एजेंसी, भोपाल। Jitu Patwari Letter : मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को एक खुला पत्र लिखकर प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। पटवारी ने सरकार को वित्तीय अनुशासन और सादगी अपनाने की नसीहत देते हुए कहा कि यदि सरकार वास्तव में प्रदेश की अर्थव्यवस्था को लेकर गंभीर है, तो इसकी शुरुआत सत्ता में बैठे लोगों से होनी चाहिए। उन्होंने पत्र के माध्यम से मांग की है कि जनता पर बोझ डालने के बजाय सरकार को अपने खर्चों में कटौती कर एक मिसाल पेश करनी चाहिए।
मुख्यमंत्री @DrMohanYadav51 जी,
मैं आपके समक्ष जनता की भावना के अनुरूप कुछ सुझाव रख रहा हूं, जिन्हें लागू कर आपकी सरकार यह साबित कर सकती है कि वह केवल भाषण ही नहीं, अपितु त्याग और जवाबदेही में भी विश्वास रखती है! pic.twitter.com/OAXfmGlJKF
— Jitendra (Jitu) Patwari (@jitupatwari) May 14, 2026
सरकारी आयोजनों और ताम-झाम पर एक साल की रोक
जीतू पटवारी ने अपने पत्र में सुझाव दिया है कि प्रदेश में होने वाले भव्य सरकारी उत्सवों और आयोजनों पर कम से कम एक साल के लिए पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकारी कार्यक्रम बिना किसी दिखावे और ताम-झाम के सादगी से आयोजित हों। पटवारी ने यह भी मांग की कि मंत्रियों, विधायकों और दर्जा प्राप्त मंत्रियों को मिलने वाले वेतन, भत्तों और अन्य सुविधाओं में एक साल तक कटौती की जाए। उनका तर्क है कि जब प्रदेश आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है, तब जन प्रतिनिधियों को जनता के साथ खड़ा दिखाई देना चाहिए।
जनता की समस्याओं का हवाला और वीआईपी कल्चर पर हमला
पटवारी ने प्रदेश की वर्तमान स्थिति का जिक्र करते हुए लिखा कि एक तरफ किसान आत्महत्या कर रहे हैं और युवा बेरोजगारी से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार उत्सवों पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही है। उन्होंने इसे जनता के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा बताया। कांग्रेस अध्यक्ष ने वीआईपी कल्चर और लग्जरी सरकारी खर्चों पर नियंत्रण लगाने की मांग करते हुए कहा कि निवेश के नाम पर की जाने वाली विदेश यात्राओं और अन्य खर्चों को तुरंत रोका जाना चाहिए।
डिजिटल माध्यम और सादगी पर जोर
मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में पटवारी ने सलाह दी कि सरकार को शक्ति प्रदर्शन के लिए सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग बंद करना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब स्कूल और न्यायालय डिजिटल माध्यम से चल सकते हैं, तो सरकार को भी अपने संवाद और कार्यक्रम ऑनलाइन आयोजित करने चाहिए ताकि यात्रा और अन्य खर्चों को बचाया जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार और फिजूलखर्ची पर लगाम लगाकर ही प्रदेश के युवाओं, आदिवासियों और किसानों के हितों की रक्षा की जा सकती है।
विपक्ष का कड़ा रुख और जवाबदेही की मांग
जीतू पटवारी ने अंत में कहा कि सरकार को सादगी का संदेश केवल कागजों या विज्ञापनों तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि इसे धरातल पर उतारना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपेक्षा की है कि वे इन सुझावों पर गंभीरता से विचार करेंगे और प्रदेश की आर्थिक सेहत सुधारने के लिए कड़े कदम उठाएंगे। विपक्ष के इस खुले पत्र ने प्रदेश की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है, खासकर सरकारी खर्चों और जन प्रतिनिधियों की सुविधाओं को लेकर।
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