Delhi Pollution Rules

दिल्ली में प्रदूषण पर लगाम के लिए सरकार का बड़ा फैसला : सर्दियों में बिना मानक वाले बाहरी व्यावसायिक वाहनों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध

देश/प्रदेश नई दिल्ली

एजेंसी, नई दिल्ली। Delhi Pollution Rules : देश की राजधानी दिल्ली में हर साल सर्दियों के मौसम में गहराने वाले जानलेवा धुंध और वायु प्रदूषण के संकट से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने इस बार समय से बहुत पहले ही अपनी कमर कस ली है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए बताया कि सरकार ने आगामी सर्दियों के महीनों में हवा की गुणवत्ता को बदतर होने से बचाने के लिए ‘प्रोएक्टिव विंटर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट फ्रेमवर्क’ (सर्दियों के लिए अग्रिम वायु गुणवत्ता प्रबंधन ढांचा) को आधिकारिक रूप से अधिसूचित कर दिया है। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह है कि दिल्ली के आम नागरिकों, बड़े उद्योगों, व्यापारियों और अन्य संबंधित पक्षों को प्रदूषण नियंत्रण के कड़े नियमों को समझने और अपनी तैयारियां पूरी करने के लिए पर्याप्त समय मिल सके, जिससे ऐन वक्त पर किसी भी प्रकार की अफरा-तफरी या जनजीवन में बड़ी बाधा न पैदा हो।

प्रदूषण का स्तर बढ़ने से पहले ही अग्रिम रणनीति के तहत लागू होंगे कड़े नियम

मुख्यमंत्री ने सामाजिक डिजिटल मंच पर इस नई नीति की विस्तृत रूपरेखा साझा करते हुए स्पष्ट किया कि यह विशेष ढांचा सर्दियों में प्रदूषण को रोकने के लिए एक बेहद आधुनिक और अग्रिम सुरक्षा रणनीति के तहत तैयार किया गया है। इसका असली मकसद प्रदूषण का ग्राफ खतरनाक स्तर पर पहुँचने से पहले ही सभी जरूरी निवारक उपायों को जमीन पर लागू करना है, ताकि दिल्लीवासियों को सांस लेने में होने वाली दिक्कतों और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर परेशानियों से पहले ही सुरक्षित किया जा सके। मुख्यमंत्री ने आगे जानकारी दी कि यह नया फ्रेमवर्क हर साल 1 नवंबर से लेकर 28 फरवरी तक पूरे राजधानी क्षेत्र में लागू रहने वाले ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (जीआरएपी) के नियमों के साथ पूरी तरह तालमेल बिठाकर समानांतर रूप से काम करेगा।

वैध प्रदूषण प्रमाण पत्र के बिना पेट्रोल पंपों पर नहीं मिलेगा ईंधन

इस नए पर्यावरण सुरक्षा ढांचे के तहत सरकार ने वाहनों से होने वाले धुएं को नियंत्रित करने के लिए एक बेहद सख्त कदम उठाया है। नए नियमों के मुताबिक, अब दिल्ली के भीतर किसी भी पेट्रोल पंप पर गाड़ी में पेट्रोल या डीजल भरवाने के लिए वैध पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट (पीयूसीसी) यानी प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र का होना पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है। जिन वाहन स्वामियों के पास अपनी गाड़ी का वैध प्रदूषण प्रमाण पत्र नहीं होगा, उन्हें ईंधन देने से साफ मना कर दिया जाएगा। सरकार का पूरा विश्वास है कि इस अभूतपूर्व कदम से सड़कों पर जहरीला धुआं उड़ाने वाले और बिना जांच के चल रहे वाहनों की पहचान करना और उन पर कानूनी नकेल कसना बेहद आसान हो जाएगा।

गैर-बीएस 6 व्यावसायिक वाहनों की दिल्ली सीमा में एंट्री पर पूरी तरह रोक

राजधानी को बाहरी प्रदूषण से बचाने के लिए सरकार ने 1 नवंबर से लेकर 31 जनवरी तक की अवधि के लिए एक बड़ा प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव के तहत दिल्ली राज्य की सीमाओं के बाहर पंजीकृत यानी अन्य राज्यों के उन तमाम व्यावसायिक (कमर्शियल) वाहनों के दिल्ली में प्रवेश करने पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी जाएगी जो ‘बीएस 6’ (BS-VI) मानकों को पूरा नहीं करते हैं। हालांकि, आम जनता की जरूरतों और आपातकालीन स्थितियों को ध्यान में रखते हुए सीएनजी (तरलीकृत गैस) और पूरी तरह से बिजली से चलने वाले (इलेक्ट्रिक) वाहनों को इस प्रतिबंध के दायरे से बाहर रखा गया है। इसके साथ ही आवश्यक आपातकालीन सेवाओं, एम्बुलेंस और सरकारी कार्यों में शामिल गाड़ियों को भी इस प्रवेश बंदी से पूरी तरह छूट दी जाएगी।

निजी वाहनों को हतोत्साहित करने के लिए पार्किंग का किराया होगा दोगुना

सड़कों पर गाड़ियों की भीड़ और उनसे निकलने वाले धुएं को कम करने के लिए सरकार ने लोगों को निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन जैसे मेट्रो और बसों का इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित करने की योजना बनाई है। इसके तहत आगामी 1 नवंबर से 28 फरवरी तक दिल्ली के सभी अधिकृत और सरकारी पार्किंग स्थलों पर पार्किंग शुल्क को सीधे दोगुना (टू-टाइम्स) कर दिया जाएगा। इसके अलावा, यदि हवा की स्थिति ज्यादा बिगड़ती है, तो दिल्ली के सभी सरकारी और निजी दफ्तरों व कार्यालयों के कामकाजी समय (ऑफिस टाइमिंग्स) में बदलाव किया जा सकता है। साथ ही कंपनियों को अपने कर्मचारियों के लिए 50 प्रतिशत तक ‘वर्क फ्रॉम होम’ यानी घर से काम करने की भौतिक उपस्थिति संबंधी व्यवस्था लागू करने के निर्देश भी दिए जा सकते हैं।

निर्माण कार्यों पर रखी जाएगी तीसरी आंख से नजर, उड़ने वाली धूल पर सख्ती

सर्दियों के दौरान उड़ने वाली धूल को रोकने के लिए 1 नवंबर से 31 जनवरी के बीच दिल्ली के सभी छोटे-बड़े निर्माण और तोड़-फोड़ (विध्वंस) वाले स्थलों पर धूल नियंत्रण के कड़े मानकों का पालन करना कानूनी रूप से अनिवार्य होगा। सरकार ने साफ किया है कि यदि प्रदूषण का सूचकांक गंभीर श्रेणी में जाता है, तो 10 दिसंबर से 20 जनवरी के बीच सभी प्रकार की निर्माण गतिविधियों पर पूरी तरह से अतिरिक्त रोक लगाई जा सकती है। इसके अलावा, राजधानी की सभी बड़ी निर्माण परियोजनाओं और गगनचुंबी इमारतों के परिसरों में एंटी-स्मॉग गन (धुंध हटाने वाली मशीन) और पानी की बौछार करने वाले मिस्ट-सप्रेशन सिस्टम को लगाना पूरी तरह से अनिवार्य होगा ताकि हवा में धूल के कण न तैर सकें।

खुले में कूड़ा और कचरा जलाने वालों पर ड्रोन कैमरों से रखी जाएगी निगरानी

ठंड के दिनों में अक्सर कड़ाके की सर्दी से बचने या लापरवाही के कारण खुले में भारी मात्रा में सूखा कचरा, प्लास्टिक और अन्य सामग्रियां जलाई जाती हैं, जो हवा को जहरीला बना देती हैं। इस बार सरकार ऐसी अवैध घटनाओं को पूरी तरह रोकने के लिए अपनी आंतरिक निगरानी व्यवस्था को आधुनिक तकनीकों से लैस कर रही है। इसके तहत दिल्ली के संवेदनशील इलाकों में ड्रोन कैमरों के जरिए आसमान से निगरानी (ड्रोन सर्विलांस) की जाएगी और फील्ड में तैनात विशेष टीमें अचानक औचक निरीक्षण करेंगी। नियमों का उल्लंघन कर खुले में आग लगाने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।

जानिए आखिर ठंड का मौसम आते ही क्यों हांफने लगती है देश की राजधानी

वैज्ञानिकों और पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, दिल्ली की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यहां अक्टूबर से फरवरी के बीच मौसम बदलने के कारण वायु गुणवत्ता अक्सर ‘बहुत खराब’ या ‘गंभीर’ श्रेणी में चली जाती है। सर्दियों के दिनों में ‘थर्मल इन्वर्जन’ (तापमान का उलटना) की वैज्ञानिक प्रक्रिया के कारण भारी हवा जमीन के करीब बैठ जाती है। इसके साथ ही पड़ोसी राज्यों में बड़े पैमाने पर धान की पराली जलाया जाना और मैदानी इलाकों में हवा की रफ्तार का बेहद कम होना, प्रदूषण के कणों को दिल्ली के आसमान में एक जगह जमा कर देता है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि इस प्राकृतिक और मानव निर्मित संकट से केवल समय रहते और मिशन मोड में काम करके ही निपटा जा सकता है, और दिल्ली सरकार इसके लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

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