एजेंसी, भोपाल। Twisha Sharma death case : मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के बहुचर्चित ट्विशा शर्मा मृत्यु मामले में कानूनी कार्यवाही का सामना कर रही पूर्व न्यायाधीश गिरिबाला सिंह और उनके पुत्र समर्थ सिंह को अदालत से एक बार फिर बहुत बड़ा झटका लगा है। मंगलवार को भोपाल की माननीय अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मां-बेटे को किसी भी प्रकार की राहत देने से साफ मना कर दिया। इस हाई-प्रोफाइल मामले की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से न्यायाधीश अनुदिता गुप्ता की अदालत के समक्ष संपन्न हुई, जिसमें कोर्ट ने दोनों आरोपियों की न्यायिक हिरासत की अवधि को आगामी 28 जुलाई तक के लिए बढ़ा दिया है। इस न्यायिक आदेश के बाद अब दोनों आरोपियों को फिलहाल भोपाल जेल की सलाखों के पीछे ही वक्त बिताना होगा।
The CBI has sought an extension of the judicial custody of Giribala and Samarth till July 28 in the Twisha death case. The agency told the court both accused have refused to provide voice samples despite court directions and has sought fresh orders compelling them to do so. AIIMS… pic.twitter.com/nhbcIyIuC2
— IANS (@ians_india) July 14, 2026
आरोपियों के असहयोग पर न्यायालय का कड़ा रुख, सीबीआई को वॉयस सैंपल लेने की अनुमति
अदालत की इस महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान देश की शीर्ष जांच एजेंसी केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई ने न्यायाधीश के समक्ष अपना पक्ष प्रस्तुत किया। जांच एजेंसी के अधिकारियों ने अदालत को अवगत कराया कि इस संवेदनशील मामले की छानबीन अभी पूरी नहीं हुई है और जांच की प्रक्रिया लगातार लंबित चल रही है। इसके साथ ही सीबीआई ने आरोपियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि दोनों ही आरोपी जांच की दिशा में बिल्कुल भी सहयोग नहीं कर रहे हैं और अपने वॉयस सैंपल देने से लगातार इनकार कर रहे हैं। इस बात पर अदालत ने अत्यंत कड़ा रुख अख्तियार करते हुए आरोपियों को अपना वॉयस सैंपल देने का सख्त हुक्म जारी किया, जिसके बाद अब सीबीआई की टीम कभी भी कारागार जाकर समर्थ सिंह की आवाज का नमूना ले सकेगी।
पीड़ित पक्ष के वकीलों और परिजनों ने आरोपियों की मंशा पर उठाए गंभीर सवाल
ट्विशा शर्मा के पक्ष का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता शुभांग दीक्षित ने न्यायालय परिसर में मीडिया कर्मियों से बातचीत करते हुए बताया कि आरोपी समर्थ सिंह ने जांच की शुरुआत से लेकर अब तक एक बार भी अपना वॉयस सैंपल जांच टीम को उपलब्ध नहीं कराया है, जबकि उनकी मां और पूर्व जज गिरिबाला सिंह पूर्व में एक बार अपना सैंपल दे चुकी हैं। इस मामले में मृतका के पिता नवनिधि शर्मा ने भी आरोपियों की मंशा पर कई गहरे सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आरोपी पक्ष कानूनी दांव-पेंच और विभिन्न प्रकार के बहानों का सहारा लेकर सच को सामने आने से रोकने का प्रयास कर रहा है, ताकि जांच में बाधा उत्पन्न की जा सके।
चालान पेश करने के लिए निर्धारित 60 दिन की समय सीमा और मेडिकल रिपोर्ट की स्थिति
इस मामले की कमान संभालने वाली सीबीआई ने 25 मई 2026 को आधिकारिक रूप से इस केस की तफ्तीश को अपने हाथों में लिया था। स्थापित भारतीय कानूनी नियमों के अनुसार, जांच एजेंसी के पास अदालत के पटल पर अपनी अंतिम चार्जशीट या चालान प्रस्तुत करने के लिए कुल 60 दिनों का एक निश्चित समय होता है। यदि सीबीआई इस दी गई अवधि के भीतर अपनी जांच पूरी करके न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल करने में विफल रहती है, तो नियमतः आरोपी पक्ष स्वतः ही अपनी जमानत के लिए वैधानिक दावा करने का हकदार हो जाता है, यही कारण है कि सीबीआई इस समय बेहद तत्परता से काम कर रही है।
एम्स की पोस्टमार्टम रिपोर्ट और केस से जुड़े अन्य वैज्ञानिक साक्ष्य
चिकित्सीय साक्ष्यों और पोस्टमार्टम की स्थिति को लेकर भी अदालत के भीतर विस्तार से समीक्षा की गई। इस दौरान भोपाल अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) प्रबंधन ने माननीय न्यायालय को सूचित किया कि वे मृतका की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के साथ-साथ उससे संबंधित तमाम आवश्यक वैज्ञानिक दस्तावेज पूर्व में ही सीबीआई के आला अधिकारियों को सुपुर्द कर चुके हैं, इसलिए भोपाल एम्स की तरफ से अब कोई नई या अतिरिक्त रिपोर्ट जारी नहीं की जाएगी। वहीं दूसरी तरफ दिल्ली एम्स को भेजे गए विसरा और दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट के संदर्भ में केंद्रीय जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि वहां से अभी तक कोई नया अपडेट या अंतिम रिपोर्ट प्राप्त नहीं हो सकी है, जिसका वे बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
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