एजेंसी, एवियन। G7 Summit Hindi News : फ्रांस के एवियन शहर में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के पहले ही दिन भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और भारतीय नागरिकों के हितों की रक्षा से जुड़ा एक अत्यंत संवेदनशील और बड़ा मुद्दा वैश्विक मंच पर उठाया है। उन्होंने इस उच्च स्तरीय बैठक के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य में हुई हिंसक घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए वहां जान गंवाने वाले भारतीय नाविकों का मामला प्रमुखता से सामने रखा। भारत सरकार की ओर से इस वैश्विक मंच के जरिए अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों में कामकाज करने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी देशों को अपनी जिम्मेदारियों का अहसास कराया गया है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि समुद्री व्यापार से जुड़े लोगों के जीवन की रक्षा करना केवल किसी एक देश का नहीं, बल्कि पूरी वैश्विक बिरादरी का साझा कर्तव्य है।
Sharing my remarks during the meeting with President Trump.@POTUS @realDonaldTrump https://t.co/48Jqv6uka0
— Narendra Modi (@narendramodi) June 17, 2026
समुद्री सुरक्षा और व्यापारिक मार्गों पर मंडराता संकट
प्रधानमंत्री ने शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे रणनीतिक और महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में यदि किसी भी प्रकार की अशांति या अस्थिरता पैदा होती है, तो उसका नुकसान केवल उस क्षेत्र विशेष तक सीमित नहीं रहता। ऐसी घटनाओं का सीधा और नकारात्मक असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और वैश्विक व्यापार चक्र पर पड़ता है। जब भी इन व्यापारिक समुद्री मार्गों में रुकावट आती है, तो पूरी अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो जाती है, जिससे वैश्विक बाजारों में सामानों की किल्लत और कीमतों में उछाल जैसी बड़ी समस्याएं खड़ी हो जाती हैं। भारत के प्रधानमंत्री ने उन निर्दोष भारतीय नागरिकों को श्रद्धांजलि देते हुए उनके परिवारों के प्रति संवेदना जताई, जिन्होंने हाल ही में इस समुद्री क्षेत्र में हुए हमलों के दौरान अपनी जान गंवाई है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि दुनिया को अब और अधिक सतर्क होकर इस क्षेत्र में काम करने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाने होंगे।
वैश्विक मंच पर आपसी विश्वास की आवश्यकता और भारत का दृष्टिकोण
अपने महत्वपूर्ण संबोधन के दौरान भारतीय प्रधानमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने पर सबसे अधिक बल दिया। उन्होंने कहा कि आज की आधुनिक दुनिया तकनीकी और व्यापारिक रूप से एक-दूसरे से बहुत गहराई से जुड़ी हुई है, लेकिन किसी भी अंतरराष्ट्रीय गठबंधन या साझेदारी की वास्तविक सफलता केवल और केवल आपसी भरोसे की बुनियाद पर ही टिकी होती है। भारत के अनुसार, वर्तमान समय में दुनिया के सामने संसाधनों की कमी उतनी बड़ी समस्या नहीं है, जितना बड़ा संकट विभिन्न देशों के बीच पैदा हुआ आपसी अविश्वास और भरोसे की कमी है। भारत ने हमेशा से ही संपूर्ण विश्व को एक परिवार मानने वाली विचारधारा का समर्थन किया है, और इसी सिद्धांत के तहत देश एक ऐसी वैश्विक व्यवस्था की वकालत करता है जहाँ विकास समावेशी हो और सभी देशों को समान रूप से भागीदारी के अवसर मिलें। भारत का मानना है कि किसी भी वैश्विक साझेदारी की सार्थकता इस बात में देखी जानी चाहिए कि शक्तिशाली देश अन्य विकासशील देशों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने में कितना सहयोग प्रदान कर रहे हैं। इसी सोच के साथ भारत ने विकासशील देशों यानी ग्लोबल साउथ की उम्मीदों और आकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए अधिक सम्मानजनक और बराबरी के सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया है।
डेढ़ साल बाद अमेरिकी राष्ट्रपति और भारतीय प्रधानमंत्री की आमने-सामने बातचीत
इस जी7 सम्मेलन के दौरान भारतीय प्रधानमंत्री और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई मुलाकात ने दुनिया भर के नीति विश्लेषकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। दोनों बड़े नेताओं की यह मुलाकात लगभग 16 महीनों के लंबे अंतराल के बाद हुई है। सबसे पहले दोनों शीर्ष नेताओं ने सामूहिक तस्वीर खिंचवाने के सत्र के दौरान एक-दूसरे का गर्मजोशी से अभिवादन किया और इसके बाद मुख्य सत्र के दौरान भी उनके बीच अनौपचारिक बातचीत हुई। इस मुलाकात के बाद अब दोनों देशों के बीच होने वाली आधिकारिक द्विपक्षीय वार्ता पर दुनिया भर की नजरें टिकी हुई हैं। अमेरिकी मुख्यालय से प्राप्त संकेतों के अनुसार, इस आगामी बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध, निवेश को बढ़ावा देने, आयात-निर्यात शुल्क यानी टैरिफ से जुड़े विवादों को सुलझाने, रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने तथा क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े तमाम महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होने की पूरी संभावना है।
दुनिया के कई अन्य शक्तिशाली नेताओं के साथ भारत की महत्वपूर्ण वार्ताएं
इस सम्मेलन के इतर भारतीय प्रधानमंत्री की कूटनीतिक सक्रियता काफी अधिक देखी गई। उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात, जापान, दक्षिण कोरिया, मिस्र और केन्या जैसे प्रमुख देशों के राष्ट्राध्यक्षों और नेताओं के साथ अलग से विशेष बैठकें कीं। इन सभी द्विपक्षीय वार्ताओं का मुख्य एजेंडा आर्थिक मोर्चे पर आपसी सहयोग बढ़ाना, नए निवेश के रास्ते तलाशना, द्विपक्षीय व्यापार को गति देना और रक्षा व रणनीतिक संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाना था। संयुक्त अरब अमीरात के शीर्ष नेता के साथ हुई बातचीत में दोनों देशों के बीच लगातार मजबूत हो रहे ऐतिहासिक संबंधों पर गहरा संतोष व्यक्त किया गया। इसके साथ ही, भारतीय प्रधानमंत्री ने संयुक्त अरब अमीरात में रह रहे लाखों भारतीय प्रवासियों की देखभाल और वहां की सरकार द्वारा उन्हें दिए जा रहे सहयोग के लिए विशेष रूप से आभार प्रकट किया।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकासशील देशों के मार्गदर्शक के रूप में उभरता भारत
इस वर्ष के जी7 शिखर सम्मेलन की खास बात यह रही कि इसमें सदस्य देशों के अलावा दुनिया के कई अन्य आमंत्रित देशों के नेताओं ने भी बड़े पैमाने पर हिस्सा लिया। भारत काफी लंबे समय से वैश्विक मंचों पर उन विकासशील और गरीब देशों की आवाज बनता रहा है जिनकी समस्याओं को अक्सर दबा दिया जाता है। भू-राजनीतिक मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्री सुरक्षा का मुद्दा उठाना, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपसी विश्वास की बहाली पर जोर देना और विकासशील देशों के अधिकारों की लड़ाई लड़ना भारत की एक बहुत ही सोची-समझी और दूरदर्शी कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा है। आने वाले समय में होने वाली भारत-अमेरिका द्विपक्षीय बैठक और इस सम्मेलन के बाकी बचे सत्रों से जो भी निर्णय निकलकर सामने आएंगे, वे आने वाले दिनों में वैश्विक राजनीति की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाएंगे।
समुद्री हमले का शिकार हुए भारतीय जवानों के शव पहुंचे वतन
दूसरी ओर, ओमान के तटीय इलाके के पास पिछले सप्ताह एक मालवाहक जहाज पर हुए भीषण अमेरिकी हमले में मारे गए भारतीय नाविकों से जुड़ी एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। इस हमले में जान गंवाने वाले तीन भारतीय नागरिकों में से दो नाविकों के पार्थिव शरीर विशेष विमान के जरिए वापस भारत पहुंचा दिए गए हैं। आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस दुखद घटना से ठीक एक दिन पहले इसी प्रभावित जहाज से सुरक्षित बचाए गए 21 अन्य भारतीय नाविकों को सकुशल भारत वापस लाया जा चुका है। इस पोत पर पलाऊ देश का झंडा लगा हुआ था और इसका नाम एमटी सेटेबेलो था, जिस पर पिछले दिनों अचानक हमला कर दिया गया था।
ओमान तट के पास हुए सैन्य हमले और राजनयिक स्तर पर भारत का कड़ा विरोध
मस्कट में स्थित भारतीय राजनयिक कार्यालय ने इस घटना की पुष्टि करते हुए सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी दी कि इस दुर्भाग्यपूर्ण सैन्य कार्रवाई में अपनी जान गंवाने वाले भारतीय नागरिक आदित्य शर्मा और उत्तर प्रदेश के रहने वाले शिवानंद चौरसिया के पार्थिव शरीरों को पूरी कानूनी प्रक्रियाओं के बाद भारत भेज दिया गया है। हालांकि, इस हमले में मारे गए तीसरे भारतीय नागरिक पटनाला सुरेश के पार्थिव शरीर को वापस लाने के संबंध में अभी तक पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। भारतीय दूतावास ने इस बेहद कठिन समय में पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की है और उन्हें हर संभव सहायता देने का भरोसा दिलाया है। उल्लेखनीय है कि पिछले सप्ताह ओमान के पास भारतीय चालक दल वाले तीन अलग-अलग व्यापारिक जहाजों को अमेरिकी कार्रवाई का सामना करना पड़ा था, जिनमें से एक जहाज पर हुए हमले में तीन भारतीयों की मौत हो गई थी। इस गंभीर घटना के बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए एक ही हफ्ते के भीतर दो बार अमेरिकी दूतावास के कार्यवाहक राजदूत जेसन मीक्स को तलब किया और इस सैन्य हमले पर अपनी तीव्र आपत्ति दर्ज कराते हुए बेहद कड़ा राजनयिक विरोध दर्ज कराया है।
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