एजेंसी, कोलकाता। TMC MLA Expelled : पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की प्रमुख ममता बनर्जी ने राज्य की राजनीति में आए भूचाल के बीच सोमवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश जारी किया है। इस संदेश के माध्यम से उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और स्थानीय पुलिस प्रशासन पर बेहद गंभीर और चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं। ममता बनर्जी का दावा है कि पुलिस प्रशासन द्वारा टीएमसी के विधायकों पर लगातार मानसिक दबाव बनाया जा रहा है ताकि वे अपनी पार्टी छोड़कर भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर लें। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ खास विधायकों और सांसदों को डरा-धमकाकर या फिर भारी रिश्वत का लालच देकर टीएमसी को सांगठनिक रूप से कमजोर करने की एक बड़ी साजिश रची जा रही है। इसके साथ ही उन्होंने बागी रुख अपनाने वाले नेताओं पर तंज कसते हुए कहा कि जो लोग पार्टी छोड़कर जा रहे हैं, उनके जाने से संगठन का कोई नुकसान नहीं बल्कि भला ही हुआ है।
पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी निष्कासित
ममता बनर्जी का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब टीएमसी के भीतर बड़े स्तर पर बगावत और टूट की खबरें लगातार सुर्खियां बटोर रही हैं। अंदरूनी कलह से जूझ रही पार्टी ने कड़ा रुख अपनाते हुए सोमवार को अपने दो प्रमुख विधायकों, संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी को पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त होने के गंभीर आरोपों के चलते संगठन से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। इन दोनों ही निष्कासित विधायकों पर लंबे समय से पार्टी के आधिकारिक स्टैंड के खिलाफ जाकर बयानबाजी करने और संगठन की महत्वपूर्ण बैठकों से पूरी तरह दूरी बनाए रखने का आरोप है। हालांकि, पार्टी से निकाले जाने के बाद विधायक संदीपन साहा ने पलटवार करते हुए कहा कि आज की टीएमसी में नैतिकता की बात उठाना ही पार्टी विरोधी गतिविधि मान लिया जाता है। उन्होंने फिलहाल किसी दूसरी पार्टी में जाने की खबरों का पूरी तरह से खंडन किया है।
फर्जी हस्ताक्षर विवाद और सीआईडी जांच के घेरे में अभिषेक बनर्जी
इस पूरी राजनैतिक लड़ाई की जड़ें पिछले महीने के एक विवाद से जुड़ी हुई हैं। निष्कासित विधायक संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी ने विधानसभा अध्यक्ष के सामने एक लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत में उन्होंने सनसनीखेज आरोप लगाया था कि नेता प्रतिपक्ष के रूप में शोभनदेब चट्टोपाध्याय के समर्थन में जो प्रस्ताव तैयार किया गया था, उस पर उनके फर्जी हस्ताक्षर किए गए हैं। दोनों विधायकों का दावा है कि 6 मई को हुई दलीय बैठक में ऐसा कोई भी प्रस्ताव पास नहीं किया गया था। इस मामले के तूल पकड़ने और विधानसभा अध्यक्ष के दखल के बाद कोलकाता के हरे स्ट्रीट थाने में एक एफआईआर (FIR) दर्ज की गई थी, जिसकी जांच बाद में सीआईडी को सौंप दी गई। इसी फर्जी साइन मामले में सीआईडी ने टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को जांच में शामिल होने और प्रस्ताव की असली कॉपी पेश करने के लिए नोटिस जारी किया है, जिससे पार्टी की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
ममता बनर्जी की बैठक में 60 विधायकों की गैरमौजूदगी से बढ़ीं अटकलें
पश्चिम बंगाल के राजनैतिक गलियारों में टीएमसी के भीतर बड़ी टूट की अटकलें तब और तेज हो गईं, जब रविवार यानी 31 मई को ममता बनर्जी द्वारा बुलाई गई एक बेहद महत्वपूर्ण आपातकालीन बैठक फ्लॉप साबित हुई। कोलकाता के कालीघाट स्थित ममता बनर्जी के निजी आवास पर दोपहर 3 बजे टीएमसी विधायकों की यह बैठक होनी थी, जिसमें कुल 80 विधायकों को शामिल होना था। लेकिन हैरान करने वाली बात यह रही कि इस बैठक में 80 में से सिर्फ 20 विधायक ही पहुंचे, जबकि 60 विधायक नदारद रहे। इतनी बड़ी संख्या में विधायकों के नहीं आने के कारण बैठक को आनन-फानन में टालना पड़ा। हालांकि, इस मामले पर सफाई देते हुए टीएमसी के प्रवक्ता कुनाल घोष ने कहा कि राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और सांसद कल्याण बनर्जी पर हुए हमलों के विरोध में 1 जून को पूरे राज्य में बड़ा प्रदर्शन होना है, और सभी विधायक अपने-अपने क्षेत्रों में इसी प्रदर्शन की तैयारियों में व्यस्त थे, इसलिए वे बैठक में नहीं आ सके।
वीडियो संदेश में ममता बनर्जी ने उठाए स्वास्थ्य व्यवस्था और भाजपा पर सवाल
अपने वीडियो संदेश में ममता बनर्जी ने पार्टी के कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाते हुए कुल 4 मुख्य बातें देश के सामने रखीं। उन्होंने सबसे पहले टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के साथ हुए व्यवहार पर गहरी आपत्ति जताते हुए कहा कि बेले व्यू अस्पताल के डॉक्टरों पर दबाव बनाया गया कि वे सांसद का इलाज न करें, जो कि पूरी तरह से तानाशाही रवैया है। उन्होंने आगे कहा कि टीएमसी ने कभी किसी से गलत पैसा नहीं लिया है और जो लोग सत्ता का सुख भोगने के बाद अब हार देखकर भाजपा से हाथ मिला रहे हैं, उनके जाने से पार्टी का भला ही होगा। ममता बनर्जी ने भाजपा के प्रचार तंत्र की तुलना गोएबल्स के दुष्प्रचार से करते हुए कहा कि वे चाहे जितनी कोशिश कर लें, टीएमसी को तोड़ नहीं सकते। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे इस कठिन समय में डरे नहीं और पार्टी को नए सिरे से खड़ा करने में अपनी पूरी ताकत लगा दें।
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