पीएम मोदी

इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर निर्माण में भारत की ऐतिहासिक छलांग, दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता और निर्यातक बना देश : पीएम मोदी

गुजरात देश/प्रदेश राष्ट्रीय

एजेंसी, साणंद। India 2nd largest mobile maker : भारत की औद्योगिक प्रगति और विनिर्माण क्षमता को वैश्विक पटल पर एक नई पहचान देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बेहद महत्वपूर्ण और गौरवमयी घोषणा की है। गुजरात के साणंद में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता (मैन्युफैक्चरर) और निर्यातक (एक्सपोर्टर) बन चुका है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में देश के भीतर लगातार हो रहे अभूतपूर्व विकास और निवेश के कारण भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (ग्लोबल सप्लाई चेन) में एक बेहद मजबूत, विश्वसनीय और अनिवार्य भागीदार के रूप में अपनी धाक जमा रहा है। यह बदलाव भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर है।

दो दशक पुराने सपने का साकार होना और शुरुआती दौर का संघर्ष

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साणंद के इस ऐतिहासिक मंच से अपने मुख्यमंत्री काल के दिनों को याद करते हुए एक बेहद भावुक और प्रेरक संस्मरण साझा किया। उन्होंने जनता से कहा कि आज का दिन उनके लिए अत्यधिक प्रसन्नता और परम संतोष का क्षण है, क्योंकि लगभग 20 से 22 वर्ष पहले, जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने राज्य में एक आधुनिक सेमीकंडक्टर प्लांट स्थापित करने की एक दूरदर्शी योजना बनाई थी। उस शुरुआती दौर को याद करते हुए उन्होंने बताया कि सरकार ने गांधीनगर और प्रांतिज के निकट लगभग 350 से 400 एकड़ की विशाल भूमि को इस परियोजना के लिए चिन्हित भी कर लिया था और दुनिया की कुछ बड़ी तकनीकी कंपनियों के साथ प्राथमिक दौर की बातचीत भी शुरू की गई थी।

अतीत का उपहास और वर्तमान की शानदार सफलता

अपने संबोधन को आगे बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री ने अतीत की राजनीतिक और प्रशासनिक उदासीनता पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि उस समय केंद्र की तत्कालीन भारत सरकार केवल बड़े-बड़े खोखले ऐलान कर रही थी, जिसके कारण कुछ वैश्विक कंपनियां आगे तो आईं लेकिन नीतिगत स्पष्टता के अभाव में वह महत्वाकांक्षी परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी। पीएम मोदी ने चुटकी लेते हुए कहा कि उस दौर में देश के भीतर शायद ही कोई सेमीकंडक्टर जैसी उन्नत तकनीक के बारे में जानता या बात करता था और जब उन्होंने इस विषय को उठाया, तो मुख्यधारा के मीडिया के कई लोगों और विश्लेषकों ने उनका जमकर मजाक उड़ाया था। परंतु आज जब वह दो दशक पुराना सपना धरातल पर पूरी तरह से सच साबित हो रहा है, तो उन्हें आत्मिक संतुष्टि मिल रही है। उन्होंने एक अन्य बड़ी सफलता का उल्लेख करते हुए बताया कि कुछ ही सप्ताह पहले भारत के वडोदरा शहर में निर्मित स्वदेशी सैन्य परिवहन विमान C295 ने भी अपनी पहली सफल उड़ान भरकर देश का मान बढ़ाया है।

संपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक्स वैल्यू चेन का निर्माण और विनिर्माण क्रांति का अगला चरण

प्रधानमंत्री ने देश की तकनीकी प्रगति के क्रमिक विकास को बहुत ही सरल शब्दों में रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत में वर्तमान समय में सेमीकंडक्टर उद्योग का जो व्यापक विस्तार दिखाई दे रहा है, वह असल में पिछले 10 वर्षों के भीतर देश में आई इलेक्ट्रॉनिक्स क्रांति का अगला और सबसे महत्वपूर्ण चरण है। भारत ने अपनी विनिर्माण यात्रा को एक व्यवस्थित गति दी है, जिसके तहत देश ने पहले अंतिम उत्पादों (फिनिश्ड प्रोडक्ट्स) का निर्माण सीखा, उसके बाद उनके जरूरी पुर्जों (कंपोनेंट्स) का भारत में ही निर्माण शुरू किया और अब देश सीधे सेमीकंडक्टर्स यानी चिप निर्माण के क्षेत्र में उतर चुका है। इस प्रकार भारत अब पूरी की पूरी इलेक्ट्रॉनिक्स वैल्यू चेन को अपने देश के भीतर ही विकसित करने में पूरी तरह सक्षम हो चुका है, जिसने भारत को दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन विनिर्माता और निर्यातक बना दिया है।

साइकिल युग से विमान निर्माण के आधुनिक युग में भारत का प्रवेश

देश की बदलती औद्योगिक तस्वीर और वैश्विक साख पर गर्व व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री ने एक ऐतिहासिक तुलना पेश की। उन्होंने कहा कि देश में एक समय ऐसा भी था जब भारत के किसी हिस्से में साइकिल बनाने वाली एक छोटी सी कंपनी के आने पर भी राष्ट्रीय स्तर पर जश्न मनाया जाता था और उसे एक बड़ी उपलब्धि माना जाता था। परंतु आज भारत की ताकत इतनी बढ़ चुकी है कि दुनिया की सबसे बड़ी हवाई जहाज बनाने वाली दिग्गज कंपनियां भारत की धरती पर अपने विनिर्माण संयंत्र स्थापित करने के लिए कतार में खड़ी हैं। उन्होंने वैश्विक औद्योगिक इतिहास का उदाहरण देते हुए साफ किया कि दुनिया की कोई भी महाशक्ति केवल किसी एक अकेली फैक्ट्री या कारखाने के दम पर खड़ी नहीं हुई है, बल्कि औद्योगिक मजबूती की असली और टिकाऊ नींव हमेशा औद्योगिक समूहों यानी क्लस्टर्स के निर्माण में निहित होती है।

साणंद बनेगा भारत की सिलिकॉन वैली, आकार ले रहा है देश का पहला सेमीकंडक्टर क्लस्टर

औद्योगिक क्लस्टर्स के वैश्विक महत्व को समझाते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने दुनिया के कई सफल उदाहरणों का जिक्र किया। उन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका की प्रसिद्ध सिलिकॉन वैली, ताइवान के ह्सिनचू साइंस पार्क और जापान के सिलिकॉन आइलैंड तथा त्सुकुबा साइंस सिटी जैसी वैश्विक महाशक्तियों का नाम लेते हुए कहा कि इन सभी ने दुनिया को क्लस्टर की असली ताकत दिखाई है। उन्होंने गर्व से घोषणा की कि गुजरात का साणंद भी अब तेजी से इसी वैश्विक दिशा में आगे बढ़ रहा है। आने वाले कुछ ही महीनों के भीतर माइक्रोन, केन्स और सीजी सेमी जैसी दुनिया की अग्रणी तकनीकी कंपनियां साणंद में अपना व्यावसायिक उत्पादन (प्रोडक्शन) पूरी तरह से शुरू कर देंगी। इसका सीधा और स्पष्ट अर्थ यह है कि भारत में एक बहुत ही शक्तिशाली सेमीकंडक्टर क्लस्टर पूरी तरह से आकार ले चुका है और आज साणंद की इसी पवित्र धरती पर एडवांस्ड चिप पैकेजिंग का काम पहले से ही सफलतापूर्वक किया जा रहा है, जो आने वाले समय में लाखों युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खोलेगा।

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