एजेंसी, नई दिल्ली। Petrol Diesel Rules : देश में ईंधन की जमाखोरी और उसकी कालाबाजारी को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने नए दिशा-निर्देश जारी करते हुए बड़े-बड़े उद्योगों, कारखानों और व्यापारिक संस्थानों के पेट्रोल पंपों से सीधा ईंधन खरीदने पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी है। इसके साथ ही आम उपभोक्ताओं और वाहनों के लिए भी पेट्रोल तथा डीजल लेने की एक अधिकतम सीमा तय कर दी गई है। नए नियमों के मुताबिक अब कोई भी गाड़ी या ग्राहक एक दिन में किसी भी खुदरा बिक्री केंद्र से दो सौ लीटर से ज्यादा ईंधन नहीं खरीद पाएगा। सरकार द्वारा उठाया गया यह सख्त कदम शुरुआत में अगले नब्बे दिनों तक प्रभावी रूप से लागू रहेगा।
STORY | Govt bars bulk industrial petrol, diesel purchases through petrol pumps
The government has restricted industrial, commercial and institutional users from buying petrol and diesel from petrol pumps and instead asked them to source their requirements from bulk sale points,… pic.twitter.com/cfXCnbyqIz
— Press Trust of India (@PTI_News) June 12, 2026
थोक और खुदरा कीमतों में भारी अंतर बना मुख्य कारण
दरअसल, देश की राजधानी में आम जनता के लिए पेट्रोल पंपों पर मिलने वाले डीजल की कीमत पंचांवे रुपये बीस पैसे प्रति लीटर चल रही है। इसके विपरीत, यदि कोई बड़ी कंपनी या उद्योग थोक में ईंधन खरीदता है, तो उसके लिए यही दर एक सौ चौंतीस रुपये पचास पैसे प्रति लीटर बैठती है। कीमतों में आया यह भारी अंतर इस वजह से पैदा हुआ क्योंकि सरकारी तेल कंपनियों ने पश्चिम एशिया के संकट के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दामों में हुई भारी बढ़ोतरी का बोझ आम जनता पर नहीं डाला और खुदरा कीमतों को बढ़ने से रोके रखा। इस वजह से टेलीकॉम टावरों और बिजली बनाने वाले कारखानों के मालिकों ने घाटे से बचने के लिए थोक केंद्रों को छोड़कर आम पेट्रोल पंपों से भारी मात्रा में तेल खरीदना शुरू कर दिया था।
सरकारी तेल कंपनियों की बिक्री में आया भारी उछाल
थोक खरीदारों द्वारा आम जनता के लिए बने पेट्रोल पंपों का रुख करने की वजह से निजी क्षेत्र के बिक्री केंद्रों का कारोबार पूरी तरह ठप होने लगा और सरकारी कंपनियों के पंपों पर अचानक भीड़ बहुत ज्यादा बढ़ गई। आंकड़ों के अनुसार, बीते मई के महीने में देश की प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों जैसे इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम की पेट्रोल बिक्री में लगभग पौने पांच प्रतिशत और डीजल की बिक्री में छह प्रतिशत से भी ज्यादा की अप्रत्याशित बढ़त देखी गई। इसी असामान्य मांग को नियंत्रित करने के लिए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने ग्यारह जून को एक विशेष नियम पुस्तिका जारी की, जिसके तहत इस थोक खरीद पर तीन महीने के लिए अस्थायी रूप से ताला लगा दिया गया है।
वैश्विक परिस्थितियों का घरेलू बाजार पर असर
सरकार ने इस नए कानून को लागू करने के पीछे वैश्विक स्तर पर चल रही राजनीतिक और कूटनीतिक उथल-पुथल को मुख्य वजह बताया है। इस अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण दुनिया भर में कच्चे तेल की आपूर्ति करने वाले जहाजों के आवागमन और पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता पर बहुत बुरा असर पड़ा है। शासन का मानना है कि यदि बड़े औद्योगिक घराने इसी तरह खुदरा पंपों से सस्ते दामों में भारी मात्रा में तेल उठाते रहे, तो इससे स्थानीय स्तर पर आम जनता के लिए ईंधन की भारी किल्लत हो सकती है। इसके साथ ही एम्बुलेंस, दमकल और सार्वजनिक परिवहन जैसी बेहद जरूरी आपातकालीन सेवाओं के सामने भी तेल का बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।
नियमों का उल्लंघन करने वालों पर होगी कानूनी कार्रवाई
नए नियमों को जमीन पर पूरी तरह लागू करने की जिम्मेदारी देश की सभी बड़ी तेल विपणन कंपनियों और अधिकृत डीलरों को सौंपी गई है। इसके साथ ही सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने इलाकों में तेल की जमाखोरी और अवैध रीसेल पर कड़ी नजर रखें। नए आदेश के तहत पेट्रोल पंप से खरीदे गए डीजल को दोबारा किसी और को बेचना पूरी तरह गैरकानूनी माना जाएगा। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि कोई भी व्यक्ति या संस्था इन नियमों को तोड़ती हुई पाई गई, तो उसके खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत बेहद गंभीर कानूनी कार्रवाई की जाएगी और भारी जुर्माना भी लगाया जाएगा।
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