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मोदी कैबिनेट का ऐतिहासिक फैसला : देश में लगेंगे 9 नए यूरिया प्लांट और 1.27 लाख करोड़ के ‘सेमीकॉन 2.0’ से चमकेगी भारत की किस्मत

नई दिल्ली राष्ट्रीय

एजेंसी, नई दिल्ली। Modi Cabinet Semicon 2.0 : केंद्र सरकार ने भारतीय कृषि और किसानों के हित में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए देश को उर्वरक उत्पादन के क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प लिया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित केंद्रीय मंत्रिमंडल की उच्च स्तरीय बैठक में ‘राष्ट्रीय निवेश नीति-2026’ को सर्वसम्मति से मंजूरी प्रदान कर दी गई है। सरकार के इस बड़े फैसले के अंतर्गत देश के भीतर 1 करोड़ टन अतिरिक्त यूरिया उत्पादन की नई क्षमता विकसित की जाएगी, जिससे विदेशी निर्भरता को समाप्त किया जा सके।

देश के विभिन्न हिस्सों में स्थापित होंगे 8 से 9 नए यूरिया संयंत्र

इस स्वीकृत राष्ट्रीय निवेश नीति के तहत भारत के अलग-अलग राज्यों में प्राकृतिक गैस पर आधारित 8 से 9 नए यूरिया कारखाने स्थापित किए जाएंगे। इन आधुनिक संयंत्रों के क्रियान्वयन के बाद भारत अपनी कृषि संबंधी यूरिया आवश्यकताओं को पूरी तरह घरेलू स्तर पर निर्मित खाद से पूरा करने में सक्षम हो जाएगा। मंत्रिमंडल की बैठक के उपरांत केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि बीते 10 वर्षों के कार्यकाल में देश के भीतर 6 नए यूरिया कारखाने चालू किए गए हैं, जिसकी वजह से विदेशों से होने वाले आयात में भारी कमी देखी गई है। अब नए संयंत्रों के निर्माण से देश इस क्षेत्र में शत-प्रतिशत आत्मनिर्भरता का लक्ष्य हासिल करेगा।

देश में प्रतिवर्ष 5 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ रही है यूरिया की मांग

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से यह बात सामने आई है कि भारत में यूरिया की खपत में हर साल लगभग 5 प्रतिशत की दर से निरंतर वृद्धि हो रही है। वर्तमान समय में देश के भीतर करीब 3 करोड़ टन यूरिया का उत्पादन किया जाता है, जबकि भारतीय कृषि क्षेत्र की कुल आवश्यकता लगभग 4 करोड़ टन के आसपास बनी हुई है। इस 1 करोड़ टन की बड़ी कमी को पूरा करने के लिए सरकार को प्रत्येक वर्ष वैश्विक बाजार से भारी मात्रा में यूरिया का आयात करना पड़ता है। नई नीति के धरातल पर उतरने के बाद इस आयात पर होने वाले देश के बड़े खर्च और निर्भरता को पूरी तरह खत्म किया जा सकेगा।

निवेशकों को आकर्षित करने के लिए नई नीति में शामिल की गईं तीन बड़ी खूबियां

राष्ट्रीय निवेश नीति-2026 को उर्वरक क्षेत्र के बड़े निवेशकों के लिए बेहद फायदेमंद और आकर्षक बनाने के उद्देश्य से सरकार ने इसमें तीन मुख्य तकनीकी प्रावधान जोड़े हैं। पहले प्रावधान के तहत कंपनियों को मिलने वाली सरकारी सब्सिडी की गणना फिक्स्ड और वेरिएबल कॉस्ट के अलग-अलग मानकों के आधार पर की जाएगी। दूसरे बड़े प्रावधान में नए यूरिया प्लांट लगाने वाली कंपनियों को 12 से 16 प्रतिशत तक का सुनिश्चित रिटर्न देने की गारंटी दी गई है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले फॉरेन एक्सचेंज यानी विदेशी मुद्रा विनिमय के जोखिमों से कंपनियों को सुरक्षित रखने की एक पुख्ता व्यवस्था भी तैयार की गई है।

वर्ष 2012 में बनी पुरानी उर्वरक नीति का ही उन्नत विस्तार है यह नई योजना

केंद्रीय कैबिनेट ने इस बात को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया है कि यह नई राष्ट्रीय निवेश नीति-2026, पूर्व में लागू की गई नई निवेश नीति (एनआईपी)-2012 का ही एक उन्नत और व्यापक रूप है। इस संशोधित योजना का मुख्य ध्येय देश के भीतर निजी और सार्वजनिक निवेश को तेजी से आकर्षित करना, घरेलू स्तर पर यूरिया की उत्पादन क्षमता को बढ़ाना तथा भारतीय उर्वरक क्षेत्र में दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा एवं आत्मनिर्भरता के तंत्र को मजबूत करना है।

भारतीय किसानों और संपूर्ण कृषि अर्थव्यवस्था को मिलेगा अभूतपूर्व लाभ

कृषि विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों का मानना है कि केंद्र सरकार की इस दूरदर्शी नीति के क्रियान्वयन से भारतीय ग्रामीण क्षेत्रों में खाद की किल्लत हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगी। किसानों को सही समय पर और उचित दामों में यूरिया उपलब्ध हो सकेगा, जिससे फसलों की उत्पादकता बढ़ेगी। इसके साथ ही देश के खजाने से आयात पर खर्च होने वाली विदेशी मुद्रा की बचत होगी। घरेलू स्तर पर इतनी बड़ी संख्या में नए उद्योगों की स्थापना होने से देश के भीतर भारी मात्रा में नए रोजगार, व्यापारिक निवेश और औद्योगिक विकास को एक नई गति मिलेगी।

देश में चिप निर्माण क्रांति को तेज करने के लिए 1.27 लाख करोड़ के ‘सेमीकॉन 2.0’ का शंखनाद

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में कैबिनेट ने देश को तकनीकी क्षेत्र में दुनिया का सिरमौर बनाने के लिए एक और गेमचेंजर फैसला लिया है। सरकार ने भारत में सेमीकंडक्टर विनिर्माण और अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक चिप के विकास को बढ़ावा देने के लिए 1,27,500 करोड़ रुपये के विशाल बजटीय आवंटन के साथ ‘सेमीकॉन 2.0’ योजना को अपनी आधिकारिक स्वीकृति दे दी है। यह मेगा प्रोजेक्ट अगले 6 वर्षों की अवधि के भीतर देश के भीतर एक संपूर्ण सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का ढांचा खड़ा करने का काम करेगा।

4 लाख करोड़ का निवेश आकर्षित करेगी नई सेमीकंडक्टर नीति

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस ऐतिहासिक नीति की घोषणा करते हुए इसके रणनीतिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज के दौर में मिसाइल, सैन्य ड्रोन, आधुनिक तोप, नौसैनिक जहाजों से लेकर हमारे रोजमर्रा के कंप्यूटर, कैमरा, चिकित्सा के एक्स-रे और सिनेमा स्क्रीन तक, हर छोटी-बड़ी इलेक्ट्रॉनिक चीज के पीछे चिप की असली ताकत काम करती है। सरकार को उम्मीद है कि सेमीकॉन 2.0 योजना के माध्यम से देश में लगभग 4 लाख करोड़ रुपये का भारी निवेश आएगा। इसके साथ ही सालाना 2 लाख करोड़ रुपये मूल्य के चिप का उत्पादन देश में होगा और लगभग 1 लाख करोड़ रुपये के इलेक्ट्रॉनिक्स का निर्यात वैश्विक बाजारों में किया जाएगा।

घरेलू चिप डिजाइनरों और 105 से अधिक स्टार्टअप्स को मिलेगा सीधा प्रोत्साहन

यह नई योजना भारत में चिप डिजाइनिंग के क्षेत्र में मिली शुरुआती सफलताओं को नए मुकाम पर ले जाने का कार्य करेगी। वर्तमान में देश के करीब 105 नवोदित स्टार्टअप चिप विकास के अलग-अलग चरणों पर काम कर रहे हैं। इस योजना के अंतर्गत मुख्य रूप से भारत की अपनी इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी, स्वदेशी चिप डिजाइन और सिस्टम डिजाइन नेटवर्क को विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके अलावा चिप बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली भारी मशीनरी, एडवांस्ड रिसर्च, जरूरी केमिकल्स और विशेष गैसों का उत्पादन करने वाली सहायक कंपनियों को भी सरकार भारी वित्तीय प्रोत्साहन देगी।

वर्ष 2028 तक भारत में शुरू हो जाएगी पहली स्वदेशी सेमीकंडक्टर फैब

भारत सरकार के प्रयासों और वैश्विक परिदृश्य को देखते हुए यह अनुमान लगाया गया है कि देश की पहली अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर फैब यूनिट वर्ष 2028 तक पूरी तरह से व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर देगी। इस प्रगति से भारत की तकनीकी क्षमता पर पूरी दुनिया का भरोसा बढ़ा है। सरकार इस नीति के माध्यम से दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों को भारत में आकर सिलिकॉन फैब, कंपाउंड सेमीकंडक्टर फैब, डिस्क्रीट कंपोनेंट फैब और डिस्प्ले फैब जैसी अत्याधुनिक विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने के लिए आमंत्रित कर रही है।

असेंबली, टेस्टिंग और पैकेजिंग (एटीएमपी) के क्षेत्र में ग्लोबल हब बनेगा भारत

चिप निर्माण के क्षेत्र में एटीएमपी और ओएसएटी (आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट) इकाइयों की शुरुआती सफलता के बाद भारत अब इस क्षेत्र में दुनिया के सामने सबसे भरोसेमंद और आकर्षक विकल्प बनकर उभरा है। केंद्र सरकार इन विशेष इकाइयों की स्थापना को हर स्तर पर मदद पहुंचाएगी और दुनिया की सबसे बेहतरीन पैकेजिंग तकनीकों को भारत में लाने के लिए विशेष ध्यान केंद्रित करेगी। सेमीकॉन 2.0 के अंतर्गत एडवांस नोड्स के विकास के लिए भारत और विदेशों के शीर्ष वैज्ञानिक व अनुसंधान संस्थानों के साथ मिलकर बड़े समझौते किए जाएंगे।

देश के 315 विश्वविद्यालयों में 68,000 छात्रों को दिया गया चिप डिजाइन का प्रशिक्षण

मानव संसाधन को इस महाअभियान के लिए तैयार करने के उद्देश्य से देश के 315 प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में आधुनिक ईडीए टूल्स के जरिए बेहद जटिल चिप डिजाइनिंग का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अब तक लगभग 68,000 प्रतिभावान छात्रों को इस विधा में पूरी तरह कुशल बनाया जा चुका है, और आने वाले समय में इस ट्रेनिंग प्रोग्राम का दायरा और बड़ा किया जाएगा। औद्योगिक सहयोग के माध्यम से देश में क्लीन रूम टेक्नोलॉजी और फैब कंस्ट्रक्शन के क्षेत्र में भी युवाओं को व्यावहारिक कौशल प्रदान किया जाएगा।

सेमीकॉन 1.0 के तहत स्वीकृत 12 इकाइयों में से 3 में उत्पादन हुआ शुरू

सरकार ने बताया कि इससे पहले लाई गई सेमीकॉन 1.0 योजना के तहत कुल 12 बड़ी विनिर्माण इकाइयों को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनमें सामूहिक रूप से 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश जमीन पर उतर रहा है। इनमें से 3 बड़े संयंत्रों में उत्पादन की प्रक्रिया शुरू भी हो चुकी है। माइक्रोन, केन्स और सीजी सेमी जैसी बड़ी कंपनियों ने अपना कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू कर दिया है, जबकि एक अन्य बड़ी इकाई के वर्ष 2026 के अंत तक चालू हो जाने की पूरी संभावना है। इसके साथ ही 24 महत्वपूर्ण सेमीकंडक्टर डिजाइन परियोजनाओं को वित्तीय सहायता दी गई है।

ओडिशा और झारखंड के रेल नेटवर्क को मजबूत करने के लिए 3,907 करोड़ रुपये मंजूर

आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने पूर्वी भारत के औद्योगिक विकास को रफ्तार देने के लिए ओडिशा और झारखंड राज्यों को एक बड़ा तोहफा दिया है। सरकार ने इन दोनों राज्यों के 4 प्रमुख जिलों में फैले रेल नेटवर्क को आधुनिक बनाने के लिए 3,907 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली दो बड़ी मल्टी-ट्रैकिंग रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। इस पूरे रेल विकास कार्य को वर्ष 2030-31 तक हर हाल में पूरा करने का एक कड़ा समयबद्ध लक्ष्य रखा गया है।

पारादीप-हरिदासपुर दोहरीकरण और राजखरसावां-डांगोपोसी में बनेगी चौथी लाइन

इस संबंध में जानकारी देते हुए रेल मंत्री ने बताया कि बुनियादी ढांचे के इस विकास कार्य में पारादीप-हरिदासपुर रेलखंड का दोहरीकरण किया जाएगा और इसके साथ ही राजखरसावां-डांगोपोसी रेलमार्ग पर एक चौथी नई रेल लाइन का निर्माण किया जाएगा। इन दोनों महत्वाकांक्षी परियोजनाओं के पूरे होने से भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 145 किलोमीटर की नई पटरियां जुड़ जाएंगी। इस अतिरिक्त रेल क्षमता के विकसित होने से ट्रेनों की लेटलतीफी खत्म होगी, मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों का परिचालन तेज होगा तथा रेल रूट पर बना रहने वाला भारी दबाव कम होगा।

गति शक्ति मास्टर प्लान के तहत 1,526 गांवों और 14 लाख आबादी को मिलेगा लाभ

प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के सिद्धांतों के अनुरूप तैयार की गई ये रेल परियोजनाएं देश की लॉजिस्टिक्स क्षमता और मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी को एक नया आयाम देंगी। इन नए रेल मार्गों के बन जाने से ओडिशा और झारखंड के सुदूर इलाकों में बसे लगभग 1,526 गांवों के करीब 14 लाख लोगों को सीधे तौर पर आधुनिक रेल यातायात की सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही प्रसिद्ध ललितगिरि बौद्ध परिसर, ऐतिहासिक श्री बलदेवजी मंदिर और सुरम्य मेघाहातुबुरू पहाड़ियों जैसे बड़े पर्यटन केंद्रों तक देश-विदेश के पर्यटकों की पहुंच बेहद आसान हो जाएगी।

खनिजों के परिवहन में आएगी तेजी और पर्यावरण को मिलेगा 1 करोड़ पेड़ों के बराबर लाभ

यह रेल मार्ग भारत के सबसे प्रमुख औद्योगिक गलियारों में से एक है, जो कोयला, लौह अयस्क, डोलोमाइट, चूना पत्थर और जिप्सम जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के सुरक्षित परिवहन के लिए लाइफलाइन माना जाता है। इस परियोजना के पूरा होने से रेलवे की माल ढुलाई क्षमता में सालाना 4.4 करोड़ टन का भारी इजाफा होगा। रेल मंत्रालय के दावों के अनुसार, इस परियोजना से देश की माल ढुलाई लागत कम होगी, सालाना लगभग 6 करोड़ लीटर महंगे तेल के आयात की बचत होगी और वायुमंडल में 29 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन घटेगा, जो कि पर्यावरण के लिहाज से 1 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है।

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