एजेंसी, नई दिल्ली। राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया के अंतिम दिन देश की राजनीति में बड़ी हलचल देखी गई। महाराष्ट्र की सात सीटों के लिए सत्ताधारी गठबंधन के छह उम्मीदवारों और विपक्षी गठबंधन की ओर से शरद पवार ने अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। बिहार में भी बड़ा उलटफेर देखने को मिला, जहाँ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा जाने के लिए पर्चा भरा। उनके साथ भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और शिवेश कुमार ने भी नामांकन किया। इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह खुद मौजूद रहे। नीतीश कुमार के इस कदम के बाद अब बिहार को नया मुख्यमंत्री मिलना तय है।
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने अपने चार उम्मीदवारों कोएल मल्लिक, मेनका गुरस्वामी, राजीव कुमार और बाबुल सुप्रियो के नाम आगे बढ़ाए हैं, जिन्होंने आज अपना नामांकन पूरा किया। दूसरी ओर, कांग्रेस पार्टी ने भी सुबह छह उम्मीदवारों की सूची जारी कर चुनावी माहौल गरमा दिया है। कांग्रेस ने तेलंगाना से अभिषेक मनु सिंघवी और छत्तीसगढ़ से फूलो देवी नेताम को फिर से मौका दिया है। इसके अलावा हरियाणा से करमवीर सिंह बौद्ध और हिमाचल प्रदेश से अनुराग शर्मा को मैदान में उतारा गया है। तमिलनाडु में सत्ताधारी दल द्रमुक ने कांग्रेस को एक सीट दी है, जिस पर एम. क्रिस्टोफर तिलक चुनाव लड़ेंगे। भारतीय जनता पार्टी ने भी दो अलग-अलग सूचियों के माध्यम से अब तक कुल तेरह उम्मीदवारों की घोषणा की है। भाजपा की नई सूची में केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इसके साथ ही असम, हरियाणा, ओडिशा और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों से भी भाजपा ने अपने मजबूत चेहरे चुनावी रण में उतारे हैं।
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चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार, दस राज्यों की सैंतीस राज्यसभा सीटों पर आगामी सोलह मार्च को मतदान होगा। सुबह नौ बजे से शाम चार बजे तक वोट डाले जाएंगे और उसी दिन शाम पांच बजे से मतों की गिनती शुरू हो जाएगी। ये चुनाव उन सदस्यों के कार्यकाल पूरे होने की वजह से कराए जा रहे हैं जो अप्रैल दो हजार छब्बीस में रिटायर हो रहे हैं। नवनिर्वाचित सदस्यों का कार्यकाल साल दो हजार बत्तीस तक रहेगा। इस चुनाव में सबसे ज्यादा नजर महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और बिहार की सीटों पर है, जहाँ कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदान के लिए केवल चुनाव अधिकारी द्वारा दिए गए विशेष बैंगनी रंग के पेन का ही इस्तेमाल किया जाएगा, किसी अन्य पेन से दिया गया वोट अमान्य माना जाएगा। निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए आयोग ने पर्यवेक्षकों की नियुक्ति के साथ-साथ ईवीएम और वीवीपैट को लेकर जागरूकता अभियान भी शुरू कर दिया है।
नीतीश युग का अंत : बिहार की राजनीति में बड़ा उलटफेर, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने थामा दिल्ली का दामन, राज्यसभा के लिए भरा पर्चा
बिहार की सियासत में आज एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला है। राज्य के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नीतीश कुमार ने अब केंद्र की राजनीति में जाने का फैसला कर लिया है। बृहस्पतिवार को उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की विशेष मौजूदगी में राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। साल दो हजार पांच से रिकॉर्ड दस बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले नीतीश कुमार के साथ भारतीय जनता पार्टी के नेता नितिन नबीन ने भी अपना पर्चा भरा। बिहार विधानसभा की सचिव ख्याति सिंह के कार्यालय में नामांकन की यह प्रक्रिया पूरी हुई। इस महत्वपूर्ण अवसर पर गृह मंत्री अमित शाह के साथ बिहार के दोनों उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा सहित राज्य मंत्रिमंडल के कई प्रमुख चेहरा मौजूद रहे। नामांकन से ठीक पहले नीतीश कुमार ने सार्वजनिक रूप से यह घोषणा की कि वे राज्यसभा का चुनाव लड़ेंगे। इस निर्णय के साथ ही बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में उनके लंबे सफर पर विराम लग गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिहार में जो भी नई सरकार गठित होगी, उसे उनका पूरा सहयोग और मार्गदर्शन मिलता रहेगा।
सोशल मीडिया पर राज्य की जनता के नाम एक भावुक संदेश साझा करते हुए नीतीश कुमार ने अपना आभार प्रकट किया। उन्होंने लिखा कि पिछले दो दशकों से अधिक समय तक बिहार के लोगों ने उन पर जो भरोसा जताया, उसी की बदौलत वे पूरी निष्ठा से राज्य की सेवा कर पाए। उन्होंने बिहार के विकास और सम्मान की नई पहचान का श्रेय जनता के अटूट समर्थन को दिया। अपने राजनैतिक सफर की एक अधूरी इच्छा का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि जब उन्होंने अपना संसदीय जीवन शुरू किया था, तभी से उनके मन में यह इच्छा थी कि वे बिहार विधान मंडल के दोनों सदनों के साथ-साथ भारतीय संसद के भी दोनों सदनों यानी लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य बनें। इसी सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने इस बार राज्यसभा जाने का निर्णय लिया है। उन्होंने बिहार की जनता को भरोसा दिलाया कि पद छोड़ने के बाद भी उनके साथ उनका रिश्ता बना रहेगा और एक विकसित बिहार बनाने का उनका संकल्प पहले की तरह ही मजबूत रहेगा। पिछले साल नवंबर में हुए विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को मिली भारी जीत के बाद अब नीतीश कुमार के पद छोड़ने से यह चर्चा तेज हो गई है कि भारतीय जनता पार्टी का कोई कद्दावर नेता बिहार के अगले मुख्यमंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाल सकता है।


