एजेंसी, नई दिल्ली। India Myanmar Meeting : भारत की विदेश नीति और पड़ोसी देशों के साथ मजबूत रिश्तों को एक नई दिशा देने के लिए सोमवार को राजधानी दिल्ली में एक बेहद महत्वपूर्ण कूटनीतिक बैठक संपन्न हुई। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने म्यांमार के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग के साथ हैदराबाद हाउस में एक विस्तृत और उच्चस्तरीय बैठक की। इस द्विवार्षिक वार्ता का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार, आपसी संपर्क (कनेक्टिविटी), सीमा सुरक्षा और रक्षा सहयोग जैसे बेहद संवेदनशील और जरूरी क्षेत्रों में रणनीतिक साझेदारी को और अधिक मजबूत बनाना है। म्यांमार के राष्ट्रपति इस समय भारत की 5 दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर आए हुए हैं। म्यांमार में हुए हालिया संसदीय चुनावों के बाद राष्ट्रपति का पदभार संभालने के महज 2 महीने के भीतर ही उनका यह भारत दौरा दोनों देशों के मजबूत होते रिश्तों को साफ दर्शाता है।
Had a productive meeting with President U Min Aung Hlaing of Myanmar. We in India are honoured that he has chosen India for his first foreign visit as President. Equally gladdening is the fact that he began the visit from Bodh Gaya, with the blessings of Lord Buddha. We reviewed… pic.twitter.com/eL1sXgsrE6
— Narendra Modi (@narendramodi) June 1, 2026
म्यांमार के नए राजनैतिक समीकरण और राष्ट्रपति का भारत दौरा
म्यांमार में पिछले साल दिसंबर और इस साल जनवरी के महीनों में संसदीय चुनाव आयोजित किए गए थे। यह चुनाव वहां की सत्ताधारी सैन्य जुंटा के खिलाफ सालों से चल रहे हिंसक विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक उठापटक के बाद कराए गए थे। इन चुनावों के संपन्न होने के बाद ही यू मिन आंग ह्लाइंग ने देश के राष्ट्रपति के रूप में कमान संभाली है। आपको बता दें कि इससे पहले 1 फरवरी 2021 को म्यांमार में एक बड़ा तख्तापलट हुआ था, जिसमें सैन्य जुंटा ने आंग सान सू ची की लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार को सत्ता से बेदखल कर दिया था। इस लंबे राजनैतिक संकट के बाद चुनी गई नई सरकार के मुखिया का भारत आना कूटनीतिक रूप से बड़ा कदम है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया पर इस मुलाकात की तस्वीरें साझा करते हुए बताया कि हैदराबाद हाउस पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी ने म्यांमार के राष्ट्रपति का बेहद गर्मजोशी के साथ स्वागत किया।
भारत के लिए क्यों बेहद खास है पड़ोसी देश म्यांमार
राजनैतिक और भौगोलिक दृष्टि से देखा जाए तो म्यांमार भारत के लिए रणनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण पड़ोसी देशों में से एक माना जाता है। भारत के कई पूर्वोत्तर राज्य, विशेष रूप से उग्रवाद और आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियों से जूझ रहे नगालैंड और मणिपुर, म्यांमार के साथ अपनी सीमाएं साझा करते हैं। भारत और म्यांमार के बीच कुल 1,640 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय जमीनी सीमा है, जिसकी सुरक्षा और स्थिरता दोनों देशों के लिए बेहद जरूरी है। यही वजह है कि राष्ट्रपति ह्लाइंग की इस यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी सिलसिले में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने भी रविवार को म्यांमार के राष्ट्रपति से मुलाकात की थी और दोनों देशों की सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर बेहद गोपनीय और गंभीर चर्चा की थी।
उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ मुंबई का दौरा करेंगे राष्ट्रपति
म्यांमार के राष्ट्रपति इस यात्रा पर अकेले नहीं आए हैं, बल्कि उनके साथ एक बेहद प्रभावशाली और उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भारत के दौरे पर है। इस दल में म्यांमार सरकार के कई प्रमुख कैबिनेट मंत्री, शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी और वहां के उद्योग जगत के बड़े प्रतिनिधि शामिल हैं। तय कार्यक्रम के अनुसार, राष्ट्रपति ह्लाइंग को पहले 1 जून को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले ‘इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस’ शिखर सम्मेलन का हिस्सा बनने के लिए भारत आना था, लेकिन किन्हीं कारणों से इस वैश्विक सम्मेलन को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। इसके बावजूद दोनों देशों ने इस कूटनीतिक यात्रा को जारी रखने का फैसला किया। दिल्ली के अपने आधिकारिक कार्यक्रम को पूरा करने के बाद म्यांमार के राष्ट्रपति मंगलवार को देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के लिए रवाना होंगे, जहां वे भारतीय उद्योगपतियों और व्यापार जगत के दिग्गजों के साथ बैठकें करेंगे।
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