एजेंसी, वाशिंगटन। US Senate Anti Russia Bill : संयुक्त राज्य अमेरिका की सीनेट में रूस के ऊपर बेहद कड़े आर्थिक और व्यापारिक प्रतिबंध लगाने के उद्देश्य से एक नया संशोधित बिल पेश किया गया है। इस नए विधायी प्रस्ताव के कारण भारत और चीन सहित दुनिया के 5 प्रमुख देशों पर रूस से कच्चा तेल खरीदना जारी रखने के लिए भारी आर्थिक जुर्माना लग सकता है। वाशिंगटन स्थित कैपिटल हिल में पेश किए गए इस बेहद महत्वपूर्ण कानून को अमेरिकी राजनीतिक गलियारों में ‘लिंडसे ग्राहम रूस अकाउंटेबिलिटी बिल’ के नाम से भी पुकारा जा रहा है। इस कानून के लागू होने के बाद रूस से तेल आयात करने वाले मित्र देशों पर भी अमेरिका का दबाव काफी ज्यादा बढ़ जाएगा।
🇺🇸 PEAK HYPOCRISY: US Senators threaten sanctions on India, China and others for trading with Russia, yet give ‘European allies’ a free pass
“Our European allies are not targeted here,” said Democratic Sen. Richard Blumenthal. pic.twitter.com/i4x2DYJA2M
— Sputnik India (@Sputnik_India) July 15, 2026
दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं ने संयुक्त रूप से पेश किया प्रस्ताव
अमेरिकी संसद के ऊपरी सदन यानी सीनेट में इस कड़े कानून को लेकर जबरदस्त राजनीतिक सहमति देखी जा रही है। मंगलवार को इस बिल को डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल और जीन शाहीन के साथ-साथ रिपब्लिकन पार्टी के सीनेटर रोजर विकर और केटी ब्रिट ने पेश किया। इस कानून को तैयार करने और संसद पटल पर लाने के लिए दोनों ही प्रमुख पार्टियों के 12 से भी अधिक दिग्गज सांसदों ने एक साथ आकर अपना खुला समर्थन दिया है, जिससे इसके पारित होने की संभावनाएं बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं।
दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम की विरासत और टैरिफ की सीमा में बदलाव
इस ऐतिहासिक आर्थिक विधेयक की मुख्य रूपरेखा तैयार करने का पूरा श्रेय अमेरिका के दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम को दिया जा रहा है। उन्होंने इस विशेष प्रस्ताव को अंतिम रूप देने के लिए लगभग 2 वर्षों तक बहुत ही गहराई से मेहनत की थी। इस बिल के शुरुआती ड्राफ्ट में रूस से पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स आयात करने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक का भारी-भरकम इम्पोर्ट टैरिफ लगाने का बेहद सख्त सुझाव दिया गया था। हालांकि, बाद में सरकार और प्रशासन के साथ गहन विचार-विमर्श के बाद इसके संशोधित रूप में टैरिफ की इस अधिकतम ऊपरी सीमा को घटाकर 100 प्रतिशत तक सीमित कर दिया गया है।
केवल आयात शुल्क ही नहीं, बल्कि रूसी अर्थव्यवस्था को पूरी तरह तोड़ने का लक्ष्य
डेमोक्रेटिक पार्टी के मुख्य प्रस्तावक रिचर्ड ब्लूमेंथल ने इस बिल के उद्देश्यों को स्पष्ट करते हुए मीडिया को बताया कि यह प्रस्तावित कानून सिर्फ आयात शुल्क या टैक्स लगाने तक ही सीमित नहीं है। इस बिल में रूस के पूरे एनर्जी सेक्टर, बैंकिंग व फाइनेंशियल सिस्टम और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग को पूरी तरह से पंगु बनाने के लिए बहुत बड़े स्तर के प्रतिबंध शामिल किए गए हैं। इसके अतिरिक्त रूसी अरबपतियों और वहां के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की निजी संपत्तियों को भी निशाना बनाया गया है। साथ ही यह कानून अमेरिकी सरकार को यह विशेष शक्ति प्रदान करता है कि वह रूस से सबसे ज्यादा तेल खरीदने वाले देशों पर तय सीमा के भीतर भारी जुर्माना या टैरिफ लगा सके।
भारत सहित 5 प्रमुख देशों पर मंडराया अमेरिकी पाबंदियों का खतरा
संशोधित कानून के प्रावधानों के तहत मॉस्को से सबसे अधिक मात्रा में कच्चा तेल आयात करने वाले दुनिया के शीर्ष 5 देशों को सीधे तौर पर इस कानूनी कार्रवाई के दायरे में लाया गया है। सीनेटर ब्लूमेंथल द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस संवेदनशील सूची में भारत और चीन के अलावा स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान जैसे देशों के नाम शामिल हैं। कच्चे तेल के साथ-साथ रूस से नेचुरल गैस खरीदने वाले देशों को भी इस दायरे में लाने की पूरी तैयारी है। हालांकि, इसमें एक राहत भरा प्रावधान यह भी है कि जो देश अपनी कुल जरूरत का 15 प्रतिशत से कम गैस रूस से लेते हैं और लगातार इस आयात को कम करने का प्रयास कर रहे हैं, उन्हें इस प्रतिबंध से छूट दी जा सकती है।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि तय करेंगे टैक्स की अंतिम दरें
इस नए अमेरिकी विधेयक के भीतर किसी भी प्रकार के टैक्स या आयात शुल्क की एक निश्चित दर पहले से तय नहीं की गई है। इसके स्थान पर जुर्माने अथवा टैरिफ की आखिरी दर को निर्धारित करने का पूरा अधिकार अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि यानी यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव को सौंपने का प्रस्ताव रखा गया है। सीनेटर ब्लूमेंथल ने खुलकर यह स्वीकार किया कि उनका मुख्य उद्देश्य ऐसी सख्त दरें निर्धारित करना है जिससे भारत, चीन और अन्य बड़े खरीदार देश रूस से किसी भी प्रकार का तेल तथा गैस का व्यापार करने से पूरी तरह से पीछे हट जाएं।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को प्राप्त होगी विशेष छूट देने की शक्ति
इस कानून में व्हाइट हाउस और अमेरिकी राष्ट्रपति को कुछ विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए किसी भी देश को टैरिफ से राहत देने की विशेष शक्ति प्रदान की गई है। हालांकि, यदि राष्ट्रपति इस छूट के तहत बाद में किसी देश के आयात शुल्क में कोई कमी करते हैं, तो इसकी पूरी जानकारी अमेरिकी कांग्रेस को लिखित रूप में देना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही इस बिल में रूस के कुख्यात ‘शैडो फ्लीट’ यानी उन अवैध तेल टैंकरों पर भी कठोर नौसैनिक व कानूनी कार्रवाई करने का प्रावधान जोड़ा गया है, जिनका उपयोग करके रूस अंतरराष्ट्रीय पाबंदियों से बचते हुए पूरी दुनिया में गुप्त रूप से अपना कच्चा तेल बेचता है।
ट्रंप प्रशासन के सुझाव पर पुराने ड्राफ्ट में किया गया बड़ा संशोधन
सांसदों ने मीडिया से बात करते हुए यह भी खुलासा किया कि इस बिल के पुराने और शुरुआती मसौदे में दुनिया के लगभग 63 देशों को इस आर्थिक प्रतिबंध के दायरे में लाने की बात कही गई थी। परंतु, संशोधित संस्करण में इसका दायरा बहुत छोटा कर दिया गया है और अब केवल उन्हीं प्रमुख देशों को टारगेट किया गया है जो रूस से सबसे ज्यादा मात्रा में तेल और गैस खरीदते हैं। सीनेटर ब्लूमेंथल ने बताया कि यह महत्वपूर्ण बदलाव वर्तमान डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के विशेष परामर्श पर ही किया गया है और व्हाइट हाउस ने इस संशोधित बिल को अपना पूर्ण लिखित समर्थन भी जारी कर दिया है।
दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम को संसद में दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि
कैपिटल हिल में जब यह बिल पेश किया जा रहा था, तब सदन में मौजूद सभी पार्टी के नेताओं ने दिवंगत नेता लिंडसे ग्राहम को याद करते हुए उन्हें अपनी श्रद्धांजलि दी। रिपब्लिकन सीनेटर रोजर विकर ने इस कानून को लिंडसे ग्राहम के पूरे राजनीतिक जीवन की सबसे महान और ऐतिहासिक उपलब्धियों में से एक करार दिया। वहीं, दूसरी ओर सीनेटर टेड क्रूज ने यह भी बताया कि ग्राहम ने अपने जीवन के आखिरी दिनों में खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की थी और इस बिल की हर एक शर्त पर उनके साथ सीधी और लंबी चर्चा की थी। सभी सांसदों ने इस कानून को अमेरिका के हित में जल्द से जल्द पास करने की मांग की है।
यूक्रेन विवाद के बाद भारत पर बढ़ता हुआ वैश्विक दबाव
वर्ष 2022 में रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध की शुरुआत होने के बाद से ही पश्चिमी देशों ने रूस पर कई प्रतिबंध लगाए थे। इसके बाद रूस ने भारत को बहुत ही कम और रियायती कीमतों पर कच्चा तेल देने का ऑफर दिया, जिसका लाभ उठाते हुए भारत ने रूसी तेल का आयात बहुत तेजी से बढ़ा दिया। वर्तमान समय में रूस से आने वाला तेल भारत के कुल राष्ट्रीय तेल आयात का एक बहुत बड़ा और सबसे मुख्य हिस्सा बन चुका है। भारत सरकार लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह कहती आ रही है कि यह खरीदारी भारत की अपनी ऊर्जा सुरक्षा और देश के 140 करोड़ से अधिक उपभोक्ताओं के आर्थिक हितों की रक्षा के लिए बहुत आवश्यक है। नई दिल्ली का यह भी मजबूत तर्क है कि भारतीय खरीद के कारण ही वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं।
कानून बनने से पहले पार करनी होगी एक लंबी विधायी प्रक्रिया
अमेरिकी सीनेट में पेश होने के बाद भी इस विधेयक को कानून की शक्ल लेने के लिए अभी एक बहुत ही लंबी और जटिल संवैधानिक प्रक्रिया से गुजरना होगा। सीनेट से पूरी तरह पारित होने के बाद इस बिल को संसद के निचले सदन यानी प्रतिनिधि सभा में भेजा जाएगा, जहां इस पर दोबारा वोटिंग होगी। जब दोनों सदनों से यह बिल भारी बहुमत से पास हो जाएगा, तभी इसे अंतिम मंजूरी और हस्ताक्षर के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास भेजा जाएगा। इससे पहले व्हाइट हाउस के एक बड़े प्रशासनिक अधिकारी ने समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए साफ किया था कि डोनाल्ड ट्रंप की सरकार इस एंटी-रशिया प्रतिबंध बिल का पूरी तरह से समर्थन करती है।
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