एजेंसी, भोपाल। CM Mohan Yadav : मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक बार फिर आम जनता के बीच अपनी सादगी और प्रशासनिक मितव्ययता की एक अनूठी मिसाल पेश की है। सूबे के मुखिया ने गुरुवार अट्ठाईस मई को इंदौर से उज्जैन तक की अपनी यात्रा के लिए राजसी ठाठ-बाठ और भारी-भरकम वीआईपी सुरक्षा काफिले को पूरी तरह से छोड़ दिया। मुख्यमंत्री ने इस सफर के लिए एक साधारण बस का विकल्प चुना और उसी से अपनी मंजिल की तरफ रवाना हुए। उनके इस कदम की हर तरफ काफी चर्चा हो रही है। इस यात्रा के दौरान उनके साथ केवल सुरक्षाकर्मी ही नहीं, बल्कि राज्य सरकार के कैबिनेट मंत्री, क्षेत्रीय सांसद सहित कई अन्य वरिष्ठ जनप्रतिनिधि भी एक आम मुसाफिर की तरह बस की सीटों पर बैठे नजर आए। इस अनोखे सफर के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से भी देश के प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए संसाधनों की बचत के संदेश को अपने जीवन में अपनाने की भावुक अपील की। डॉ. मोहन यादव राज्य के भीतर एक बिल्कुल नई और जन-हितैषी कार्य संस्कृति को स्थापित करने के प्रयास में जुटे हैं, जिसमें प्रशासनिक फिजूलखर्ची पर रोक और सरकारी संसाधनों के संयमित इस्तेमाल को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जा रही है।
#WATCH | Indore: Madhya Pradesh Chief Minister Mohan Yadav, along with several public representatives and senior government officials, travels from Indore to Ujjain by bus. pic.twitter.com/kgJrfGhCCg
— ANI (@ANI) May 28, 2026
प्रधानमंत्री की सीख को जमीन पर उतारने की कोशिश
साधारण बस से उज्जैन की तरफ प्रस्थान करते समय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में कैबिनेट की बैठक के दौरान सभी को सादगी अपनाने और ईंधन की बर्बादी को रोकने का एक बेहद महत्वपूर्ण संदेश दिया था। प्रधानमंत्री की उसी सीख का अनुसरण करते हुए वे आज स्वयं एक स्थानीय गाड़ी के जरिए इंदौर से बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन की यात्रा तय कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस बस सफर में उनके साथ कैबिनेट मंत्री तुलसीराम सिलावट, इंदौर के सांसद शंकर लालवानी और स्थानीय जिलाध्यक्ष समेत संगठन के तमाम वरिष्ठ पदाधिकारी भी एक साथ यात्रा का आनंद ले रहे हैं। मुख्यमंत्री ने वैश्विक स्तर पर ऊर्जा के संसाधनों पर मंडरा रहे संकट का जिक्र करते हुए कहा कि आज यह समय की सबसे बड़ी मांग है कि हम सभी अपने राष्ट्रीय संसाधनों का बहुत ही सोच-समझकर और किफायत के साथ उपयोग करें। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मुख्यमंत्री का यह कदम केवल एक दिखावा नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक अमले को ईंधन की बचत करने और अनावश्यक खर्चों को सीमित करने की दिशा में एक बहुत ही सकारात्मक और कड़ा संदेश है।
सिंगरौली में भी काफिला छोड़ टूरिस्ट बस से पहुंचे थे मुख्यमंत्री
आपको बता दें कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा सादगी का ऐसा उदाहरण पेश करने का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे कुछ ही दिनों पहले जब वे राज्य के सिंगरौली जिले के आधिकारिक प्रवास पर गए थे, तब भी उन्होंने वहां कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने के लिए अपने आलीशान वाहनों के काफिले का इस्तेमाल करने से साफ मना कर दिया था। उस दौरान भी वे एक टूरिस्ट बस में सवार होकर कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे, और उनका सुरक्षा काफिला उनके पीछे नहीं चल रहा था। सिंगरौली में जनता को संबोधित करते हुए उन्होंने बेहद मार्मिक बात कही थी कि लोकतंत्र में किसी भी जनप्रतिनिधि या राजनेता की असली पहचान उसके साथ चलने वाले सुरक्षा प्रोटोकॉल या गाड़ियों की कतार से कभी नहीं होती, बल्कि जनता के दिल में उसके प्रति कितना प्रेम है और वह जनसेवा के लिए कितना समर्पित है, इसी से उसकी असल पहचान बनती है। मुख्यमंत्री की इस लगातार बदलती कार्यशैली से मध्य प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में भी फिजूलखर्ची को लेकर हड़कंप मचा हुआ है।
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