केंद्रीय गृह मंत्री

सुरक्षा समीक्षा बैठक में गृह मंत्री के कड़े निर्देश : भारत-पाकिस्तान सीमा के पास अवैध निर्माणों पर चलेगा बुलडोजर

देश/प्रदेश नई दिल्ली राष्ट्रीय

एजेंसी, दिल्ली। India Pakistan border news : केंद्रीय गृह मंत्री ने देश की सीमाओं की सुरक्षा को और अधिक चाक-चौबंद करने के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और कड़ा फैसला लिया है। इसके तहत देश की अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं के 15 किलोमीटर के दायरे में आने वाले सभी प्रकार के अवैध निर्माणों के खिलाफ कतई बर्दाश्त न करने की नीति यानी जीरो टॉलरेंस नीति को पूरी सख्ती से लागू करने का आदेश दिया गया है। इसके साथ ही प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान इस सीमावर्ती क्षेत्र में जितने भी अनधिकृत और गैर-कानूनी ढांचे बनकर तैयार हुए हैं, उन सभी को जल्द से जल्द पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया जाए। गृह मंत्रालय के आला अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि मंत्रालय द्वारा सीमा के पास स्थित जिलों के जिला मजिस्ट्रेटों को अतिरिक्त और बेहद महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। अब जिला मजिस्ट्रेटों को यह सुनिश्चित करना होगा कि सीमावर्ती इलाकों में संचालित होने वाले सभी बैंकों के वित्तीय और कानूनी कामकाज पूरी तरह से नियमों के दायरे में हों। इसके अलावा क्षेत्र के बड़े कमर्शियल प्रतिष्ठानों का पूरी तरह से सत्यापन किया जाएगा, उनके आर्थिक स्रोतों की बारीकी से जांच होगी, और फर्जी खातों, मुखौटा कंपनियों व फर्जी पहचान पत्रों की पहचान करके सीमा पार से होने वाली अवैध तस्करी और संदिग्ध गतिविधियों पर पूरी तरह से रोक लगाई जाएगी।

सुरक्षा समीक्षा बैठक में गृह मंत्री ने की स्थिति का मूल्यांकन

देश की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गृह मंत्री ने बीकानेर में एक उच्च स्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान उन्होंने भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे राजस्थान के सीमावर्ती जिलों की सुरक्षा व्यवस्था और वहां की तात्कालिक चुनौतियों का जमीनी मूल्यांकन किया। इस उच्च स्तरीय बैठक में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के साथ-साथ राज्य सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। इसके अलावा सीमा से सीधे जुड़े पांच प्रमुख जिलों – बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर, श्री गंगानगर और फलोदी के जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक भी इस रणनीतिक चर्चा का हिस्सा बने ताकि जमीनी स्तर पर सुरक्षा को अभेद्य बनाया जा सके।

अपराधों और मादक पदार्थों के नेटवर्क को खत्म करने का खाका

गृह मंत्रालय की तरफ से जारी किए गए एक आधिकारिक बयान में इस बात की जानकारी दी गई है कि सभी सीमावर्ती जिला प्रशासनों को अपने-अपने क्षेत्रों में होने वाले अपराधों और मादक पदार्थों की तस्करी के तौर-तरीकों, उनके मुख्य स्रोतों और पूरे नेटवर्क का बहुत गहराई से अध्ययन करने के निर्देश दिए गए हैं। इसका मुख्य उद्देश्य इन गंभीर समस्याओं का ऐसा स्थायी और मजबूत समाधान निकालना है जिससे कि ये सुरक्षा संबंधी चुनौतियां भविष्य में दोबारा कभी भी सिर न उठा सकें। बैठक में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि आम नागरिकों, सरकारी व्यवस्था और देश की अग्रणी सुरक्षा एजेंसियों को एक साथ मिलकर काम करना होगा, जिससे प्रत्येक सीमावर्ती जिले के चारों तरफ एक अभेद्य 360 डिग्री सुरक्षा कवच तैयार किया जा सके।

शून्य सहिष्णुता नीति के तहत ढहाए जाएंगे सभी अवैध ढांचे

अधिकारियों ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि आंतरिक सीमाओं के बिल्कुल नजदीक, विशेष रूप से शून्य से लेकर 15 किलोमीटर के बेहद संवेदनशील दायरे के भीतर जितने भी अवैध निर्माण खड़े किए गए हैं, उन्हें हटाने के लिए प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद है। गृह मंत्री ने घुसपैठ, नशीले पदार्थों की अवैध तस्करी, जमीन पर अवैध कब्जे, आतंकवाद को मिलने वाली आर्थिक मदद और अन्य गंभीर सीमा पार अपराधों से पूरी ताकत के साथ निपटने के लिए एक साझा तंत्र बनाने की वकालत की है। इसके तहत सीमा सुरक्षा बल, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो और राज्य के प्रशासनिक तंत्र को आपस में बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए सीमा प्रबंधन के एक एकीकृत दृष्टिकोण पर काम करने के लिए कहा गया है।

सीमावर्ती गांवों के विकास और सरकारी योजनाओं पर विशेष ध्यान

मंत्रालय के आधिकारिक बयान में देश के अंतिम छोर पर स्थित गांवों को मुख्यधारा से जोड़ने और वहां की व्यवस्था को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई है। इसके लिए आर्थिक अपराधों पर पूरी तरह लगाम लगाने, बुनियादी सुविधाओं की कमियों को दूर करने और सीमा पर रहने वाली आबादी को हर संभव सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम के दूसरे चरण को पूरी सफलता के साथ जमीन पर उतारने की बात कही गई है। गृह मंत्री ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि सीमावर्ती गांवों में रहने वाले प्रत्येक नागरिक तक सरकार की सभी जनकल्याणकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ अनिवार्य रूप से पहुंचना चाहिए। इसके साथ ही इंटरनेट और डिजिटल माध्यमों से होने वाले साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए विशेष सहायता केंद्र के प्रभावी इस्तेमाल पर जोर दिया गया है। गृह मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि इन तमाम संवेदनशील मुद्दों पर ठीक दो महीने के बाद एक बार फिर से गहन समीक्षा की जाएगी और काम की प्रगति की रिपोर्ट ली जाएगी, इसलिए सभी संबंधित जिलों को जल्द से जल्द परिणाम देने वाली जमीनी कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी।

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