिलों के लिए रवाना किया गया। इस हादसे ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है और हर कोई इन वीर सपूतों की शहादत को नमन कर रहा है।
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