एजेंसी, नई दिल्ली। AAP Rajya Sabha MP : आम आदमी पार्टी (आप) और भारतीय जनता पार्टी के बीच चल रहा राजनीतिक संग्राम अब कानूनी मोड़ लेने जा रहा है। ‘आप’ के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने एलान किया है कि पार्टी उन सात सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग को लेकर राज्यसभा के सभापति को औपचारिक पत्र भेजेगी, जिन्होंने हाल ही में भाजपा का दामन थाम लिया है। संजय सिंह ने इस कदम को पूरी तरह असंवैधानिक और संसदीय मर्यादाओं का उल्लंघन करार दिया है।
मैं माननीय राज्यसभा सभापति को एक पत्र प्रस्तुत करूँगा, जिसमें राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक को भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने के कारण राज्यसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित करने की मांग की जाएगी, क्योंकि यह संविधान की दसवीं अनुसूची के अंतर्गत स्वेच्छा से अपनी पार्टी…
— Sanjay Singh AAP (@SanjayAzadSln) April 24, 2026
दल-बदल विरोधी कानून का हवाला
संजय सिंह ने साफ तौर पर कहा कि संविधान की दसवीं अनुसूची यानी एंटी डिफेक्शन लॉ के तहत इस तरह से पाला बदलना अवैध है। उन्होंने तर्क दिया कि चाहे संख्या दो-तिहाई ही क्यों न हो, वर्तमान नियमों के अनुसार इस दल-बदल को किसी भी सूरत में वैध नहीं माना जा सकता। ‘आप’ नेता ने स्पष्ट किया कि वे सभापति को लिखे पत्र में सभी कानूनी बारीकियों का जिक्र करेंगे ताकि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए इन सांसदों की सदस्यता तुरंत खत्म की जा सके।
कार्यकर्ताओं के भरोसे पर टिकी पार्टी
वहीं, दिल्ली सरकार के मंत्री और ‘आप’ नेता सौरभ भारद्वाज ने भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा कि पार्टी कुछ बड़े चेहरों से नहीं, बल्कि अपने जमीन से जुड़े कार्यकर्ताओं की ताकत से चलती है। उन्होंने कहा कि कुछ नेताओं के जाने से पार्टी की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ेगा। भारद्वाज ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जांच एजेंसियों का डर दिखाकर विपक्षी दलों को अस्थिर करने की साजिश रच रही है।
जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप
भाजपा पर सीधा हमला बोलते हुए सौरभ भारद्वाज ने कहा कि जो नेता दबाव में आकर पार्टी छोड़ रहे हैं, वे केवल अपनी सुरक्षा देख रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा की यह पुरानी रणनीति रही है कि पहले विपक्षी नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाओ और जैसे ही वे भाजपा में शामिल हों, उन्हें ‘साफ-सुथरा’ घोषित कर दो। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे इस मुश्किल समय में विचलित न हों और सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ आवाज उठाते रहें।
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