एजेंसी, तेहरान। Ali Khamenei funeral Iran : पश्चिम एशिया के सबसे शक्तिशाली देशों में से एक ईरान के इतिहास में एक अत्यंत दुखद और अभूतपूर्व अध्याय की शुरुआत हो चुकी है। संयुक्त राज्य अमेरिका और इजराइल के भीषण हवाई हमलों में अपनी जान गंवाने वाले ईरान के पूर्व सर्वोच्च धार्मिक और राजनीतिक नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के कई दिनों तक चलने वाले भव्य एवं ऐतिहासिक अंतिम संस्कार के कार्यक्रमों का शनिवार से आधिकारिक तौर पर आगाज हो गया है। गौरतलब है कि इस वर्ष की शुरुआत में अर्थात फरवरी 2026 में ईरान युद्ध के दौरान हुए एक अत्यंत विनाशकारी हवाई हमले में 86 वर्षीय शीर्ष नेता खामेनेई की मृत्यु हो गई थी, जिसके लगभग 4 महीनों के लंबे अंतराल के बाद अब उनकी पार्थिव देह को सुपुर्द-ए-खाक करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इस महा-आयोजन को देखने और देश के सबसे प्रभावशाली मार्गदर्शक को विदाई देने के लिए राजधानी की सड़कों पर जनसैलाब उमड़ पड़ा है।
Sea of grief in Tehran as farewell ceremony for the martyred Leader of the Islamic Revolution Imam Sayyed Ali Khamenei has commenced at Tehran’s Grand Imam Khomeini Mosalla, drawing vast crowds of mourners in a historic manifestation of national unity.
Beginning in the early… pic.twitter.com/fH8pxSkASi
— Al-Manar English (@manarenglish) July 4, 2026
ग्रैंड मोसल्ला में अंतिम दर्शन और शिया समुदाय की पारंपरिक विदाई
दिवंगत सर्वोच्च धार्मिक नेता के पार्थिव शरीर को आम जनता, स्थानीय नागरिकों और उनके कट्टर समर्थकों के अंतिम दर्शन के लिए ईरान की राजधानी तेहरान के सबसे प्रतिष्ठित केंद्र ‘ग्रैंड मोसल्ला’ में पूरे राजकीय सम्मान के साथ रखा गया है। इस ऐतिहासिक शोक सभा के कारण शनिवार की अलसुबह से ही तेहरान की तमाम मुख्य सड़कों और चौराहों पर वाहनों की आवाजाही को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है। संपूर्ण राजधानी में शोक की लहर है और काले वस्त्र पहने लाखों शोकाकुल नागरिक बेहद गमगीन माहौल में पैदल ही ग्रैंड मोसल्ला परिसर की ओर बढ़ते हुए दिखाई दे रहे हैं। पूरे तेहरान शहर को खामेनेई की आदमकद तस्वीरों, बड़े-बड़े होर्डिंग्स और काले बैनरों से पाट दिया गया है। सड़कों पर जमा पुरुषों का विशाल हुजूम शिया मुस्लिम समुदाय की सदियों पुरानी पारंपरिक विदाई के नियमों का पालन करते हुए एक विशेष लयबद्ध तरीके से अपनी छाती पीटकर गहरा दुख प्रकट कर रहा है।
1989 के ऐतिहासिक घटनाक्रम की पुनरावृत्ति और समर्थकों की भावुकता
इस ऐतिहासिक विदाई समारोह में शामिल होने के लिए देश-विदेश से लोग पहुंचे हैं, जहां भावुकता का माहौल अपने चरम पर है। अंतिम संस्कार के इस महा-संगम में सम्मिलित होने आई 27 वर्षीय युवा महिला हनानेह मौसवी ने रोते हुए अपने दिल के उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि वह अपने परम पूजनीय नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को अंतिम विदाई देने के लिए यहां पहुंची हैं। उन्होंने कभी स्वप्न में भी नहीं सोचा था कि उनके जीवन में ऐसा भयावह दिन आएगा और इस राष्ट्रीय त्रासदी को देखने से पहले काश उन्हें मृत्यु आ गई होती। इस बीच ग्रैंड मोसल्ला के भीतर अंतिम दर्शन के लिए ठीक वैसा ही एक विशाल और खुला हुआ मंच तैयार किया गया है, जहां से अयातुल्ला खामेनेई कभी तेहरान के मध्य में स्थित अपने प्रसिद्ध परिसर ‘हुसैनिया’ से पूरे देश और दुनिया को संबोधित किया करते थे। ज्ञात हो कि यह हुसैनिया परिसर 28 फरवरी 2026 को इजराइली हवाई हमले में पूरी तरह से जमींदोज हो गया था, जिसमें खामेनेई के साथ-साथ उनके परिवार के कुछ सदस्य और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स अर्थात आईआरजीसी के कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी भी मारे गए थे। ईरान प्रशासन का यह अनुमान है कि इस अंतिम यात्रा के दौरान देश की सड़कों पर 2 करोड़ से अधिक लोग उतरेंगे, जो वर्ष 1989 में तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्ला रूहुल्ला खुमैनी के देहावसान के समय देखे गए ऐतिहासिक दृश्यों की याद दिलाता है।
वैश्विक कूटनीति का केंद्र बना तेहरान और होर्मुज जलडमरूमध्य का रणनीतिक महत्व
अयातुल्ला अली खामेनेई की इस अंतिम विदाई ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मंच पर भी भारी हलचल पैदा कर दी है, क्योंकि इस महा-आयोजन में दुनिया के 45 से अधिक देशों के 100 से भी ज्यादा उच्च स्तरीय राजनयिकों और प्रतिनिधियों ने शिरकत की है। इस वैश्विक भागीदारी में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति इमोमाली रहमान, आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पशिनयान, जॉर्जिया के राष्ट्रपति मिखाइल कावेलाश्विली, तुर्किये के उपराष्ट्रपति जेवदेत यिल्माज और चीन के नेशनल पीपुल्स कांग्रेस के वाइस प्रेसीडेंट हे वेई शामिल हैं। वहीं रूस की ओर से सुरक्षा परिषद के डिप्टी चेयरमैन दिमित्री मेदवेदेव, अफगानिस्तान के तालिबान विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी व उप प्रधानमंत्री अब्दुल गनी बरादर तथा बांग्लादेश के स्पीकर हाफिज उद्दिन अहमद भी तेहरान पहुंचे हैं। भारत की तरफ से बिहार के माननीय राज्यपाल सैयद अता हसनैन और उप विदेश मंत्री पबित्रा मार्गरिटा ने इस कार्यक्रम में देश का प्रतिनिधित्व किया है। इतने बड़े पैमाने पर वैश्विक समुदाय का एकत्रित होना ईरान सरकार के मनोबल को ऐसे नाजुक समय में बहुत ऊंचा कर रहा है, जब वह इस भीषण युद्ध को हमेशा के लिए समाप्त करने के उद्देश्य से अमेरिका के साथ कूटनीतिक मेज पर वार्ता कर रही है। इस त्रिकोणीय बातचीत में ईरान की सरकार फारस की खाड़ी में स्थित रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपने पूर्ण नियंत्रण का लाभ उठाने का पुरजोर प्रयास कर रही है।
अमेरिका की स्थापना की 250वीं वर्षगांठ पर तीखे नारे और डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी चेतावनी
ईरान की सरकार ने इस विशाल और बहु-दिवसीय विदाई कार्यक्रम की शुरुआत के लिए जानबूझकर 4 जुलाई का ऐतिहासिक दिन निर्धारित किया है, जो कि संयुक्त राज्य अमेरिका का आधिकारिक स्थापना दिवस भी है और इस वर्ष अमेरिका अपनी आजादी की 250वीं वर्षगांठ मना रहा है। यद्यपि ईरान के शीर्ष सरकारी अधिकारियों ने इस तिथि के चयन पर कोई सीधा बयान नहीं दिया है, परंतु तेहरान की सड़कों पर उमड़े करोड़ों लोगों के जनसैलाब ने गगनभेदी आवाजों में “अमेरिका मुर्दाबाद” और “खून का बदला खून से” के तीखे नारे लगाए। यह आक्रोशपूर्ण नारेबाजी वर्ष 1979 की प्रसिद्ध इस्लामी क्रांति और अमेरिकी दूतावास के ऐतिहासिक बंधक संकट के बाद से ही ईरान की राजनीतिक संस्कृति का एक अभिन्न हिस्सा रही है। दूसरी ओर इस पूरे घटनाक्रम पर अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साउथ डकोटा राज्य में स्थित माउंट रशमोर के सामने आयोजित एक भव्य समारोह के दौरान ईरान को लेकर एक बेहद सख्त और तीखी चेतावनी जारी की है। राष्ट्रपति ट्रंप ने वैश्विक मीडिया के समक्ष स्पष्ट रूप से कहा कि अमेरिकी सेना ने सैन्य हमलों के माध्यम से ईरान के पूरे तंत्र को बहुत गहरा नुकसान पहुंचाया है, जिसके कारण अब वे किसी भी कीमत पर समझौता करने के लिए पूरी तरह से छटपटा रहे हैं और अमेरिका ने केवल मानवीय आधार पर इस अंतिम संस्कार को शांतिपूर्वक संपन्न करने के लिए उन्हें 1 सप्ताह की विशेष मोहलत प्रदान की है।
नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई की रहस्यमयी अनुपस्थिति और हमले की आशंका
ईरान के भीतर मचे इस भारी राजनीतिक उथल-पुथल के बीच देश के नवनियुक्त सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई की रहस्यमयी स्थिति को लेकर भी कई प्रकार के कयास लगाए जा रहे हैं। मोजतबा खामेनेई 28 फरवरी 2026 को हुए उस घातक हमले के बाद से एक बार भी सार्वजनिक रूप से किसी के सामने नहीं आए हैं, क्योंकि उस हमले में उन्हें भी अत्यंत गंभीर और जानलेवा चोटें आई थीं। इतिहास के पन्नों को पलटें तो उनके दिवंगत पिता अयातुल्ला अली खामेनेई वर्ष 1989 में अपने गुरु रुहोल्ला खोमैनी के जनाजे में शामिल होकर फूट-फूटकर रोए थे और उसके बाद उन्होंने दशकों तक बेहद सख्त मिजाज के साथ ईरान का सफल नेतृत्व किया था, जिसके कारण वे हमेशा पश्चिमी देशों की आंखों की किरकिरी बने रहे। वर्तमान में ईरान के रक्षा मंत्री जनरल सैयद माजिद इब्न-ए-रजा और विदेश मंत्री अब्बास अराघची दोनों ने ही यह गंभीर आशंका व्यक्त की है कि इस विशाल जनसमूह पर इजराइल दोबारा से कोई घातक हवाई हमला कर सकता है। अमेरिका की दक्षिणपंथी राजनीतिक कार्यकर्ता लॉरा लूमर ने भी डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू को यह खुला मशविरा दिया है कि ईरान को पूरी तरह से घुटनों पर लाने का इससे बेहतर समय कोई और नहीं हो सकता। हालांकि इन धमकियों के बीच ईरान की संयुक्त सैन्य कमान ने एक कड़ा जवाबी अल्टीमेटम जारी करते हुए अमेरिका और इजराइल को चेतावनी दी है कि यदि इस शोक की घड़ी में कोई भी गलत कदम उठाया गया, तो उसका अंत्यंत भीषण और विनाशकारी परिणाम भुगतना होगा।
नौ दिनों का विस्तृत कार्यक्रम और इराक के पवित्र शहरों की यात्रा का कारण
अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के इस महा-आयोजन को बेहद सुव्यवस्थित तरीके से कुल 9 दिनों के एक विस्तृत और व्यापक कार्यक्रम में विभाजित किया गया है, जिसकी शुरुआत 3 जुलाई 2026 से तेहरान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय श्रद्धांजलि सभा से हुई थी। निर्धारित समय सारिणी के अनुसार 4 और 5 जुलाई को राजधानी के भव्य ग्रैंड मोसल्ला में सामूहिक जनाजे की विशेष नमाज और विशाल शोक सभाओं का आयोजन अनवरत रूप से चलता रहेगा। इसके पश्चात 6 जुलाई को तेहरान की मुख्य सड़कों पर और 7 जुलाई को शिया समुदाय के पवित्र शहर कुम में एक विशाल अंतिम यात्रा निकाली जाएगी। एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक निर्णय के अंतर्गत 8 जुलाई को दिवंगत सर्वोच्च नेता के पार्थिव शरीर को हवाई मार्ग से पड़ोसी देश इराक के दो सबसे पावन और ऐतिहासिक शिया केंद्रों अर्थात नजफ और कर्बला ले जाया जाएगा, जहां सुबह के समय नजफ की गलियों में और शाम को कर्बला की पवित्र भूमि पर अंतिम विदाई यात्रा का आयोजन होगा। इराक के कबायली सरदारों, प्रमुख धर्मगुरुओं और शीर्ष राजनीतिक हस्तियों के विशेष आग्रह पर ही शव को इराक ले जाने का यह अभूतपूर्व फैसला लिया गया है, जिसके माध्यम से ईरान संपूर्ण पश्चिम एशिया के इस्लामिक देशों पर अपने गहरे धार्मिक और सांस्कृतिक प्रभाव का लोहा मनवाना चाहता है। अंततः सभी धार्मिक रीति-रिवाजों को पूरा करने के बाद 9 जुलाई 2026 को ईरान के मशहद शहर में स्थित इमाम रजा के विश्व प्रसिद्ध पवित्र रौजे के भीतर उनके पार्थिव शरीर को हमेशा के लिए दफन कर दिया जाएगा।
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