Assam Flood

असम में बाढ़ का भयंकर क्राइसिस : 41 लोगों की दर्दनाक मौत और 6.5 लाख की आबादी प्रभावित, रेस्क्यू मिशन तेज

असम देश/प्रदेश

एजेंसी, गुवाहाटी। Assam Flood 41 Deaths : असम राज्य में मानसून की भारी बारिश के बाद अचानक आई बाढ़ ने भयंकर तबाही मचा रखी है। हर तरफ सिर्फ पानी ही पानी नजर आ रहा है और आम जनजीवन पूरी तरह से अस्त व्यस्त हो चुका है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने नदियों के जलस्तर को खतरे के निशान से बहुत ऊपर पहुंचा दिया है। राज्य के करीब 11 जिले इस प्राकृतिक आपदा का डटकर सामना कर रहे हैं। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि अब तक लगभग 6.5 लाख से भी अधिक नागरिक बेघर होने की कगार पर पहुंच गए हैं। प्रशासन और रेस्क्यू टीमें दिन रात मेहनत करके लोगों की जान बचाने के काम में जुटी हुई हैं, लेकिन प्रकृति का यह भयानक रूप थमने का नाम नहीं ले रहा है।

24 घंटों में 10 लोगों ने गंवाई जान और कुल 41 मौतें

असम स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, स्थिति दिन प्रतिदिन और भी खराब होती जा रही है। केवल पिछले 24 घंटों के अंतराल में ही 10 और नागरिकों की पानी में डूबने और बाढ़ से जुड़ी अन्य दुर्घटनाओं में दुखद मृत्यु हो गई है। अगर इस साल के कुल आंकड़ों पर नजर डालें तो मरने वालों की संख्या बढ़कर 41 तक पहुंच चुकी है। प्रशासन द्वारा जारी की गई विस्तृत जानकारी के मुताबिक, शिवसागर और जोरहाट जैसे अति प्रभावित क्षेत्रों में 3 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। इसके साथ ही चराइदेव जिले में 2 तथा कार्बी आंगलोंग और धेमाजी में 1 व्यक्ति की मौत की पुष्टि हुई है। हर तरफ मातम पसरा हुआ है और लोग अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों की तरफ पलायन करने को मजबूर हैं।

शिवसागर और चराइदेव सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र

बाढ़ के इस तांडव से राज्य के कई हिस्से बुरी तरह कट चुके हैं। सबसे भयानक मंजर शिवसागर में देखने को मिल रहा है जहां लगभग 4 लाख लोग सीधे तौर पर पानी के कहर का शिकार हुए हैं। इसके बाद चराइदेव जिले का नंबर आता है, जहां 1.11 लाख से ज्यादा निवासियों का जीवन प्रभावित हुआ है। जोरहाट जिले में भी 97000 नागरिक बाढ़ के इस भयानक संकट से जूझ रहे हैं। कुल मिलाकर 11 जिले जिनमें कामरूप, गोलाघाट, डिब्रूगढ़, होजई, कामरूप मेट्रोपॉलिटन और नागांव शामिल हैं, भारी तबाही के गवाह बन रहे हैं। सरकारी आंकड़ों की मानें तो पूरे राज्य में 939 से अधिक गांव पूरी तरह से जलमग्न हो चुके हैं और 24897.27 हेक्टेयर उपजाऊ कृषि भूमि पानी में डूबकर नष्ट हो चुकी है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

मौसम विभाग का येलो अलर्ट और मौसम की चेतावनी

इंडियन मेट्रोलॉजिकल डिपार्टमेंट यानी आईएमडी ने मौसम के कड़े तेवर को देखते हुए पहले ही नागरिकों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी कर दिया था ताकि लोग आने वाली प्राकृतिक आपदा के लिए खुद को मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार रख सकें। इसके बाद अब मौसम विभाग ने आगामी 4 दिनों के लिए येलो अलर्ट भी घोषित कर दिया है। जानकारों का कहना है कि आने वाले समय में तेज आंधी तूफान, आकाशीय बिजली गिरने और अत्यधिक भारी वर्षा होने की पूरी संभावना है। लगातार हो रही बारिश की वजह से राहत कार्यों में भी काफी बाधा उत्पन्न हो रही है। नदियों का उफान कम नहीं हो रहा है, जिससे बाढ़ का पानी नए इलाकों में भी तेजी से प्रवेश कर रहा है।

रेस्क्यू ऑपरेशन और रिलीफ कैंप का विस्तार

राज्य सरकार और केंद्र सरकार की संयुक्त टीमें बचाव कार्य में पूरी ताकत झोंक रही हैं। इस समय असम के 10 जिलों में लगभग 487 शेल्टर होम और रिलीफ कैंप चलाए जा रहे हैं, जहां बेघर हुए 24418 नागरिकों को सुरक्षित आश्रय, भोजन और मेडिकल सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। भारतीय सेना, एयर फोर्स, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, फायर एंड इमरजेंसी सर्विस और स्थानीय पुलिस की टुकड़ियां मिलकर अब तक 8500 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर निकाल चुकी हैं। जिन दुर्गम और दूरदराज के इलाकों में बचाव कर्मियों का पहुंचना नामुमकिन हो रहा है, वहां ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल करके खाने के पैकेट, पीने का पानी और जरूरी दवाइयां एयर ड्रॉप की जा रही हैं। यह आधुनिक तकनीक रेस्क्यू ऑपरेशन में बड़ा गेम चेंजर साबित हो रही है।

सरकार और प्रशासन की उच्च स्तरीय बैठकें

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा खुद इस पूरी क्राइसिस सिचुएशन पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने जोरहाट और शिवसागर जैसे संवेदनशील जिलों का दौरा करके पीड़ितों से सीधा संवाद किया और उन्हें हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। मुख्यमंत्री गोलाघाट के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का भी दौरा कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ राज्य के चीफ सेक्रेटरी रवि कोटा ने उच्च स्तरीय मीटिंग में सभी विभागों को सख्त निर्देश दिए हैं कि रिलीफ और रिस्टोरेशन के काम में कोई भी ढिलाई नहीं बरती जानी चाहिए। उन्होंने बिजली, सड़क और कम्युनिकेशन जैसी जरूरी सेवाओं को जल्द से जल्द बहाल करने का आदेश दिया है। प्रशासन का मुख्य फोकस इस बात पर है कि रिलीफ कैंपों में सप्लाई चेन बिना किसी रुकावट के चलती रहे और केंद्रीय एजेंसियों के साथ बेहतर तालमेल बिठाकर लोगों की परेशानी को कम किया जा सके।

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