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संसद के मानसून सत्र में भारी हंगामा : नीट विवाद पर छिड़ा घमासान, लोकसभा 27 जुलाई तक स्थगित और राज्यसभा में मातरम् बिल पेश 

नई दिल्ली राष्ट्रीय

एजेंसी, नई दिल्ली। Parliament NEET Debate : संसद के मानसून सत्र के 5वें दिन देश की दोनों शीर्ष सभाओं में भारी हंगामा, नारेबाजी और तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिली। परीक्षा धांधली और नीट पेपर लीक विवाद को लेकर विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। विपक्ष लगातार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तुरंत इस्तीफे और संसद के भीतर विस्तृत चर्चा कराने की मांग पर अड़ा हुआ है। बढ़ते शोर-शराबे और गतिरोध के कारण लोकसभा की कार्यवाही को 27 जुलाई 2026 तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। वहीं दूसरी ओर, राज्यसभा में वंदे मातरम् विधेयक पेश किया गया, हालांकि हंगामे के चलते उच्च सदन की कार्यवाही भी समय-समय पर बाधित होती रही। सरकार का दावा है कि वह छात्रों के भविष्य से जुड़े हर मुद्दे पर खुली बहस के लिए तैयार है, जबकि विपक्षी दल इसे सिर्फ एक राजनीतिक बयानबाजी बता रहे हैं।

संसद परिसर से लेकर सदनों के भीतर तक विपक्ष का जोरदार विरोध

संसद भवन के परिसर में इंडिया गठबंधन के सांसदों ने एकजुट होकर केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। हाथों में तख्तियां लिए विपक्षी सांसदों ने नारे लगाए और आरोप लगाया कि केंद्र सरकार देश के करोड़ों युवाओं और विद्यार्थियों की समस्याओं को लेकर बिल्कुल भी गंभीर नहीं है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने सरकार पर संवेदनहीन रवैया अपनाने का आरोप लगाया। प्रियंका गांधी ने सोनिया गांधी के बयान का हवाला देते हुए सामाजिक माध्यम पर लिखा कि देश की शिक्षा प्रणाली की गुणवत्ता को लगातार नुकसान पहुंचाया गया है। विपक्ष ने मांग की है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद संसद के भीतर आकर परीक्षा प्रणाली की कमियों और पेपर लीक मामलों पर आधिकारिक बयान दें, न कि संसद सत्र के दौरान देर रात केवल वीडियो संदेश जारी करके औपचारिकता पूरी करें।

रिजिजू और भाजपा नेताओं का पलटवार: ‘सरकार चर्चा से पीछे नहीं हट रही’

विपक्ष के लगातार जारी हंगामे के बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने बेहद तल्ख तेवरों में कहा कि सरकार नीट और परीक्षा प्रणाली से जुड़े हर मुद्दे पर विस्तृत चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कांग्रेस नेता के.सी. वेणुगोपाल और अन्य विपक्षी नेताओं से अपील की कि जब सभी दल इस गंभीर विषय पर बात करना चाहते हैं, तो संसद को चलने दिया जाना चाहिए। रिजिजू ने कहा कि प्रधानमंत्री देश को भरोसा दे चुके हैं और अगर संसद में बहस नहीं होगी तो इससे पूरे देश में गलत संदेश जाएगा। इसके साथ ही भाजपा नेता शाहनवाज हुसैन, निशिकांत दुबे और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने आरोप लगाया कि विपक्ष केवल राजनीति कर रहा है और सोनम वांगचुक के अनशन से बनी जनभावना का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रहा है।

छात्र संगठनों से संवाद और फास्ट ट्रैक कोर्ट का फैसला

परीक्षा विवाद को सुलझाने और गतिरोध समाप्त करने के लिए सरकार की ओर से भी कई अहम कदम उठाए जा रहे हैं। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कंस्टीट्यूशन क्लब पहुंचकर सीजेपी संगठन के प्रतिनिधियों सौरव दास और आशुतोष के साथ अहम बैठक की। वहीं, शिवसेना नेता शाइना एनसी ने संवाद के इस रास्ते का स्वागत करते हुए कहा कि जब सकारात्मक बातचीत होती है तभी दीर्घकालिक समाधान निकलता है। दूसरी ओर, केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया कि सरकार ने पेपर लीक के मामलों की जल्द से जल्द सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन का फैसला किया है। वित्त मंत्री ने कहा कि इस मामले में कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और दोबारा परीक्षाएं आयोजित कर परिणाम भी घोषित किए जा चुके हैं, ऐसे में विपक्ष को संसद में सार्थक बहस का हिस्सा बनना चाहिए।

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