एजेंसी, भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा में नारी शक्ति वंदन पर घमासान : मध्य प्रदेश विधानसभा का सोमवार को आयोजित विशेष सत्र भारी हंगामे और राजनीतिक गतिरोध का केंद्र बन गया। सदन की कार्यवाही के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा ‘नारी शक्ति वंदन’ संकल्प प्रस्तुत किए जाने पर सत्ता पक्ष और प्रतिपक्ष के बीच तीखी झड़पें हुईं। विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार की कार्यप्रणाली और चर्चा के नियमों पर असंतोष व्यक्त करते हुए सदन से वॉकआउट (बहिर्गमन) कर दिया। इस विशेष सत्र का आयोजन मुख्य रूप से देश की संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं हेतु एक-तिहाई स्थान आरक्षित करने के संकल्प पर विमर्श के लिए किया गया था। सत्र के प्रारंभ में सदन ने पार्श्व गायिका आशा भोंसले और पूर्व केंद्रीय मंत्री मोहसिना किदवई सहित अन्य दिवंगत विभूतियों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
#WATCH | भोपाल: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मध्य प्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र पर कहा, “मध्य प्रदेश विधानसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर विशेष सत्र रहा। बीते दिन लोकसभा में देश की आधी आबादी को लेकर नारी शक्ति वंदन अधिनियम का प्रस्तुतिकरण हुआ और देश ने देखा कि… pic.twitter.com/9CrH862aPJ
— ANI_HindiNews (@AHindinews) April 27, 2026
संकल्प पर वैचारिक मतभेद और विधायी प्रक्रिया पर विवाद
मुख्यमंत्री ने सदन के पटल पर संकल्प पत्र रखते हुए प्रतिपादित किया कि एक विकसित राष्ट्र के संकल्प की सिद्धि हेतु महिलाओं को तैंतीस प्रतिशत आरक्षण प्रदान करना समय की मांग है। चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने व्यवस्था का प्रश्न (प्वाइंट ऑफ ऑर्डर) उठाने का प्रयास किया, जिसे विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने संकल्प प्रस्तुतिकरण के पश्चात सुनने की बात कही। कांग्रेस का मुख्य आरोप यह था कि सरकार ने विपक्ष द्वारा प्रस्तुत अशासकीय संकल्प को नियम विरुद्ध तरीके से निरस्त कर दिया है। पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने परिसीमन की अनिवार्यता पर प्रश्न खड़े करते हुए कहा कि यदि सरकार की मंशा स्पष्ट है, तो वर्तमान सीटों पर ही आरक्षण लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि तकनीकी बाधाओं की आड़ में महिला आरक्षण को भविष्य के लिए टाला जा रहा है।
सत्ता पक्ष का तीखा प्रहार और निंदा प्रस्ताव की घोषणा
विपक्ष के विरोध के प्रत्युत्तर में सत्ता पक्ष के मंत्रियों और विधायकों ने कांग्रेस पर महिला विरोधी होने का आरोप लगाया। मंत्री कृष्णा गौर ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के आदर्शों को मूर्त रूप दिया जा रहा है, जबकि कांग्रेस केवल बाधाएं उत्पन्न कर रही है। मंत्री प्रतिमा बागरी ने मत व्यक्त किया कि इस ऐतिहासिक कदम का विरोध कर विपक्ष ने अपना जनविरोधी चेहरा उजागर कर दिया है। इसी कड़ी में भाजपा विधायक मीना सिंह ने घोषणा की कि महिला आरक्षण के मार्ग में अवरोध उत्पन्न करने वाली कांग्रेस की नीतियों के विरुद्ध सदन में निंदा प्रस्ताव लाया जाएगा। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर सहित अन्य सत्ताधारी सदस्यों ने भी संकल्प का पुरजोर समर्थन किया।
विधानसभा के बाहर प्रदर्शन: विधायक की पुलिस से नोकझोंक
सदन के भीतर चल रहे वाकयुद्ध के समानांतर विधानसभा परिसर के बाहर भी स्थिति तनावपूर्ण रही। कांग्रेस विधायक अभिजीत शाह ने एक अनूठे विरोध स्वरूप ट्रैक्टर-ट्रॉली के साथ विधानसभा की ओर बढ़ने का प्रयास किया। पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा घेरा (बैरिकेडिंग) लगाकर उन्हें मंत्रालय के समीप ही रोक दिया। इस दौरान विधायक और सुरक्षा अधिकारियों के मध्य तीखी बहस और धक्का-मुक्की की स्थिति निर्मित हो गई। जहाँ विधायक का तर्क था कि उनके वाहन के पास वैध प्रवेश पास है, वहीं पुलिस ने सुरक्षा प्रोटोकॉल का हवाला देते हुए ट्रैक्टर को प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति देने से इनकार कर दिया।
अशासकीय संकल्प पर अध्यक्ष की व्यवस्था और भविष्य की राह
सदन में उत्पन्न वैधानिक गतिरोध पर विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने एक महत्वपूर्ण व्यवस्था प्रतिपादित की। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्थापित संसदीय परंपराओं के अनुसार, यदि किसी विशिष्ट विषय पर शासन की ओर से शासकीय संकल्प प्रस्तुत कर दिया जाता है, तो उसी विषय पर निजी या अशासकीय संकल्प विचार योग्य नहीं रह जाता। संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी अध्यक्ष की व्यवस्था का समर्थन करते हुए कहा कि संपूर्ण प्रक्रिया नियमानुसार संचालित की जा रही है। वर्तमान में महिला आरक्षण के इस संवेदनशील मुद्दे ने मध्य प्रदेश की राजनीति में एक नया वैचारिक संघर्ष छेड़ दिया है।
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