NEET Controversy Talks

नीट विवाद पर केंद्र और सीजेपी के बीच वार्ता संपन्न : 2 शर्तों पर सहमति का दावा, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर फैसला कल संभव

नई दिल्ली राष्ट्रीय

एजेंसी, नई दिल्ली। NEET Controversy Talks : राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा में कथित गड़बड़ी और देश की समूची परीक्षा प्रणाली में बुनियादी सुधार की मांगों को लेकर राजधानी में जारी बड़े जनांदोलन के बीच 24 जुलाई 2026 को एक अत्यंत महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम दर्ज किया गया। पिछले 26 दिनों से जारी अनशन के सफलतापूर्वक समाप्त होने के बाद केंद्र सरकार और आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संगठन कॉकरोच जनता पार्टी के शीर्ष प्रतिनिधियों के मध्य औपचारिक और सीधी बातचीत की शुरुआत हुई। जंतर-मंतर पर गतिरोध के बाद दोनों पक्षों के बीच सहमति से राजधानी स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब जैसे एक तटस्थ स्थान पर यह उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस वार्ता में केंद्र सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह शामिल हुए, जिन्होंने सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास तथा राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका के साथ करीब 2 घंटे तक गहन विचार-विमर्श किया। बैठक के दौरान संगठन की ओर से परीक्षा व्यवस्था में सुधार हेतु 5 अनुच्छेदों वाला एक विस्तृत लिखित मांगपत्र और कई सुधारात्मक सुझाव सरकार को सौंपे गए। वार्ता के उपरांत केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने माहौल को अत्यंत सकारात्मक और सहयोगात्मक बताया तथा कहा कि सरकार सभी बिंदुओं पर गंभीरता से विचार-विमर्श कर रही है और शनिवार दोपहर को पुनः बैठक कर अपना आधिकारिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करेगी।

संगठन की 3 प्रमुख मांगें, पुलिस कार्रवाई पर असंतोष और 2 बिंदुओं पर सरकार की सैद्धांतिक सहमति

वार्ता की समाप्ति के तुरंत बाद सीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने संवाददाताओं को संबोधित करते हुए बैठक का विस्तृत विवरण साझा किया। उन्होंने बताया कि संगठन ने सरकार के समक्ष 3 अत्यंत महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं। पहली मुख्य मांग यह है कि नीट परीक्षा की तैयारी के दौरान अत्यधिक मानसिक दबाव और अवसाद के कारण आत्महत्या करने वाले सभी प्रभावित छात्रों के परिजनों को 1-1 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता और मुआवजा दिया जाए। दूसरी मांग के तहत आंदोलन में शामिल शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी छात्रों और युवाओं पर दर्ज किए गए सभी पुलिस मामले और एफआईआर तुरंत निष्शर्त वापस लिए जाएं तथा प्रशासनिक उत्पीड़न के लिए सरकार औपचारिक रूप से क्षमा मांगे। तीसरी और सबसे अडिग मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के पद से तत्काल इस्तीफे की है। सीजेपी के प्रतिनिधियों ने दावा किया कि केंद्रीय मंत्रियों ने प्रभावित परिवारों के मुआवजे और प्रदर्शनकारियों पर दर्ज कानूनी मामले वापस लेने की मांगों पर अपनी सैद्धांतिक सहमति व्यक्त कर दी है। हालांकि, केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के विषय पर फैसला सुरक्षित रखते हुए सरकार ने शनिवार दोपहर तक का अतिरिक्त समय मांगा है। वहीं सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके और प्रवक्ता वैष्णवी गौर ने स्पष्ट किया है कि जब तक शिक्षा मंत्री पदमुक्त नहीं होते, जंतर-मंतर पर धरना पूरी मजबूती के साथ जारी रहेगा।

सोनम वांगचुक का 26 दिन बाद अनशन समाप्त और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

इस पूरे आंदोलन का एक अन्य मुख्य केंद्र रहे प्रसिद्ध समाज सुधारक सोनम वांगचुक ने 26 दिनों से जारी अपनी कठिन भूख हड़ताल को अंततः समाप्त कर दिया है। सोनम वांगचुक ने सामाजिक माध्यम पर जारी एक संदेश में बताया कि केंद्रीय मंत्रियों और विभिन्न राजनीतिक दलों के लगभग 65 सांसदों की अपील तथा सरकार से मिले लिखित आश्वासन के पश्चात ही उन्होंने अपना अनशन तोड़ा है। सांसदों ने उन्हें आश्वस्त किया है कि संसद में परीक्षा धांधली और युवाओं के भविष्य से जुड़े विषयों पर प्राथमिकता से चर्चा कराई जाएगी। इस बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ नेता इंद्रेश कुमार ने इस आंदोलन पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि युवाओं को सतर्क रहने की आवश्यकता है ताकि कोई भी विघटनकारी या असामाजिक शक्ति देश की प्रगति को बाधित न कर सके। दूसरी तरफ, आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए। उन्होंने तर्क दिया कि एक तरफ सरकार त्वरित अदालतों के गठन का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ प्रमुख आरोपियों के खिलाफ ढिलाई बरती जा रही है, जिससे जांच एजेंसियों की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगता है।

राजधानी में कड़े सुरक्षा इंतजाम, 17 मेट्रो स्टेशन बंद और परीक्षा धांधली पर नए कानून का मसौदा

आंदोलन की संवेदनशीलता और राजधानी में संभावित प्रदर्शनों को ध्यान में रखते हुए प्रशासनिक स्तर पर सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए हैं। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने पुलिस और प्रशासन के निर्देशों पर अमल करते हुए सुबह 7:30 बजे से ही सुरक्षा कारणों का हवाला देकर लोक कल्याण मार्ग, राजीव चौक, पटेल चौक, रामकृष्ण आश्रम मार्ग, बाराखंभा रोड, सुप्रीम कोर्ट, सेवा तीर्थ, जनपथ, मंडी हाउस, केंद्रीय सचिवालय, आईटीओ, दिल्ली गेट, इंद्रप्रस्थ, खान मार्केट, जोर बाग, शिवाजी स्टेडियम और झंडेवालान सहित कुल 17 प्रमुख मेट्रो स्टेशनों को आम यात्रियों के लिए बंद कर दिया। यद्यपि यात्रियों की सुविधा हेतु प्रमुख इंटरचेंज स्टेशनों पर ट्रेनों का बदलाव जारी रखा गया। सीजेपी ने भी पुलिस की कथित सख्ती के विरोध में देश भर के जिलों में छात्रों से एकत्रित होकर शांतिपूर्ण ढंग से अपनी आवाज बुलंद करने का आह्वान किया है। इन तमाम हलचलों के बीच केंद्र सरकार ने भविष्य में किसी भी प्रकार के प्रश्नपत्र लीक को रोकने के लिए एक ऐतिहासिक और कड़ा कानून बनाने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में प्रस्तावित कानून के मसौदे पर विचार किया गया, जिसमें फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वारा समयबद्ध सुनवाई, दोषियों के लिए 10 वर्ष तक के कठोर कारावास और 10 करोड़ रुपये तक के भारी आर्थिक दंड जैसे कठोर प्रावधान शामिल किए गए हैं, जिसे शीघ्र ही संसद के पटल पर रखे जाने की संभावना है।

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