वट सावित्री व्रत 2026 : जानें सही तरीका जिससे पूर्ण होगा आपका उपवास
एजेंसी, नई दिल्ली। वट सावित्री व्रत भारतीय हिंदू संस्कृति में सुहागिन महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र माना गया है। इस विशेष दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखद वैवाहिक जीवन की मंगल कामना के साथ माता सावित्री और वट वृक्ष की आराधना करती हैं। शास्त्रों के अनुसार, श्रद्धापूर्वक व्रत रखने के बाद विधि-विधान से किया गया पारण ही इस अनुष्ठान को पूर्णता प्रदान करता है। यदि आप भी इस वर्ष यह व्रत रख रही हैं, तो पारण के शुभ मुहूर्त और इसकी सही प्रक्रिया को समझना आवश्यक है।
वट सावित्री व्रत 16 मई 2026 को ज्येष्ठ अमावस्या पर मनाया जाएगा, जिसमें महिलाएं पति की लंबी आयु और परिवार की समृद्धि के लिए बरगद वृक्ष की पूजा करती हैं. यह व्रत भरणी नक्षत्र, सौभाग्य और शोभन योग के शुभ संयोग में पड़ रहा है, जिससे इसका धार्मिक महत्व और बढ़ गया है.… pic.twitter.com/0JM2sVvDV8
— Live Cities (@Live_Cities) May 14, 2026
वट सावित्री व्रत और पारण का शुभ समय
वर्ष 2026 में ज्येष्ठ अमावस्या की तिथि का विशेष महत्व है। पंचांग गणना के अनुसार, अमावस्या तिथि 16 मई की सुबह 5 बजकर 11 मिनट पर प्रारंभ हो जाएगी, जो अगले दिन यानी 17 मई को तड़के 1 बजकर 33 मिनट तक रहेगी। उदयातिथि की मान्यता के कारण वट सावित्री का मुख्य व्रत 16 मई को ही संपन्न किया जाएगा। जहाँ तक पारण के समय की बात है, तो विभिन्न क्षेत्रों में इसकी अलग-अलग परंपराएं प्रचलित हैं। कई महिलाएं अमावस्या तिथि के समाप्त होते ही व्रत खोल लेती हैं, जबकि अधिकांश सुहागिनें अगले दिन सूर्योदय के पश्चात पारण करना शुभ मानती हैं। जो महिलाएं अगले दिन व्रत का समापन करेंगी, उनके लिए 17 मई की सुबह 5 बजकर 58 मिनट से लेकर 7 बजे तक का समय पारण के लिए सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त रहेगा।
पारण की शास्त्रोक्त विधि और नियम
वट सावित्री व्रत का पारण करने की एक निश्चित और धार्मिक प्रक्रिया है, जिसका पालन करना फलदायी माना जाता है। पारण से पूर्व सुबह पुनः स्नान करके माता सावित्री की संक्षिप्त पूजा करनी चाहिए। इसके बाद, पूजा के दौरान वट वृक्ष पर अर्पित किए गए भीगे हुए चने और बरगद के कोमल पत्तों (कलियों) का सेवन करके व्रत खोलना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भीगे चने को निगलकर पारण करने की परंपरा है। पारण के समय फलों का सेवन भी उत्तम माना गया है। व्रत खोलने के पश्चात इस बात का विशेष ध्यान रखें कि पूरे दिन भोजन पूरी तरह सात्विक ही होना चाहिए। तामसिक भोजन या लहसुन-प्याज के सेवन से इस दिन बचना चाहिए।
आशीर्वाद और प्रसाद का महत्व
व्रत के समापन पर केवल भोजन करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि संस्कारों का पालन भी अनिवार्य है। पारण के तुरंत बाद घर के बड़े-बुजुर्गों के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लेना चाहिए, जिससे सौभाग्य में वृद्धि होती है। इसके अतिरिक्त, पूजा में चढ़ाया गया प्रसाद परिवार के सदस्यों और अन्य सुहागिन महिलाओं में वितरित करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि प्रसाद बांटने से पुण्य फल और अधिक बढ़ जाता है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। stpv.live एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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