एजेंसी, मुंबई। Maharashtra Politics : महाराष्ट्र के सियासी गलियारों से इस वक्त की बेहद सनसनीखेज और बहुत बड़ी राजनैतिक खबर सामने आ रही है। राज्य के भीतर जारी भारी उठापटक के बीच उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट को एक बार फिर से बहुत बड़े विभाजन का सामना करना पड़ा है। शिवसेना (यूबीटी) के कुल नौ सांसदों में से छह सांसदों ने एक साथ बगावत करते हुए सोमवार को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली असली शिवसेना में शामिल होने का औपचारिक ऐलान कर दिया। राजधानी मुंबई में मुख्यमंत्री के आधिकारिक निवास ‘नंदनवन’ बंगले पर इन बागी सांसदों के साथ एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसके बाद आयोजित की गई संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में सभी सांसदों ने पाला बदलने की सार्वजनिक घोषणा की। इस बड़ी घटना को पिछले चार वर्षों के भीतर उद्धव ठाकरे के खेमे में हुई दूसरी सबसे बड़ी खूनी राजनैतिक टूट के रूप में देखा जा रहा है।
📍 #मुंबई |
शिवसेना उद्धव बाळासाहेब ठाकरे गटाच्या सहा विद्यमान खासदारांनी आज हाती भगवा झेंडा घेत #शिवसेना पक्षात प्रवेश केला. मुंबईतील यशवंतराव चव्हाण सेंटर येथे पार पडलेल्या या पक्षप्रवेश सोहळ्यात शिवसेनेने आता आता चौकार नव्हे तर षटकार मारला असल्याचे मत व्यक्त केले.
या… pic.twitter.com/418DtvTLUF
— Eknath Shinde – एकनाथ शिंदे (@mieknathshinde) June 22, 2026
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का तंज- अब तो छक्का लग चुका है
इस ऐतिहासिक राजनैतिक घटनाक्रम के बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे बेहद गदगद नजर आए और उन्होंने उद्धव ठाकरे पर कड़ा तंज कसा। मुख्यमंत्री शिंदे ने अपनी बात रखते हुए कहा कि जब साल 2022 में उन्होंने बाल ठाकरे के विचारों, मूल पार्टी और उसके ऐतिहासिक चुनाव चिह्न ‘धनुष-बाण’ की रक्षा करने के लिए पहला विद्रोह किया था, तब उनके साथ केवल 40 विधायक खड़े थे, लेकिन आज तो सीधे तौर पर राजनैतिक छक्का लग चुका है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी यह पूरी लड़ाई वजूद को बचाने और बालासाहेब के पवित्र विचारों को जीवित रखने के लिए है, यही कारण है कि आज ये सभी छह माननीय सांसद पूरी निष्ठा के साथ असली शिवसेना परिवार में वापस शामिल हो गए हैं। इस दलबदल के बाद अब संसद के निचले सदन यानी लोकसभा में शिंदे गुट के कुल सांसदों की संख्या सात से बढ़कर सीधे तेरह पर पहुंच गई है, जबकि उद्धव ठाकरे के पास अब सिर्फ तीन सांसद ही शेष बचे हैं।
आदित्य ठाकरे का तीखा पलटवार- रातोंरात बिक गई इन गद्दारों की वफादारी
पार्टी के भीतर लगी इस बहुत बड़ी सेंधमारी और आंतरिक बगावत के तुरंत बाद उद्धव ठाकरे के बेटे और पूर्व मंत्री आदित्य ठाकरे ने सोशल मीडिया माध्यम ‘एक्स’ पर बेहद आक्रामक और तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। आदित्य ठाकरे ने बागी होकर जाने वाले सभी सांसदों पर सीधा हमला बोलते हुए लिखा कि पार्टी के साथ गद्दारी करके छोड़ने वाले इन पूर्व सांसदों ने आज यह पूरी तरह से साबित कर दिया है कि उनकी वफादारी और जमीर पूरी तरह से बिकाऊ है। उन्होंने बेहद गुस्से में आगे लिखा कि कम से कम इन लोगों को अब समाज के सामने बिना किसी लोक-लाज और शर्म के यह सच स्वीकार कर लेना चाहिए कि केवल सत्ता के बड़े लालच और स्वार्थ के वशीभूत होकर ही उन्होंने रातोंरात अपनी पुरानी पार्टी और विचारधारा को इस तरह पीठ दिखाकर छोड़ दिया।
संजय राउत की चेतावनी- छह गद्दार पैदा किए गए, अब होगी बड़ी सर्जरी
इस बड़े राजनैतिक संकट के बीच उद्धव ठाकरे ने आनन-फानन में मुंबई के भीतर अपने वफादार विधायकों और विधान परिषद के सदस्यों (एमएलसी) की एक बहुत ही आपातकालीन बैठक बुलाई, जिसमें मौजूदा संकट से निपटने की रणनीति पर गहन विचार-विमर्श किया गया। हालांकि, इस महत्वपूर्ण बैठक से भी उद्धव गुट के चार प्रमुख विधायक निजी कारणों का हवाला देते हुए नदारद रहे, जिससे उनके भी पाला बदलने की अटकलें तेज हो गई हैं। बैठक समाप्त होने के बाद पार्टी के बेहद कद्दावर नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री शिंदे पर तीखा हमला बोला। संजय राउत ने तल्ख लहजे में कहा कि सत्ता के बल पर छह नए गद्दार पैदा किए गए हैं और अब इस बिगड़ते हालात को पूरी तरह से काबू में करने के लिए पार्टी के भीतर एक बहुत बड़ी और कड़ी सर्जरी करनी ही पड़ेगी। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि उद्धव ठाकरे आगामी 27 जून से पूरे महाराष्ट्र में एक बड़ा जनसंपर्क अभियान शुरू करने जा रहे हैं, जिसके तहत वे इन सभी बागी सांसदों के निर्वाचन क्षेत्रों में जाकर जनता के बीच उनकी पोल खोलेंगे।
निर्वाचन क्षेत्र के विकास और धन की भारी कमी बनी बगावत की मुख्य वजह
पार्टी से बगावत करने वाले प्रमुख सांसदों में संजय देशमुख, नागेश पाटिल अष्टीकर, संजय जाधव, भाऊसाहेब वाकचौरे, संजय दीना पाटिल और ओमप्रकाश राजे निंबालकर शामिल हैं। ये सभी सांसद पिछले दिनों बुलाई गई संसदीय दल की बैठक से भी गायब रहे थे। बागी सांसदों में से नागेश पाटिल आष्टीकर और ओमप्रकाश राजे निंबालकर ने पहले ही पाला बदलने की खबरों की पुष्टि कर दी थी। उन्होंने अपने इस बेहद बड़े और कठिन फैसले के पीछे की असली वजह का खुलासा करते हुए सोशल मीडिया पर साफ कहा कि वे अपने सर्वोच्च नेता उद्धव ठाकरे से व्यक्तिगत तौर पर बिल्कुल भी नाराज या खफा नहीं हैं, परंतु उनके इस कदम के पीछे की मुख्य वजह उनके अपने संसदीय क्षेत्र के विकास कार्यों के लिए मिलने वाले सरकारी फंड की भारी और लगातार हो रही कमी है। फंड न मिलने के कारण वे जनता के काम नहीं करवा पा रहे थे, इसलिए क्षेत्र के विकास के लिए उन्हें यह बड़ा फैसला लेना पड़ा।
दल-बदल कानून से मिल सकती है बड़ी राहत, विलय की प्रक्रिया भी होगी जरूरी
भारतीय संविधान के कड़े दलबदल विरोधी कानून के तहत यदि किसी राजनैतिक दल के भीतर कोई बड़ी टूट होती है, तो संसद की सदस्यता रद्द होने या अयोग्यता से बचने के लिए कम से कम दो-तिहाई सांसदों का एक साथ अलग होना अनिवार्य माना जाता है। चूंकि लोकसभा में उद्धव गुट के कुल नौ सांसद निर्वाचित हुए थे, इसलिए कानूनी नियम के अनुसार छह सांसदों का एक साथ अलग होना दो-तिहाई के आंकड़े को पूरी तरह पार कर जाता है। इसी कानूनी बारीकी के कारण इन छह बागी सांसदों को संसद के भीतर अयोग्य ठहराए जाने का कोई खतरा नहीं रहेगा और वे खुद को एक वैध और असली गुट बताने का पूरा दावा पेश कर सकते हैं। हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि केवल एक अलग गुट बना लेना ही काफी नहीं होगा, बल्कि भविष्य में अपनी वैधानिकता को और अधिक मजबूत करने के लिए इन सांसदों को किसी मान्यता प्राप्त राजनैतिक दल में अपने गुट के विलय की आधिकारिक प्रक्रिया को भी पूरा करना पड़ेगा।
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