एजेंसी, कोलकाता। Abhishek Banerjee : पश्चिम बंगाल की राजनीति में सोमवार को उस समय भारी हलचल मच गई, जब कोलकाता पुलिस की एक विशेष टीम तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के हरीश मुखर्जी रोड स्थित निजी आवास ‘शांतिनिकेतन’ पर औचक कार्रवाई करने पहुंच गई। पुलिस की यह बड़ी कार्रवाई कोलकाता नगर निगम द्वारा जारी किए गए एक नोटिस के बाद अमल में लाई गई है, जिसमें अभिषेक बनर्जी के इस घर में अवैध निर्माण किए जाने की बात कही गई है। नगर निगम के सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक, इस रिहायशी इमारत के अवैध हिस्से को पूरी तरह से जमींदोज करने का आधिकारिक आदेश भी जारी किया जा चुका है, जिसके मद्देनजर पुलिस बल ने मौके पर जाकर पूरे परिसर की स्थिति का जायजा लिया।
#WATCH | West Bengal | Kolkata police leave from the residence of TMC National General Secretary Abhishek Banerjee. pic.twitter.com/pgasm6lCOw
— ANI (@ANI) May 25, 2026
अभिषेक बनर्जी ने मांगा दो हफ्ते का समय, मेयर ने साधी चुप्पी
नगर निगम द्वारा थमाए गए इस कड़े नोटिस के जवाब में टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी ने तुरंत कदम उठाते हुए नगरपालिका के वरिष्ठ अधिकारियों को एक आधिकारिक पत्र भेजा है। इस पत्र के माध्यम से उन्होंने विभाग के सामने अपना पक्ष रखने और स्थिति को संभालने के लिए कम से कम 14 दिनों की मोहलत मांगी है। हालांकि, नगर निगम प्रशासन की ओर से अभी तक इस बात का कोई साफ खुलासा नहीं किया गया है कि वे इस अनुरोध को स्वीकार कर रहे हैं या नहीं। वहीं दूसरी ओर, इस पूरे संवेदनशील मामले पर जब कोलकाता के मेयर और टीएमसी के वरिष्ठ विधायक फिरहाद हकीम से सवाल पूछा गया, तो उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम से खुद को पूरी तरह अनजान बताते हुए कहा कि उन्हें इस प्रकार के किसी भी नोटिस की कोई व्यक्तिगत जानकारी नहीं है।
निजी कंपनी के नाम पर दर्ज है प्रॉपर्टी का मालिकाना हक
प्रशासनिक और कानूनी दस्तावेजों की जांच में यह बात सामने आई है कि 188ए हरीश मुखर्जी रोड पर स्थित इस आलीशान इमारत का वास्तविक मालिकाना हक ‘मैसर्स लीप्स एंड बाउंड्स प्राइवेट लिमिटेड’ नामक एक निजी कंपनी के नाम पर दर्ज है। राजनीतिक और व्यावसायिक गलियारों में यह बात जगजाहिर है कि अभिषेक बनर्जी खुद इस कंपनी के मुख्य संचालक और मालिक हैं। नगर निगम के असेसमेंट विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नियमों को ताक पर रखकर किए गए इस निर्माण के खिलाफ कानून के तहत सख्त कदम उठाए जा रहे हैं और इसी सिलसिले में जांच की कड़ियों को आगे बढ़ाया जा रहा है।
जांच के दायरे में बनर्जी परिवार की सत्रह अन्य संपत्तियां
कोलकाता नगर निगम से जुड़े उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि केवल यही एक मकान नहीं, बल्कि अभिषेक बनर्जी, उनकी निजी कंपनी और उनके परिवार के अन्य सदस्यों से जुड़ी हुई कुल 17 संपत्तियां इस समय प्रशासन की कड़ी जांच के दायरे में आ चुकी हैं। नगर निगम का यह सीधा और गंभीर आरोप है कि इन सभी संपत्तियों के निर्माण कार्य के दौरान निगम के तय नियमों और पैमानों का पूरी तरह से उल्लंघन किया गया है। इसी वजह से केएमसी एक्ट, 1980 की विशेष धारा 400(1) का इस्तेमाल करते हुए प्रशासन ने इन सभी 17 ठिकानों के मुख्य द्वारों पर कानूनी नोटिस चस्पा कर दिए हैं। शुरुआती जांच के दौरान विभाग ने ऐसी 42 संदिग्ध संपत्तियों की एक विस्तृत सूची तैयार की थी, जिसे बाद में बारीकी से छांटने के बाद 17 मुख्य पतों तक सीमित किया गया है।
सुरक्षा व्यवस्था में पहले ही की जा चुकी है कटौती
अभिषेक बनर्जी के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई का यह सिलसिला नया नहीं है, बल्कि इसकी पटकथा कुछ दिनों पहले ही लिखी जानी शुरू हो गई थी। पश्चिम बंगाल में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों के नतीजे आने के ठीक दो दिन बाद यानी 4 मई को राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए अभिषेक बनर्जी की सुरक्षा व्यवस्था में भारी कटौती कर दी थी। उनके हरीश मुखर्जी रोड वाले इस आवास के बाहर चौबीसों घंटे तैनात रहने वाले पुलिस बल को अचानक कम कर दिया गया था। इसके साथ ही सुरक्षा के लिहाज से घर के बाहर लगाई गई मजबूत बैरिकेडिंग और आने-जाने वालों की सघन जांच करने वाली आधुनिक मशीनों को भी वहां से पूरी तरह हटा लिया गया था।
अवैध तरीके से बने टीएमसी दफ्तरों पर चल रहा बुलडोजर
इसी प्रशासनिक मुहिम के तहत बीते 14 मई को नगर निगम ने एक और बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए बुलडोजर की मदद से तृणमूल कांग्रेस के एक स्थानीय दफ्तर और वहां बने एक क्लॉक टावर को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया था। इस इलाके के स्थानीय निवासियों ने बहुत समय पहले ही इस बात की लिखित शिकायत दर्ज कराई थी कि यह पूरा निर्माण पूरी तरह अवैध है और इसे एक खेल के मैदान पर अवैध कब्जा करके खड़ा किया गया था। इस टावर का उद्घाटन पूर्व सरकार के कद्दावर मंत्री अरूप विश्वास ने किया था, जिन्हें हालिया चुनावों में करारी हार का सामना करना पड़ा है। इससे पहले चुनावी नतीजे आने के तुरंत बाद 5 मई को भी कोलकाता के न्यू मार्केट क्षेत्र में बने एक और टीएमसी दफ्तर को निगम के बुलडोजर ने पूरी तरह जमींदोज कर दिया था।
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