एजेंसी, वाशिंगटन। US-India Defence : भारत और अमेरिका के बीच रक्षा साझेदारी लगातार मजबूत होती जा रही है। इसी कड़ी में अमेरिका ने भारत को बड़ी सैन्य सहायता देने का फैसला किया है। अमेरिकी प्रशासन ने भारतीय सेना के लिए अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टरों की रखरखाव सेवाओं और जरूरी रक्षा उपकरणों की बिक्री को मंजूरी दे दी है। इस रक्षा सौदे की अनुमानित कीमत करीब 198.2 अरब अमेरिकी डॉलर बताई जा रही है। इसके अलावा एम777ए2 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर तोपों के लिए भी अनुरक्षण और तकनीकी सहायता सेवाओं को स्वीकृति मिली है, जिसकी लागत लगभग 23 करोड़ अमेरिकी डॉलर आंकी गई है। माना जा रहा है कि इस फैसले से भारत की सैन्य ताकत और अधिक मजबूत होगी।
The U.S. Department of State has made a determination approving a possible Foreign Military Sale to the Government of India for its purchase of Apache Helicopters follow-on support services and related equipment. The estimated total cost is $198.2 million.
The Government of… pic.twitter.com/4c8GUfnCkA
— Alpha Defense™🇮🇳 (@alpha_defense) May 19, 2026
अपाचे हेलीकॉप्टरों को मिलेगा आधुनिक तकनीकी समर्थन
अमेरिकी विदेश मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार भारत ने एएच-64ई अपाचे हेलीकॉप्टरों के लिए दीर्घकालिक रखरखाव सहायता, इंजीनियरिंग सेवाएं, तकनीकी सहयोग और लॉजिस्टिक सपोर्ट की मांग की थी। इसके तहत भारतीय सैन्य कर्मियों को प्रशिक्षण देने, तकनीकी दस्तावेज उपलब्ध कराने और रक्षा संचालन से जुड़े अन्य जरूरी संसाधन भी शामिल किए गए हैं। बताया गया कि इन सेवाओं को उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी अमेरिका की प्रमुख रक्षा कंपनियों बोइंग और लॉकहीड मार्टिन को दी जाएगी। दोनों कंपनियां पहले भी भारत के साथ कई रक्षा परियोजनाओं में काम कर चुकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारतीय वायुसेना और थलसेना की युद्ध क्षमता में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।
एम777 हॉवित्जर तोपों के लिए भी मिला समर्थन
अमेरिका ने भारत के एम777ए2 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर सिस्टम के लिए भी अनुरक्षण सहायता सेवाओं को मंजूरी दी है। यह वही हल्की तोपें हैं जिन्हें पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में तेजी से तैनात किया जा सकता है। भारतीय सेना पहले से ही इन तोपों का इस्तेमाल कर रही है और इन्हें रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इन हॉवित्जर सिस्टम के रखरखाव और तकनीकी सहयोग का काम ब्रिटेन की रक्षा कंपनी बीएई सिस्टम्स करेगी। कंपनी का मुख्य संचालन ब्रिटेन के कंब्रिया क्षेत्र से किया जाएगा। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इन सेवाओं से भारतीय सेना की ऑपरेशनल क्षमता लंबे समय तक बनी रहेगी।
भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को मिलेगा बढ़ावा
अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने साफ कहा है कि यह रक्षा सौदा दोनों देशों के बीच रणनीतिक रिश्तों को और मजबूत करेगा। साथ ही यह अमेरिका की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े उद्देश्यों के अनुरूप भी है। अमेरिका का मानना है कि भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण साझेदार है और दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग लगातार बढ़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए भारत और अमेरिका के बीच इस तरह के रक्षा समझौते भविष्य में और बढ़ सकते हैं। इससे भारत की रक्षा तैयारियों को नई मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
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