एजेंसी, नई दिल्ली। Abhijeet Dipke blue ink attack : देश की राजधानी के सबसे प्रमुख प्रदर्शन स्थल जंतर-मंतर पर शनिवार को उस समय भारी अफरा-तफरी और हंगामे की स्थिति पैदा हो गई, जब विरोध प्रदर्शन कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दिपके पर एक अज्ञात व्यक्ति ने अचानक नीली स्याही फेंक दी। यह अप्रत्याशित घटना उस समय घटित हुई जब वह वहां मौजूद प्रदर्शनकारियों और छात्रों की भारी भीड़ को संबोधित कर रहे थे। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा में हुई कथित धांधलियों की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर चल रहा यह आंदोलन अब बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच चुका है। स्याही फेंके जाने के तुरंत बाद प्रदर्शन स्थल पर मौजूद समर्थकों में भारी आक्रोश फैल गया, जिसे देखते हुए वहां तैनात सुरक्षा बलों ने तुरंत मोर्चा संभाला।
हमले के बाद दिपके का करारा जवाब और ‘जय भीम’ का उद्घोष
इस अप्रत्याशित हमले के तुरंत बाद कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दिपके ने बेहद आक्रामक और राजनीतिक रूप से सजग रुख अख्तियार किया। उन्होंने अपने चेहरे और कपड़ों पर लगी नीली स्याही के साथ ही एक वीडियो रिकॉर्ड करके उसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा कर दिया। उन्होंने इस घटना को अपने आंदोलन की वैचारिक जीत से जोड़ते हुए लिखा कि नीला रंग तो उनका अपना रंग है, और इसके साथ ही उन्होंने ‘जय भीम’ का नारा बुलंद किया। सोशल मीडिया पर उनका यह बयान और वीडियो बहुत तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने इस पूरे विवाद को एक नया सामाजिक और राजनीतिक रंग दे दिया है। आंदोलनकारियों का कहना है कि इस तरह की कायरतापूर्ण हरकतों से छात्रों के अधिकारों की इस लड़ाई को दबाया नहीं जा सकता।
सोनम वांगचुक को अस्पताल भेजे जाने के बाद दिपके ने संभाली कमान
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत शनिवार तड़के हुई जब पिछले 21 दिनों से लगातार अनशन पर बैठे प्रसिद्ध शिक्षाविद् सोनम वांगचुक की शारीरिक स्थिति अत्यंत नाजुक हो गई। लगातार भूख हड़ताल के कारण उनके शरीर का वजन लगभग 9.5 किलोग्राम तक कम हो गया था, जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें जंतर-मंतर से हटाकर सफदरजंग अस्पताल में दाखिल कराया था। वांगचुक के प्रदर्शन स्थल से हटने के तुरंत बाद ही आंदोलन को आगे बढ़ाने की पूरी जिम्मेदारी अभिजीत दिपके ने अपने हाथों में ले ली। उन्होंने मंच से यह ऐतिहासिक घोषणा की कि जब तक छात्रों को न्याय नहीं मिल जाता और शिक्षा मंत्री अपने पद से इस्तीफा नहीं दे देते, तब तक वह स्वयं अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठेंगे।
प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग के संगीन आरोप और पुलिस का आधिकारिक खंडन
जंतर-मंतर से प्रदर्शनकारियों को हटाने की इस पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया के दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखे आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। कॉकरोच जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं और छात्रों ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने शनिवार को बेहद सख्ती दिखाई और कई शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट करते हुए उन्हें जबरन हिरासत में ले लिया। संगठन के प्रवक्ताओं का दावा है कि जंतर-मंतर को चारों तरफ से पूरी तरह छावनी में तब्दील कर दिया गया है ताकि युवाओं की आवाज को दबाया जा सके। इसके विपरीत, नई दिल्ली के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) सचिन शर्मा ने इन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि दिल्ली उच्च न्यायालय के सख्त आदेशों और डॉक्टरों की आपातकालीन रिपोर्ट के आधार पर ही वांगचुक के जीवन की रक्षा के लिए उन्हें अस्पताल ले जाया गया था और इस दौरान पुलिस ने बिना किसी बल प्रयोग के अत्यंत संयम के साथ अपनी ड्यूटी निभाई।
लुटियंस दिल्ली में अभूतपूर्व सुरक्षा घेरा और देशव्यापी आंदोलन का आह्वान
इस ताजा विवाद और स्याही कांड के बाद केंद्रीय दिल्ली के जंतर-मंतर, कनॉट प्लेस और उसके आस-पास के सभी संवेदनशील मार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था को अत्यधिक कड़ा कर दिया गया है। दिल्ली पुलिस के जवानों के साथ-साथ केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों की कई कंपनियों को सड़कों पर उतार दिया गया है और जगह-जगह लोहे के भारी बैरिकेड्स लगाकर संदिग्ध वाहनों व व्यक्तियों की गहन चेकिंग की जा रही है। अस्पताल से मिले वीडियो संदेश में सोनम वांगचुक ने भी कहा था कि उनका शरीर भले ही 20 प्रतिशत तक क्षीण हो चुका है, लेकिन उनका हौसला अटूट है। इधर, जंतर-मंतर पर मौजूद छात्र नेताओं ने पूरे देश के युवाओं और नागरिकों से अपील की है कि वे इस दमनकारी कार्रवाई के खिलाफ पूरी तरह से कानून का पालन करते हुए अपने-अपने शहरों में सड़कों पर उतरें और एक बड़े शांतिपूर्ण आंदोलन की शुरुआत करें।
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