Barmer refinery launch

वैश्विक अशांति के बीच भारत की ऊर्जा कूटनीति का परचम, पीएम मोदी ने बाड़मेर में किया देश की अत्याधुनिक रिफाइनरी का ऐतिहासिक लोकार्पण

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एजेंसी, बाड़मेर। Barmer refinery launch : भारत के औद्योगिक इतिहास और ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में शनिवार का दिन एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजस्थान के सीमावर्ती जिले बाड़मेर के पचपदरा में नवनिर्मित और देश की सबसे आधुनिक रिफाइनरी सह पेट्रो रसायन परियोजना का भव्य लोकार्पण कर इसे राष्ट्र को समर्पित कर दिया है। इस ऐतिहासिक और गौरवमयी अवसर पर एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया में जारी गंभीर भू-राजनीतिक संकट और युद्ध के माहौल के बीच भारत की बेहद सफल, रणनीतिक और मजबूत ऊर्जा कूटनीति का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने गर्व के साथ कहा कि भारत ने वैश्विक स्तर पर उपजे अब तक के सबसे बड़े ईंधन संकट की चुनौती को अपनी दूरदर्शी नीतियों, आपूर्ति के विविधीकरण और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बने मजबूत कूटनीतिक संबंधों के बल पर पूरी तरह से परास्त कर दिया है, जिसका सबसे सुखद परिणाम यह रहा कि देश के आम नागरिकों पर इसका न्यूनतम वित्तीय बोझ पड़ा।

79,459 करोड़ रुपये की विशाल लागत से हुआ आधुनिक ऊर्जा केंद्र का निर्माण

बाड़मेर के पचपदरा में स्थापित की गई यह नई ग्रीनफील्ड रिफाइनरी भारत की तकनीकी प्रगति और आत्मनिर्भरता का एक अद्भुत प्रतीक है। इस विशाल रिफाइनरी सह पेट्रो रसायन परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए कुल 79,459 करोड़ रुपये की भारी-भरकम और ऐतिहासिक धनराशि का निवेश किया गया है। यह पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल अर्थात ग्रीनफील्ड रिफाइनरी है, जिसे एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड अर्थात एचआरआरएल द्वारा विकसित किया गया है। इस आधुनिक संयंत्र की विशाल कार्यक्षमता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह प्रति वर्ष 90 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल की रिफाइनिंग करने की सर्वोच्च क्षमता रखता है। इसके साथ ही इस परिसर में प्रति वर्ष 25 लाख मीट्रिक टन की क्षमता वाला एक विशाल पेट्रोरसायन संयंत्र भी स्थापित किया गया है, जो आने वाले समय में समूचे पश्चिमी राजस्थान को देश के एक बड़े औद्योगिक हब के रूप में तब्दील कर देगा।

वैश्विक हाहाकार के बीच सटीक आकलन और प्रभावी भारतीय रणनीति

अपने संबोधन के दौरान वैश्विक परिस्थितियों का विश्लेषण करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि वर्तमान समय में पश्चिमी एशिया के देशों में चल रहे भीषण युद्ध के कारण पूरी दुनिया के भीतर हाहाकार मचा हुआ है। इस विनाशकारी युद्ध ने 21वीं सदी के सबसे भयावह और गंभीर ऊर्जा संकट को जन्म दिया है, जिसके कारण दुनिया के कई बड़े और विकसित देश आज ईंधन की भारी किल्लत, कमी और आसमान छूती महंगाई से बुरी तरह से जूझ रहे हैं। परंतु ऐसी विपरीत और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी भारत सरकार ने हर स्तर पर समय रहते बिल्कुल सटीक और सही फैसले लिए। भारत ने संकट की शुरुआत में ही इसका सटीक आकलन करते हुए एक अत्यंत प्रभावी और दूरगामी रणनीति तैयार की। सरकार ने देश के भीतर मौजूद सीमित संसाधनों का बेहद संतुलित और कुशल प्रयोग सुनिश्चित किया तथा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की बढ़ती कूटनीतिक शक्ति का सकारात्मक इस्तेमाल किया, जिसके बूते भारत इस वैश्विक भंवर से सुरक्षित बाहर निकल सका।

25 से बढ़ाकर 40 से अधिक देशों से कच्चे तेल का विविधीकृत आयात

प्रधानमंत्री ने भारत की रणनीतिक सफलता का एक बेहद महत्वपूर्ण आंकड़ा साझा करते हुए बताया कि जब पश्चिम एशिया में संकट और युद्ध की शुरुआत हुई थी, तब भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए दुनिया के लगभग 25 से 26 देशों से कच्चे तेल का आयात कर रहा था। लेकिन सरकार ने संकट के समय किसी एक क्षेत्र या देश पर अपनी निर्भरता को जोखिम में न डालते हुए त्वरित कदम उठाए और तेल आयात करने वाले देशों की सूची को व्यापक रूप से बढ़ाते हुए इसे 40 से अधिक देशों तक पहुंचा दिया। आपूर्ति के इस बड़े विविधीकरण के कारण वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति बाधित होने के बावजूद भारत के भीतर कच्चे तेल की निरंतर और निर्बाध आवक सुनिश्चित बनी रही, जिससे देश की आर्थिक रफ्तार को कोई झटका नहीं लगा।

तेल कंपनियों को हुआ 75,000 करोड़ रुपये का घाटा, सरकार ने खुद उठाया बोझ

वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी उछाल के वित्तीय प्रभावों की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस अंतरराष्ट्रीय संकट के दौरान वैश्विक स्तर पर तेल के दाम आसमान पर पहुंच गए थे। इसके कारण देश की सार्वजनिक तेल कंपनियों को अप्रैल से जून के बीच केवल 3 महीनों की लघु अवधि में ही 75,000 करोड़ रुपये से अधिक का बहुत बड़ा वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा था। परंतु राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने वाली सरकार ने इस भारी-भरकम नुकसान और वित्तीय घाटे का तनिक भी बोझ देश की गरीब और मध्यम वर्गीय जनता पर स्थानांतरित नहीं होने दिया। आम जनता को इस वैश्विक महंगाई से सुरक्षित रखने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा लोक-कल्याणकारी निर्णय लेते हुए पेट्रोल और डीजल पर ली जाने वाली एक्साइज ड्यूटी अर्थात उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की एक बहुत बड़ी कटौती कर दी, ताकि नागरिकों की जेब पर अतिरिक्त भार न पड़े।

नागरिक देवो भव का मूल मंत्र और रिफाइनिंग क्षमता में विश्व में चौथा स्थान

प्रधानमंत्री ने बहुत ही कड़े शब्दों में इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान सरकार के लिए हमेशा राष्ट्रहित ही सर्वोपरि रहा है और “नागरिक देवो भव” हमारा सबसे बड़ा और पवित्र मूल मंत्र है। बाड़मेर की इस विशाल परियोजना के उद्घाटन के बाद भारत सरकार की मंशा देश के भीतर और भी कई नई आधुनिक रिफाइनरियों की स्थापना करने की है, ताकि देश को ऊर्जा के क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाया जा सके। पीएम मोदी ने वैश्विक आंकड़ों की तुलना करते हुए देश को गौरवान्वित करने वाली जानकारी दी कि भारत अब कच्चे तेल को साफ करने अर्थात रिफाइनिंग की क्षमता के मामले में पूरे विश्व का चौथा सबसे बड़ा महाशक्तिशाली देश बन चुका है। इसके विपरीत वैश्विक स्थिति यह है कि संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे बड़े देश में पिछले 50 वर्षों के भीतर एक भी नई तेल रिफाइनरी का निर्माण नहीं हुआ है और पूरे यूरोप महाद्वीप की रिफाइनिंग क्षमता में लगातार भारी गिरावट दर्ज की जा रही है, जबकि भारत इस क्षेत्र में नित नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।

विपक्ष के भ्रामक राजनीतिक खेल और जनविरोधी साजिशों पर तीखा प्रहार

लोकार्पण के मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के विपक्षी दलों और राष्ट्रविरोधी ताकतों पर भी जमकर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि देश के भीतर संकट के समय कुछ राजनीतिक दलों द्वारा ईंधन और तेल की कमी को लेकर आम जनता के बीच जानबूझकर भारी डर, भय और भ्रम फैलाने की पुरजोर कोशिशें की गईं। देश की प्रगति को रोकने और जनता को गुमराह करने के लिए कई प्रकार के गंदे राजनीतिक खेल खेले गए, परंतु देशविरोधी और दुर्भावनापूर्ण ताकतों के ये तमाम मंसूबे पूरी तरह से धराशायी हो गए और वे सफल नहीं हो पाए। सरकार की मजबूत वितरण प्रणाली के कारण देश के सुदूर और दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों में भी ईंधन की आपूर्ति में एक दिन के लिए भी कोई बड़ी बाधा या किल्लत उत्पन्न नहीं होने दी गई।

जोधपुर एयरपोर्ट के नए टर्मिनल का उद्घाटन और संशोधित उड़ान योजना

बाड़मेर में आयोजित इस ऐतिहासिक मुख्य कार्यक्रम से पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विमान द्वारा जोधपुर पहुंचे थे, जहां उन्होंने जोधपुर विमानक्षेत्र पर नवनिर्मित अत्याधुनिक टर्मिनल भवन का भव्य उद्घाटन भी किया। जोधपुर आगमन पर राजस्थान के माननीय राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े, केंद्रीय नागरिक उड्डयन व जलशक्ति मंत्री और जोधपुर के स्थानीय सांसद गजेंद्र सिंह शेखावत तथा प्रदेश के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने हवाई अड्डे पर प्रधानमंत्री का गर्मजोशी से आत्मीय स्वागत किया। इस अवसर पर पीएम मोदी ने देश के नागरिक उड्डयन क्षेत्र को एक नई दिशा देने वाली संशोधित उड़ान योजना का भी शुभारंभ किया। इस योजना के सुचारू संचालन के लिए अगले 10 वर्षों की लंबी अवधि हेतु 28,840 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट का ऐतिहासिक आवंटन किया गया है, जिसके माध्यम से देश के छोटे और टियर-2 तथा टियर-3 शहरों में हवाई संपर्क को अत्यधिक मजबूत करने के लिए विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर और विमानन बुनियादी ढांचे का बड़े पैमाने पर विकास किया जाएगा। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कई शहरों को इस विशेष हवाई कनेक्टिविटी नेटवर्क के लिए प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित किया गया है।

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