एजेंसी, नई दिल्ली/इस्लामाबाद। India Pakistan 117 Leaders Letter : भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से जारी तनावपूर्ण संबंधों के बीच दोनों देशों की 117 प्रमुख हस्तियों ने एक संयुक्त पहल करते हुए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को पत्र भेजा है। इस पत्र में दोनों देशों से टकराव की बजाय बातचीत और संपर्क बहाल करने का रास्ता अपनाने की अपील की गई है। हस्तियों का कहना है कि दक्षिण एशिया में स्थिरता, आर्थिक प्रगति और आम लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए संवाद प्रक्रिया दोबारा शुरू की जानी चाहिए। पत्र पर भारत की 61 और पाकिस्तान की 56 प्रमुख हस्तियों के हस्ताक्षर बताए गए हैं। इनमें पूर्व प्रशासनिक अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता, राजनीतिक हस्तियां और सार्वजनिक जीवन से जुड़े कई नाम शामिल हैं।
Pakistanis, Indians figures write joint letter seeking restoration of ties. pic.twitter.com/4N6hXBjQOy
— Sidhant Sibal (@sidhant) July 1, 2026
पत्र में संवाद और संबंध बहाली पर दिया गया जोर
पत्र के जरिए दोनों देशों के नेतृत्व से आग्रह किया गया है कि वर्तमान तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक और राजनीतिक स्तर पर बातचीत की शुरुआत की जाए। पहल से जुड़े लोगों का मानना है कि लंबे समय तक बने रहने वाले तनाव का असर केवल सरकारों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव व्यापार, शिक्षा, सामाजिक संपर्क और क्षेत्रीय विकास पर भी पड़ता है। पत्र में यह भी कहा गया कि संवाद किसी भी जटिल मुद्दे का स्थायी समाधान तलाशने का सबसे प्रभावी माध्यम माना जाता है और दक्षिण एशिया जैसे क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए बातचीत का वातावरण जरूरी है।
भारत और पाकिस्तान की कई प्रमुख हस्तियां हुईं शामिल
इस पहल में दोनों देशों की सार्वजनिक और राजनीतिक हस्तियों ने भाग लिया। भारत की ओर से जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला, पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और राज्यसभा सदस्य मनोज झा सहित कई लोगों ने समर्थन दिया। पाकिस्तान की ओर से पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी समेत कई प्रमुख नाम इस पत्र का हिस्सा बताए गए हैं।
इस पहल को सीमापार संवाद और नागरिक स्तर पर संबंधों को लेकर एक प्रतीकात्मक प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
क्यों उठी संवाद बहाली की मांग
पत्र ऐसे समय सामने आया है जब हाल के वर्षों में भारत और पाकिस्तान के संबंध कई कारणों से प्रभावित रहे हैं। दोनों देशों के बीच राजनीतिक संपर्क सीमित रहे हैं और कई क्षेत्रों में सहयोग की प्रक्रिया धीमी हुई है। पत्र लिखने वालों का मानना है कि लगातार बढ़ते तनाव का असर क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों, सामाजिक संपर्क और भविष्य की संभावनाओं पर पड़ सकता है। इसी कारण उन्होंने रिश्तों को सामान्य बनाने की दिशा में पहल करने की अपील की।
11 प्रमुख मुद्दों पर दोबारा पहल का सुझाव
पत्र में दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाने के लिए कई क्षेत्रों में पहल का सुझाव दिया गया है। इनमें द्विपक्षीय वार्ता दोबारा शुरू करना, जम्मू-कश्मीर समेत विभिन्न मुद्दों पर बातचीत, सीमा क्षेत्रों में तनाव कम करना और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाना शामिल बताया गया। इसके अलावा सांस्कृतिक और शैक्षणिक सहयोग को मजबूत करने, खेल गतिविधियों को दोबारा शुरू करने, हवाई सेवाएं बहाल करने और वीजा प्रक्रिया को सरल बनाने जैसे सुझाव भी रखे गए।
खेल, संस्कृति और नागरिक संपर्क को फिर सक्रिय करने की मांग
पत्र में कहा गया कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से खेल, सांस्कृतिक कार्यक्रम और नागरिक स्तर के संपर्क सीमित हो गए हैं। इस कारण नई पीढ़ी के बीच संवाद और समझ के अवसर भी प्रभावित हुए हैं। इसमें द्विपक्षीय खेल प्रतियोगिताओं, शैक्षणिक सहयोग और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को बढ़ावा देने का सुझाव दिया गया ताकि समाजों के बीच जुड़ाव मजबूत हो सके।
परिवहन, कूटनीतिक प्रतिनिधित्व और व्यापार पर भी सुझाव
पत्र में दोनों देशों के बीच हवाई सेवाओं को फिर शुरू करने, वीजा प्रणाली को आसान बनाने और राजनयिक स्तर पर पूर्ण प्रतिनिधित्व बहाल करने की बात कही गई। इसके साथ ही बस सेवाएं, सीमाई संपर्क और धार्मिक यात्राओं से जुड़े मार्गों को सामान्य बनाने का सुझाव भी शामिल रहा। व्यापारिक गतिविधियों को फिर से सक्रिय करने की भी मांग की गई, ताकि दोनों देशों के कारोबारी और आर्थिक संबंधों को नई गति मिल सके।
भाजपा की प्रतिक्रिया: सुरक्षा और आतंकवाद को बताया प्राथमिक मुद्दा
इस पहल पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई। जम्मू-कश्मीर भाजपा के नेता रविंदर रैना ने कहा कि भारत हमेशा अपने पड़ोसी देशों के साथ बेहतर संबंध चाहता है, लेकिन सुरक्षा और आतंकवाद जैसे मुद्दों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने पूर्व के घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने पहले भी संबंध सुधारने के प्रयास किए हैं, लेकिन भविष्य में किसी भी पहल के लिए विश्वास और सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को महत्वपूर्ण माना जाएगा।
संबंध सुधार पर बहस फिर चर्चा में
यह पहल ऐसे समय आई है जब दोनों देशों के बीच आधिकारिक संवाद सीमित है और कई पुराने संपर्क माध्यम प्रभावित हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की नागरिक पहलें राजनीतिक निर्णयों का विकल्प नहीं होतीं, लेकिन वे सार्वजनिक विमर्श और संबंधों के भविष्य को लेकर चर्चा को नया आयाम दे सकती हैं। आने वाले समय में यह देखना होगा कि इस अपील पर दोनों देशों की ओर से किसी प्रकार की औपचारिक प्रतिक्रिया सामने आती है या नहीं।
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