H1B Visa News

अमेरिका में H-1B वीजा पर लगा $1 लाख का नया शुल्क कोर्ट ने किया रद्द, भारतीय पेशेवरों को बड़ी राहत

अंतर्राष्ट्रीय अमेरिका

एजेंसी, वाशिंगटन। H1B Visa News : अमेरिका में नौकरी करने का सपना देखने वाले भारतीय तकनीकी विशेषज्ञों और वहां रह रहे प्रवासियों के लिए एक बहुत ही बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिकी अदालत ने ट्रंप सरकार के एक बेहद कड़े और विवादित फैसले को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। मैसाचुसेट्स की एक केंद्रीय अदालत ने एच-1बी वीजा आवेदन पर लगाए गए एक लाख अमेरिकी डॉलर के बहुत ही भारी-कम शुल्क को पूरी तरह से गैर-कानूनी बताते हुए उस पर रोक लगा दी है। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद अमेरिका में सक्रिय भारतीय संगठनों और आईटी क्षेत्र से जुड़े लोगों में बेहद उत्साह और खुशी का माहौल देखा जा रहा है। जानकारों का मानना है कि इस अदालती आदेश से अमेरिका के तकनीकी और व्यापारिक विकास को एक नई रफ्तार मिलेगी और वहां विदेशी हुनरमंदों का आना पहले की तरह आसान हो सकेगा।

अदालत का ऐतिहासिक फैसला और कानूनी आधार

इस पूरे मामले पर सुनवाई करते हुए केंद्रीय न्यायाधीश ने अपने फैसले में साफ कहा कि ट्रंप सरकार द्वारा एच-1बी वीजा पर लगाया गया एक लाख डॉलर का यह नया चार्ज पूरी तरह से अवैध और नियमों के खिलाफ है। न्यायपालिका ने स्पष्ट किया कि इतने बड़े वित्तीय और नीतिगत बदलाव को लागू करने के लिए सरकार ने अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस से आवश्यक अनुमति या मंजूरी नहीं ली थी। आपको बता दें कि पिछले साल सितंबर के महीने में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक विशेष सरकारी आदेश पर हस्ताक्षर करके नए एच-1बी वीजा आवेदनों के लिए इस भारी-भरकम राशि को चुकाना अनिवार्य कर दिया था। कोर्ट ने अब इसे कानून सम्मत न मानते हुए तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है जिससे वीजा आवेदन करने वाली कंपनियों और प्रवासियों पर आने वाला बहुत बड़ा आर्थिक संकट टल गया है।

भारतीय प्रवासी संगठनों ने जताई बड़ी खुशी

इस बड़े अदालती फैसले के आते ही अमेरिका में भारतीय प्रवासियों के अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्थाओं ने इसका खुले दिल से स्वागत किया है। फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज नाम के एक बड़े संगठन के नीति और रणनीति विभाग के मुख्य अधिकारी खंडेराव कंड ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मैसाचुसेट्स की अदालत का यह आदेश वास्तव में बेहद सराहनीय है। इस फैसले की वजह से नौकरी और रोजगार के आधार पर दी जाने वाली अमेरिकी आव्रजन व्यवस्था में एक बार फिर से पारदर्शिता, निष्पक्षता और स्थिरता वापस लौट आएगी। उन्होंने कहा कि अत्यधिक कुशल अंतरराष्ट्रीय प्रतिभाओं और इंजीनियरों की उपलब्धता अमेरिका के आईटी सेक्टर, चिकित्सा क्षेत्र और आधुनिक निर्माण उद्योगों को आगे बढ़ाने के लिए बेहद जरूरी है और यह फैसला इसी सोच को मजबूती देता है।

अमेरिका की विकास दर और वैश्विक प्रतिस्पर्धा

विशेषज्ञों का दृढ़ता से मानना है कि विदेशी पेशेवरों पर इस तरह के अनुचित आर्थिक प्रतिबंध लगाने से खुद अमेरिका की वैश्विक बाजार में स्थिति कमजोर हो रही थी। खंडेराव कंड ने आगे यह भी जोड़ा कि कोर्ट का यह रुख अमेरिका के भीतर नए शोध, खोज और व्यापारिक सूझबूझ की भावना को बनाए रखने के लिए बेहद मददगार साबित होगा। उनका संगठन हमेशा से यह मानता आया है कि एक संतुलित, न्यायप्रिय और योग्यता को सम्मान देने वाला आव्रजन कानून ही अमेरिकी व्यापारिक घरानों और वहां की पूरी अर्थव्यवस्था को मजबूत बना सकता है। योग्यता के आधार पर होने वाली नियुक्तियों से अमेरिकी कंपनियों को दुनिया के सबसे बेहतरीन दिमाग मिलते हैं जिससे उनकी तकनीकी बढ़त बाजार में बनी रहती है।

भविष्य की आशंकाएं और प्रशासनिक अड़चनें

अदालत के इस फैसले से जहां एक तरफ चारों तरफ खुशी का माहौल है, वहीं दूसरी तरफ कुछ जानकार अभी भी आने वाले समय को लेकर थोड़ी सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। इंडियास्पोरा नाम के प्रतिष्ठित संगठन के मुख्य संचालक संजीव जोशीपुरा ने इस विषय पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि हालांकि इस अदालती आदेश से वीजा प्रक्रिया से जुड़े सभी लोगों और कंपनियों को बहुत बड़ी राहत मिली है, लेकिन अभी यह पूरी तरह से नहीं कहा जा सकता कि इस विवाद का हमेशा के लिए अंत हो गया है। उन्होंने आशंका जताई कि भले ही कोर्ट ने इस भारी शुल्क को रद्द कर दिया है, लेकिन वर्तमान ट्रंप सरकार अपने पुराने रुख पर कायम रहते हुए वीजा की कागजी कार्यवाही और नियमों को आंतरिक रूप से और अधिक जटिल बना सकती है।

कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच बढ़ता टकराव

संजीव जोशीपुरा ने वर्तमान प्रशासनिक प्राथमिकताओं का हवाला देते हुए आगाह किया कि यदि अमेरिकी कार्यपालिका एच-1बी वीजा धारकों के रास्ते में नए रोड़े अटकाना चाहेगी, तो वह ऐसे प्रशासनिक और प्रक्रियात्मक बदलाव लागू कर सकती है जो सीधे तौर पर अमेरिकी कानून का उल्लंघन न करते हों लेकिन व्यावहारिक रूप से वीजा पाना मुश्किल बना दें। वर्तमान समय में अमेरिकी सरकार और वहां की न्यायपालिका के बीच इस तरह के नीतिगत मामलों को लेकर लगातार टकराव देखने को मिल रहा है। इस अदालती हस्तक्षेप के बाद अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि ट्रंप प्रशासन इस झटके के बाद अगला क्या कदम उठाता है और वीजा नियमों को लेकर क्या नई रणनीति तैयार करता है।

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