एजेंसी, कोलकाता। RG Kar Case : पश्चिम बंगाल की नवनिर्वाचित सरकार ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में हुए जघन्य बलात्कार-हत्याकांड मामले में एक बहुत बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को राज्य सचिवालय में घोषणा की कि घटना की शुरुआती जांच में गंभीर लापरवाही और कर्तव्य के प्रति उदासीनता बरतने के आरोप में तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। सरकार के इस सख्त रुख से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।
STORY | Bengal govt suspends three IPS officers over ‘lapses’ in initial probe into RG Kar rape-murder case
The West Bengal government on Friday suspended three senior IPS officers for their alleged mishandling and dereliction of duty during the initial phase of investigation… pic.twitter.com/Xq8LyQJV3r
— Press Trust of India (@PTI_News) May 15, 2026
इन अधिकारियों पर गिरी निलंबन की गाज
राज्य सरकार द्वारा निलंबित किए गए अधिकारियों में कोलकाता के पूर्व पुलिस आयुक्त विनीत गोयल का नाम सबसे प्रमुख है। उनके साथ ही पूर्व उपायुक्त इंदिरा मुखर्जी और अभिषेक गुप्ता को भी सस्पेंड कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि इन अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने संवेदनशील मामले को बेहद गैर-जिम्मेदाराना तरीके से संभाला। इसके अलावा, उन पर पीड़िता के माता-पिता को चुप कराने के लिए रिश्वत के तौर पर पैसे देने की कोशिश करने और घटना के संबंध में अनाधिकृत प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के भी गंभीर आरोप हैं।
विभागीय जांच और सीबीआई की भूमिका
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने साफ किया कि यह कार्रवाई राज्य सरकार की अनुशासनात्मक प्रक्रिया का हिस्सा है और इसका सीबीआई द्वारा की जा रही वास्तविक जांच में कोई हस्तक्षेप नहीं होगा। उन्होंने बताया कि विभागीय जांच का नेतृत्व अब राज्य के गृह सचिव, मुख्य सचिव के मार्गदर्शन में करेंगे। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जांच प्रक्रिया के दौरान जिन अधिकारियों ने संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन किया है, उन्हें उनके किए की सजा मिले।
क्या था पूरा आरजी कर मामला?
यह दर्दनाक मामला 9 अगस्त 2024 का है, जब कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में कार्यरत एक महिला जूनियर डॉक्टर का शव अस्पताल के सेमिनार हॉल में संदिग्ध परिस्थितियों में मिला था। इस घटना के बाद पूरे देश के डॉक्टरों और आम जनता में भारी आक्रोश फैल गया था। मामले की जांच के बाद नागरिक स्वयंसेवक संजय रॉय को गिरफ्तार किया गया था, जिसे 20 जनवरी 2025 को एक निचली अदालत ने दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
परिवार के आरोपों ने बढ़ाई अधिकारियों की मुश्किलें
भले ही मुख्य आरोपी को उम्रकैद की सजा मिल चुकी है, लेकिन मृतका के परिवार का शुरू से ही यह आरोप रहा है कि इस अपराध में संजय रॉय अकेला नहीं था और इसमें अन्य लोग भी शामिल थे। परिवार ने पुलिस प्रशासन पर सबूतों को मिटाने और मामले को रफा-दफा करने के प्रयास के भी आरोप लगाए थे। इन्हीं आरोपों को आधार बनाकर अब राज्य सरकार ने पुलिस के उच्चाधिकारियों पर यह सख्त कार्रवाई की है, ताकि जनता के बीच न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास बहाल किया जा सके।
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