एजेंसी, नई दिल्ली। 20 फरवरी 2026 को भारत ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए अमेरिका के नेतृत्व वाले पैक्स सिलिका गठबंधन में औपचारिक रूप से शामिल हो गया। यह फैसला नई दिल्ली में चल रहे इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान हुआ, जहां केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव, अमेरिकी आर्थिक मामलों के अवर सचिव जैकब हेलबर्ग और अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने पैक्स सिलिका घोषणा पर हस्ताक्षर किए।
पैक्स सिलिका क्या है?
यह अमेरिकी विदेश विभाग की प्रमुख पहल है, जिसकी शुरुआत दिसंबर 2025 में हुई। इसका लक्ष्य है एआई, सेमीकंडक्टर, क्रिटिकल मिनरल्स (लिथियम, कोबाल्ट, रेयर अर्थ आदि) और इनकी पूरी सप्लाई चेन को सुरक्षित, मजबूत और नवाचार-आधारित बनाना। गठबंधन “हथियारबंद निर्भरता” को खत्म करने और भरोसेमंद साझेदारों के बीच गहरा आर्थिक-तकनीकी सहयोग बढ़ाने पर फोकस करता है। इसमें शामिल प्रमुख देश: अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, इजराइल, ब्रिटेन, ग्रीस, कतर, यूएई आदि। अब भारत का जुड़ना इसे और मजबूत बनाता है। अमेरिकी अवर सचिव जैकब हेलबर्ग ने कहा, “पैक्स सिलिका किसी एक देश के खिलाफ नहीं, बल्कि अमेरिका और उसके साझेदारों की सप्लाई चेन को मजबूत करने के बारे में है। यह 21वीं सदी की आर्थिक और तकनीकी व्यवस्था को आकार देने वाला गठबंधन है।”
भारत के लिए क्यों इतना अहम?
– क्रिटिकल मिनरल्स की सुरक्षित आपूर्ति: चीन पर निर्भरता कम होगी, प्रोसेसिंग और रिफाइनिंग में सहयोग मिलेगा।
– सेमीकंडक्टर और एआई में बड़ा बूस्ट: भारत की सेमीकंडक्टर महत्वाकांक्षाएं (जैसे फैब प्लांट्स) तेज होंगी, एआई इंफ्रास्ट्रक्चर और कंप्यूट क्षमता में साझेदारी बढ़ेगी।
– फाउंडेशन मॉडल्स और एआई विकास: विश्वसनीय साझेदारों के साथ मॉडल ट्रेनिंग, डेटा और टेक्नोलॉजी शेयरिंग।
– आत्मनिर्भरता और वैश्विक स्थिति: भारत का विशाल टैलेंट पूल, इंजीनियरिंग क्षमता और उभरती एआई पावर को ग्लोबल मान्यता मिलेगी।
– रणनीतिक रीसेट: हाल के टैरिफ विवादों के बाद भारत-अमेरिका संबंधों में सकारात्मक बदलाव, व्यापार और टेक डील्स को नई रफ्तार।
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि भारत का शामिल होना “21वीं सदी की आर्थिक और तकनीकी व्यवस्था को परिभाषित करने वाले गठबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा” है।
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राहुल गांधी बोले-भारत पूरी तरह झुक गया : कहा- ऐसा लगता है जैसे भारत ज्यादा दे रहा है और बदले में कम पा रहा
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी पर फिर निशाना साधा। राहुल ने कहा कि इस समझौते से ऐसा लगता है जैसे भारत ज्यादा दे रहा है और बदले में कम पा रहा है। राहुल ने इसे अमेरिका के सामने पूरी तरह झुक जाना बताया। शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने संसद में अपने भाषण में जिउ-जित्सु (एक खेल) का उदाहरण इसलिए दिया था, क्योंकि उस खेल में किसी को पकड़कर या दबाकर काबू किया जाता है। उनका कहना है कि राजनीति में भी ऐसे दबाव होते हैं जो बाहर से दिखाई नहीं देते।
राहुल ने ये सवाल उठाए :
– किसानों का नुकसान क्यों होने दिया गया?
– अमेरिका से तेल और दूसरी चीजें ज्यादा खरीदने पर सहमति क्यों दी गई?
– हर साल 100 अरब डॉलर का आयात बढ़ाने की बात क्यों मानी गई?
– भारत का डेटा (जानकारी) विदेशी कंपनियों को क्यों दिया जा रहा है?
भारत डेटा कॉलोनी बन सकता है
राहुल ने कहा कि इस समझौते से भारत डेटा कॉलोनी बन सकता है। यानी देश का डेटा दूसरे देश के हाथ में चला जाएगा। भारत का डेटा बहुत कम कीमत पर अमेरिकी कंपनियों को दिया जा रहा है। राहुल ने अमेरिका में चल रहे अडानी मामले और एपस्टीन मामले का जिक्र किया और कहा कि कुछ फाइलें जारी नहीं की गई हैं, जिनसे जुड़े नाम सामने आ सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पीएम मोदी पर अलग-अलग तरह के दबाव हैं। एक तरफ अमेरिका का दबाव और दूसरी तरफ चीन सीमा पर खड़ा है। राहुल के मुताबिक, इन दबावों की वजह से यह समझौता हुआ। कांग्रेस का कहना है कि यह समझौता किसानों, कपड़ा उद्योग और देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकता है। पार्टी ने कहा कि किसी भी व्यापार समझौते में देश के हित और आजादी से समझौता नहीं होना चाहिए।


